क्यों आती है उबासी, क्या नींद आना नहीं है उसका मतलब!

उबासी एक सामान्य सी शारीरिक क्रिया होती है जिसका सौभाग्य से किसी रोग से संबंध नहीं होता है और ना ही उसे किसी रोग या समस्या से संबंधित माना जाता है. लेकिन इसको लेकर कई तरह की धारणाएं हैं जिनमें कुछ सही हैं तो कुछ भ्रांतियां हैं. इतना ही नहीं कौन सी धारणा सही है और कौन सी भ्रांति इस पर भी लोगों में अलग अलग मत हैं. ऐसे में वैज्ञानिकों के भी अपने मत हैं जो सच होने के बाद भी उबासी के भ्रमजाल को और जटिल बनाते हैं क्योंकि उनके मुताबिक उबासी आने का एक कारण नहीं है. लेकिन यह समझना जरूरी है कि आखिर उबासी आती क्यों है.

सबसे प्रचलित धारणा
बहुत से लोगों को यही मानना है कि उबासी के जरिए इंसान ऑक्सीजन को अंदर लेने की कोशिश करता है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर छोड़ने की कोशिश करता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसे ऑक्सीजन की कमी हो रही है या कार्बनडाइऑक्साइड ज्यादा हो गई है. रोचक बात यह है कि कई लोग इसे वैज्ञानिक कारण तक करार देते हैं.

नींद से संबंध है भी या नहीं
औसतन इंसान रोजाना 5 से 20 बार उबासी लेते हैं और हर बार की क्रिया करीब पांच सेंकेड की होती है. उबासी को नींद से जोड़ कर देखा जाता है. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि उबासी का नींद से संबंध तो है लेकिन इसका मतलब यह नहीं वह नींद की आवश्यकता का संकेत है. यह तथ्य भी कम भ्रमित करने वाला नहीं है.

एक तरह का संचार संकेत?
वैज्ञानिकों का कहना है कि उबासी की सटीक कारण अब तक ज्ञात नहीं हैं लेकिन फिर भी माना जाता है कि एक प्रकार का बिना शब्दों का संचार है, एक तरह का संकेत है. बबून उबासी को ऐसे संकेत के तौर पर लेते हैं जिससे उनके समूह में सभी को समझ में आ जाता है कि सबके सोने का समय हो गया है. वहीं यह भी एक स्थापित सत्य है कि उबासी एक तरह से संक्रामक रूप से फैलती भी है.

कब ली जाती है उबासी
लोग तब उबासी लेते हैं जब उनकी सांस गहरी नहीं होती है या जब वे थके हुए होते हैं, बोर हो रहे होते हैं या फिर हाल ही में सोकर उठे होते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उबासी से हमारे फेफड़े और ऊतक फैलते हैं और उससे हवा आने जाने के महीन रास्ते खराब या बंद होने से रुक जाता है.

एथलीट और संगीतज्ञ
एथलीट और संगीतज्ञ प्रायः अपने प्रदर्शन के दौरान या अपन काम पर ध्यान देने के दौरान उबारसी लेते  देखे गए हैं. ऐसा हालत में उबासी की वजह से कुछ और होती है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मुताबिक, इससे उनके दिल की धड़कने की दर बढ़ती है, मांसपेशियों और जोड़ों में खिंचाव आता है और शरीर में जागरूकता के स्तर को बढ़ा देता है.

खून और दिमाग होता है ठंडा
उबासी ऐसी प्रक्रिया है जिसमें इंसान को चैतन्य तौर पर प्रयास करने की जरूरत नहीं हौती है. इससे दिमाग को ठंडा रहने में मदद मिलती है. उबासी लने से जबड़ों में खिंचाव होता है और पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रकाशित लेख में इवोल्यूशनरी साइकोलॉजी के शोधकर्ता एन्ड्रयू सी गैलप कहते हैं कि इंसान ठंडी हवा को सांस के तौर पर अंदर खींचता है. जब ये हवा खून से मिलती है तो खून ठंडा होता है.

लेख बताया गया है कि जब इंसान बोर होता है, या जब वह सोने जा रहा होता है, या जागने को फौरन बाद का समय हो, तब उबासी ज्यादा आती है. इससे के के इंसान के दिमाग और शरीर को एक अवस्था से दूसरी अवस्था में जाने में मदद मिलती है. इसका इससे मतलब नहीं है कि वह कितना थका है या उसे कितनी ज्यादा नींद की जरूरत है. वहीं आमतौर पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक ना होते हुए ये कुछ तंत्रिका संबंधी बीमारियों के लक्षण के रूप में दिखाई देती है. लेकिन माइग्रेन और सिरदर्द की स्थिति में भी इंसान को उबासी आ सकती है.

 

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