एम्स को लेकर मौजूदा तस्वीर….एम्स जमीन पर उतरने को तैयार, दो कदम सरकार चले, उतने ही कदम किसान बढ़ाए, बात बन जाएगी

रणघोष खास. सुभाष चौधरी
नेशनल हाइवे 11 पर रेवाड़ी से 22 किमी दूर गांव माजरा- भालखी में प्रस्तावित एम्स के बनने की संभावनाएं एक बार फिर जमीन पर उतरती नजर आ रही है। स्थानीय नेताओं की टूटी खामोशी से ठहर गए प्रयासों ने गति पकड़नी शुरू हो गई है। राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. बनवारीलाल के बाद कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्‌टर से इस मसले पर आधे घंटे से ज्यादा बातचीत की। यहां बता दें कि 12 जनवरी 2020 को रेवाड़ी दौरे पर आए सीएम से भी लक्ष्मण यादव ने एम्स संघर्ष समिति की मीटिंग करवाई थी और इस मसले पर बातचीत हुई थी। एम्स को लेकर आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए सीधा सपाट फार्मूला निकाला गया है। पहला किसान 50 लाख प्रति एकड़ मुआवजा की जिद ना पकड़े। दूसरा सरकार भी अपनी घोषणा पर अड़ी ना रहे। जमीन की मुआवजा राशि लेने और देने के बीच इतना भारी भरकम अंतर नहीं है कि वह सरकार की सीमा से बाहर है लेकिन सरकार का तर्क है कि मुआवजा को लेकर जो भी निर्णय लिए जाते हैं उसका असर पूरा हरियाणा पर होता है। इसलिए यह महज किसी एक परियोजना या गांव का मसला नहीं है। उधर किसानों का कहना है कि जमीन पर सही तौर तरीकों से उनकी बातों को नहीं सुना जा रहा है। अगर वे मुआवजा को लेकर पीछे हटते हैं तो सरकार इस बात भी गारंटी दे कि जो वह मुआवजा देगी उसी राशि में उन्हें अपने आस पास 5-7 किमी दायरे में उसी रेट में जमीन मिल जाएगी। उधर सरकार का मानना है कि जो एम्स संघर्ष समिति बनी है उसमें आधे से ज्यादा राजनीति कर रहे हैं। वे किसानों को बरगला रहे हैं। इसलिए बनती बात बिगड़ रही है। संघर्ष समिति का तर्क है कि वे पीछे हटने को तैयार है बस किसानों को उनकी जमीन का सम्मान मिलना चाहिए। यहां गौर करने वाली बात यह है कि जो किसान जमीन देने को तैयार है। उसमें अधिकांश के परिवार से ना कोई सरकारी नौकरी में है और ना ही राजनीति से। ऐसे लोग भी है जो कहने को रिकार्ड में पेशे से किसान है लेकिन साथ ही सरकारी नौकरी में है। कुछ राजनीति में सक्रिय है। इनकी जमीन एम्स की प्रस्तावित जमीन से लगती है लेकिन उन्होंने अपनी एक इंच जमीन भी देने को तैयार नहीं है। यानि खेती से अपने परिवार का पेट भरने वाले असली किसान की बात को अभी तक सुना ही नहीं गया है कि वे क्या कहना चाहते हैं। साथ ही अभी तक इस मसले पर होती आ रही मीटिंग में भी इन किसानों की मौजूदगी ना के बराबर होती है। विधायक लक्ष्मण सिंह यादव को भरोसा है कि एम्स जरूर बनेगा बस दोनों तरफ से जिद की बजाय सकारात्मक पहल हो। मुख्यमंत्री एम्स को लेकर सकारात्मक है। वे लगातार इस मसले पर उनसे संपर्क में हैं। सरकार की मंशा स्पष्ट है कि वह रेवाड़ी जिले में एम्स बनाना चाहती है। इसलिए इस पर राजनीति नहीं हो तो क्षेत्र के लिए बेहतर रहेगा। इस बात का सभी को ध्यान रखना होगा। कुल मिलाकर एम्स का मसला एक बार फिर अलग अलग रास्तों से हिचकोले खाते हुए एक बार फिर सही रास्ता पर चलता हुआ नजर आ रहा है।

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