गोमूत्र अर्क लेती हूं इसलिए नहीं हुआ कोरोना: सांसद प्रज्ञा ठाकुर

-आख़िर ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ महामारी एक्ट में मुक़दमा दर्ज क्यों नहीं किया जाता। जनप्रतिनिधियों से उम्मीद की जाती है कि वे कोई ढंग की बात करेंगे ताकि लोग उससे कुछ सीख सकें।


उत्तर प्रदेश के बलिया से बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह के द्वारा गोमूत्र का प्रचार करने के बाद भोपाल की बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर भी इसके पक्ष में उतर आई हैं। प्रज्ञा ठाकुर ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, “देसी गाय का पालन करिए। देसी गाय का गोमूत्र अर्क अगर हम लेते हैं तो उससे हमारे फेफड़ों का इन्फेक्शन दूर होता है। मैं बहुत तकलीफ में हूं लेकिन मैं हर दिन गोमूत्र अर्क लेती हूं और इसलिए मुझे अभी कोरोना के लिए कोई औषधि नहीं लेनी पड़ रही है, न ही मैं कोरोनाग्रस्त हूं और न ही ईश्वर मुझे करेगा क्योंकि मैं उस औषधि का उपयोग कर रही हूं।” बीजेपी के नेताओं में शायद होड़ लगी हुई है कि वे कोरोना महामारी के इस ख़राब दौर में अवैज्ञानिक और मूर्खतापूर्ण बयानों की झड़ी लगा दें।गोमूत्र का प्रचार जोरों परबीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल हो रहा है जिसमें वह गोमूत्र या गो अर्क से कोरोना को भगाने का दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि 50 मिली गो अर्क पीजिए और दिन में 5 से 10 बार हल्दी का सेवन कीजिए और इससे लोगों को कोरोना में ज़रूर लाभ मिलेगा। शिवराज सरकार में संस्कृति मंत्री ऊषा ठाकुर ने कुछ दिन पहले इंदौर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा था, “पर्यावरण की शुद्धि के लिए सब लोग कुछ दिन सुबह 10 बजे आहूतियां डालें। महामारियों के नाश में अनादिकाल से यज्ञ की परम्परा है।” मंत्री ने कहा, “ये पर्यावरण को शुद्ध करने की यज्ञ चिकित्सा है, ये धर्मान्धता नहीं है, ये कर्मकांड नहीं है। हम सब दो-दो आहूतियां डालें, अपने खाते का पर्यावरण शुद्ध करें और तीसरी लहर हिंदुस्तान को छू नहीं पाएगी।”

आहूतियों से बच जाएगा देश!

जबकि कोरोना की तीसरी लहर को लेकर ख़ुद सरकार, वैज्ञानिक और डॉक्टर्स चेता चुके हैं। बताया गया है कि यह दूसरी लहर से भी ज़्यादा ख़तरनाक होगी और इससे निपटने के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां करनी होंगी। लेकिन मंत्री ऊषा ठाकुर की मानें तो फिर हमें अस्पतालों, डॉक्टर्स, दवाइयों की तो कोई ज़रूरत ही नहीं है केवल आहूतियां देने से ही देश कोरोना की तीसरी लहर से बच जाएगा। 

मुक़दमा क्यों नहीं दर्ज होता?

आख़िर ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ महामारी एक्ट में मुक़दमा दर्ज क्यों नहीं किया जाता। जनप्रतिनिधियों से उम्मीद की जाती है कि वे कोई ढंग की बात करेंगे ताकि लोग उससे कुछ सीख सकें। लेकिन यहां तो दिन-रात गोमूत्र का प्रचार चल रहा है। इन लोगों की बातों पर भरोसा करके गांवों का कोई ग़रीब-कमजोर व्यक्ति अगर बीमार होने के बाद भी गोमूत्र के ही भरोसे बैठे रहे तो उसकी जान दुनिया की कोई ताक़त नहीं बचा सकती। ऐसे में ये उसकी मौत नहीं बल्कि हत्या कही जाएगी। पिछले साल कोरोना शुरू होने के बाद गोमूत्र पार्टी का भी आयोजन दिल्ली में एक कथित संत की ओर से किया गया था। 

 ‘कोरोना वायरस को भी जीने का अधिकार’

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी बीते दिनों कोरोना वायरस को लेकर दिए गए जबरदस्त ज्ञान के कारण बहुत चर्चा बटोरी। रावत ने इस वायरस के प्रति ममता उड़ेलते हुए कहा था कि हम इस वायरस के पीछे पड़े हुए हैं और वह अपनी जान बचाने के लिए रूप बदल रहा है और बहरूपिया हो गया है।  रावत ने उत्तराखंड के स्थानीय न्यूज़ चैनल के न्यूज़ से बात करते हुए कहा था, “कोरोना वायरस भी एक प्राणी है, हम भी एक प्राणी हैं। लेकिन वो प्राणी भी जीना चाहता है और उसे भी जीने का अधिकार है। आज हमने उसके लिए वैक्सीन बना दी तो उसने भी अपनी ताक़त बढ़ा दी। उसके स्प्रेड करने की ताक़त बढ़ी है।” 

‘गाय ऑक्सीजन छोड़ती है’

चार साल तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल चुके रावत ने 2019 में कहा था कि गाय सांस लेते समय तो ऑक्सीजन लेती है ही, वह ऑक्सीजन छोड़ती भी है। रावत ने यह भी कहा था कि गाय को सहलाने से सांस से जुड़े रोग ठीक हो जाते हैं और गाय के पास रहने से टीबी की बीमारी ठीक हो जाती है।

भाभीजी पापड़ और गो कोरोना गो

कुछ वक़्त पहले केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दावा किया था कि भाभीजी पापड़ कोरोना से लड़ने में मददगार है। उनके इस बयान की सोशल मीडिया पर काफ़ी आलोचना भी हुई थी। केंद्रीय मंत्री राम दास अठावले ने पिछले साल कोरोना को भगाने के लिए गो कोरोना गो का मंत्र दिया था।

पीएम मोदी भी पीछे नहीं 

बीजेपी में कई नेता ऐसे हैं जो इस तरह की बातें कर चुके हैं जिनकी समाज में जबरदस्त चर्चा होती है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के बीच मोदी ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि 1988 में उनके पास एक डिजिटल कैमरा था और उन्होंने रंगीन तसवीर ई-मेल से दिल्ली भेजी थी। जबकि सच्चाई यह है कि भारत में 1995 से पहले आम लोगों की पहुंच में इंटरनेट और ई-मेल जैसी सुविधाएं थी ही नहीं। मोदी ने इसके अलावा ऐसे ही कई बयान दिए हैं, जिन्हें लेकर उनका मजाक बन चुका है।

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