रणघोष की सीधी सपाट बात : पौधे लगाने को फैशन शो मत बनाइए, पिछला जो लगाया उसे दिखाइए

100 में से 95 खत्म, हम पौधे नहीं लगा रहे दिखावे के नाम पर उनकी बलि ले रहे हैं


WhatsApp Image 2023-06-25 at 10.19.09 PMरणघोष खास. प्रदीप नारायण


सावन में पौधा लगाने की संस्कृति अब फैशन शो  के रेंप पर अदाएं बिखेरती नजर आ रही है। एक पौधे को 10 से 20  पाऊच पर्यावरण प्रेमी ऐसे घेरे रहेंगे जैसे वह उनके चंगुल से निकलकर भाग ना जाए। मीडिया में इसकी कवरेज का हमला इस कदर जारी है मानो पौधों की भारी भरकम सेना प्रकृति पर राज करने निकली हो। इस मौसम में अचानक इतनी तादाद में पाऊच पर्यावरण प्रेमियों को देखकर नर्सरी में पौधों का परिवार सहमा हुआ है। वे एक दूसरे को बांहों में पकड़कर रोते हुए कह रहे है यहां कम से कम मातृत्व जैसी देखभाल तो हो रही थी। इस घर से बाहर जाते ही उनकी दिखावे के नाम पर उनकी बलि दे जाएगी। वे किसी जानवर या पशु का आहार बनेंगे या इंसानी नादानियों का। इससे अच्छा है कि वे नर्सरी में ही दम तोड़ दे कम से कम गति तो मिलेगी। कितना अच्छा होता नर्सरी की तरह बाहर भी समझदार होने तक जिम्मेदारी के साथ उनकी परवरिश होती। वे खुशी खुशी अपने परिवार से बेटी की तरह विदा होते। अफसोस 100 में से 95 पौधे जमीन से रिश्ता बनाने से पहले ही अलग अलग नादानियों का शिकार हो जाते हैं। जो बचकर बड़े हो जाते हैं वे किस्मतवाले होते हैं कि उन्हें पर्यावरण का असली मुखिया मिला। पौधे व गर्भ में जन्म लेती बेटी की कहानी एक जैसी है। दोनों अपनी मर्जी से नहीं इंसानी जमात की मानसिकता से लड़ते हुए दुनिया में कदम रखते हैं। दोनों को बचाने के लिए यहीं जमात कानून बनाती है ओर यहीं उसका मजाक उड़ाती नजर आती है।

हर साल सावन में बेहिसाब पौधे लगाए जाते हैं। लोकल मीडिया कवरेज का जबरदस्त फायदा यह है कि अगर आपने पौधे को छू भी लिया तो वह हाथों हाथ आपको पर्यावरण प्रेमी की उपाधि से नवाज देगा। इस आसान शोहरत को पाने के लिए बस दो चार फोटो, साथ में चार पांच लाइनें भेजकर मीडिया कार्यालय में एक नमस्कार वाली कॉल करनी है। यहां पत्रकार से आपकी पहचान कवरेज की हरियाली तय करेगी। जिस दिन मीडिया ने ठान लिया कि वह पौधारोपण से जुड़े उन्हीं कार्यक्रमों एवं आयोजनों को कवरेज देगा जिन्होंने पिछले दफा लगाए पौधो को संतान की तरह पाला पोषा है। पिछले और नए पौधो को साथ कवरेज दीजिए। कितना अच्छा लगेगा जब नया पौधा अपने परिवार के सदस्यों को जिंदा देखकर खिलखिला उठेगा। यहीं तो सावन में पर्यावरण की असली खुबसूरती है। यकीन मानिए ऐसा करते ही पाऊच प्रेमियों की भीड़ एकाएक गायब हो जाएगी। हमें असली पर्यावरण मुखिया मिल जाएंगे। हमारी कवरेज भी हरी भरी नजर आएगी।

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