स्वस्थ्य जीवन की चलती फिरती प्रयोगशाला है मंगल सिंह- शांति देवी
सादा खाना, सादा सोचना, सादा रहना, सादी बात करना यहीं है स्वस्थ्य जीवन की पहचान
14 जनवरी को कोसली विधानसभा के सभी 138 गांवों के सबसे बुजुर्ग दंपति को सम्मानित किया जाएगा। विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के सौजन्य में यह पहल शुरू हुई है
रणघोष में हर रोज पढ़ेंगे हर गांव के सबसे बुजुर्ग दंपति की कहानी
रणघोष खास. कोसली की कलम से
वर्तमान परिवेश में 100 साल की उम्र क्या होती है। स्वास्थ्य क्या होता है, रहन-सहन, दिनचर्या क्या होती है। दुख सुख किस चिड़िया का नाम है। योगा क्या होता है। शरीर में होने वाली तरह तरह की बीमारियां कैसे जन्म लेती हैं। कौनसा भोजन लेना है और किससे परहेज करना है। शिक्षा का मूल स्वरूप क्या होना चाहिए। परिवार- समाज और राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोकर रखने वाले संस्कार और सोच क्या होती है। जिंदगी एक कहानी के अलावा कुछ नहीं है। इन तमाम सवालों का जवाब जिले में एक शख्स के पास है जो खुद उदाहरण बनकर हमारे सामने हैं। हम बात कर रहे हैं गांव कोसली के मंगल सिंह की जो 5 जनवरी को जिंदगी की सेंचुरी यानि 100 साल पूरी करने जा रहे हैं। उनकी धर्मपत्नी शांति देवी उम्र में उनसे 8 साल छोटी है। मगर दोनों एक दूसरे का पूरा ख्याल रखते हैं। परिवार का ढेर सारा स्नेह और अपनापन इतना मिला हुआ है कि पता नहीं चला मंगल सिंह जिंदगी की चलती फिरती प्रयोगशाला बन गए। सबसे बड़ी बात 1920 में जन्में मंगल सिंह बताते हैं कि वे खेती बाड़ी करते थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जब आजाद हिंद फौज का गठन किया तो वे उसमें भर्ती हो गए। उस समय देश की आजादी का जुनून हर सच्चे भारतीय के खून में दौड़ रहा था। कनीना के ककराला की शांति देवी से उनकी शादी हो गईं। चार संतानें हुई जिसमें दो बेटे- दो बेटियों से परिवार का विस्तार हुआ वर्तमान में मंगल सिंह- शांति देवी के 20 सदस्यों वाले परिवार में पडपौत्र तक शामिल हो गए हैं।
मंगल सिंह वहीं खाते हैं जो घर में बनता है। सारी सुविधा होने के बाद भी चूल्हे की रोटियां बनती है। उनके पोते कर्मवीर बताते हैं कि जब से हमने होश संभाला है बाबा का रूटीन सर्दी- गर्मी एक जैसा रहता है। सादा खाना, सादा रहना, सादा सोचना ही उनके स्वस्थ्य जीवन का राज है। उनका जीवन में किसी से कोई बैर नहीं रहा। सुबह 5 बजे उठते हैं। एक कप चाय के साथ गर्म पानी पीते हैं। चूल्हे की बनी रोटी व खेत में होने वाली सब्जी उनकी थाली में होती है। दही- दूध नियमित है। सबसे बड़ी बात खान- पान में कोई मिलावट नहीं होती। उन्होंने कभी अपनी इच्छाओं के लिए अपने मूल्यों को कमजोर नहीं होने दिया। उनके शरीर में बस घुटनों के दर्द के अलावा ऐसी कोई बीमारी नहीं है। शौच वे खुद जाते हैं बाकी कार्यो में परिवार के सदस्य मदद करवाते हैं। हमारे परिवार के सदस्यों के लिए हमारे दादा- दादी ही चारों धाम है।

