जिंदगी ओर कुछ नहीं तेरी मेरी कहानी है.. फुटपाथ पर बदहाल मिले आईआईटी के इंजीनियर, दर्द भरी इस कहानी को जरूर पढे…

फुटपाथ पर बदहाल स्थिति मिला। फरार्टेदार अंग्रेजी में बातचीत करते हैं। जो भी देखता है, देखकर ठिठक जाता है। ऐसे ही किसी व्यक्ति ने उनके इस हाल में होने की सूचना स्वर्ग सदन आश्रम की टीम को दी। आश्रम के विकास गोस्वामी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बुजुर्ग से बात की तो पता चला कि उनका नाम सुरेंद्र वशिष्ठ उम्र 92 साल है। उन्होंने आईआईटी कानपुर से 1969 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और 1972 में लखनऊ के डीएवी कॉलेज से एलएलएम किया है।

आईआईटी कानपुर के पास आउट

विकास गोस्वामी ने उनसे पूछताछ की तो उन्होंने अपना नाम सुरेंद्र वशिष्ठ बताया और कहा कि वे बरेली के रहने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनका एक भतीजा है जो अभी वर्तमान में ग्वालियर के गांधीनगर इलाके में रहता है। विकास परिचय मिलने के बाद विकास उन बुजुर्ग सज्जन को स्वर्ग सदन आश्रम ले आए। जब उनसे धीरे-धीरे पूछताछ और बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा तो पता चला कि ये कोई और नहीं बल्कि ग्वालियर के मिशाहिल स्कूल के टॉपर रहे सुरेंद्र वशिष्ठ हैं। उन्होंने 1969 में आईआईटी कानपुर  और 1972 में लखनऊ के डीएवी कॉलेज से एलएलएम किया। उसके बाद दिल्ली के कनॉट प्लेस के रीगल स्थित खादी भंडार सहित कई जगह नौकरी भी की। लेकिन सुरेन्द्र वशिष्ठ इस हालत में कैसे पहुंचे यह वर्तमान में स्पष्ट नहीं हो पाया है। हालांकि उनका कहना है कि उनका पूरा परिवार है। सब विदेश में रहते हैं। कभी-कभी मैं उनसे मिलने जाता हूं। कभी परिवार वाले भी उनसे मिलने आते रहते हैं। विकास ने जब सुरेंद्र के बताए गए भतीजे से संपर्क किया तो उन्होंने उनकी सारी बातें सच होने की पुष्टि की। लेकिन साथ ही ये भी कहा कि सुरेन्द्र अविवाहित हैं। बुजुर्ग सुरेंद्र वशिष्ठ अपनी उम्र 92 साल बता रहे हैं। वर्तमान में गोस्वामी ने उन्हें अपने स्वर्ग सदन आश्रम में शरण दे दी है। सुरेंद्र वशिष्ठ ने बताया कि उनके पिता गोलवलियर की जेसी मिल में काम करते थे। लोहिया बाजार में घर हुआ करता था ।वासियों गोस्वामी वर्तमान में उनके परिवार का पता लगा रहे हैं। इससे पहले भी ग्वालियर के फुटपाथ में ठंड में ठिठुरते और कचरे में खाना पकाने के लिए पुलिस के एक पूर्व निरीक्षक मनीष मिश्रा मिले थे। उनकी मदद के लिए पहुंचे पुलिस वालों को मनीष ने पहचानकर नाम पुकार कर आवाज दी थी।

एक बार यूएस भी जा चुका हूं

बुजुर्ग के मुताबिक वे एक बार यूएसए भी जा चुके हैं। थोड़ा सोचने के बाद कहते हैं मेरी जो जमा पूंजी थी वह समाजसेवा में खर्च कर दी। इसके बाद मैं अभी भी खादी भंडार के लिए काम करता हूं। उससे जो पैसा मिलता है उससे अपना खर्च चलाता हूं

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