रेवाड़ी शहर के सेक्टर चार में डकैती की घटना पर सीधी सपाट बात

 हर घटना सबक का सबूत छोड़कर जाती है, जिसे भूलना ही नए अपराध को जन्म देना है


रणघोष खास. सुभाष चौधरी


हरियाणा के रेवाड़ी शहर के सेक्टर चार में पिस्तौल के बल पर एक घर में हुई डकैती की घटना यह बताती है कि सुरक्षा का मसला अब निजी अनिवार्यता में शामिल करना बेहद जरूरी हो गया है। शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के साथ साथ आए दिन हो रही अपराधों को लेकर भी बच्चों एवं युवाओं को बेहद गंभीरता के साथ जागरूक करना जरूरी है। इस घटना में युवती ने अकेले रहकर जिस तरह बदमाशों का मुकाबला किया उस हिम्मत का सम्मान होना चाहिए।  इस तरह की घटनाएं किसी के साथ किसी भी समय किसी भी अंजाम के साथ हो सकती है। लिहाजा सबकुछ पुलिस के भरोसे रहकर व उसे कोसकर अपराधों पर काबू नहीं पाया जा सकता।

दरअसल अपराध के कई चेहरे हैं। वह दिन दहाड़े सड़क पर घर के अंदर हो सकता है। चोरी-लूटपाट में फेस टू फेस होकर घटना को अंजाम दिया जाता है। साइबर क्राइम में मोबाइल व अन्य तौर तरीकों से दूर बैठे दिमाग को घूमाकर लूटा जाता है। सीसीटीवी कैमरों की मदद से पुलिस कुछ मामलों को पकड़ने में कामयाब हो जाती है लेकिन अधिकांश जांच फाइलों में ही एक समय बाद दफन हो जाते हैं। जब भी घटना होती है मीडिया में हलचल मचाकर कुछ  दिनों तक असर बनाए रखती है। यह होना और करना रूटीन बन चुका है। इस तरह की घटनाओं में महत्वपूर्ण बदमाशों का बेखौफ होकर आना और दिन या रात किसी भी समय लूटकर चले जाने के दुस्साहस को समझना जरूरी है। यहां पूरी तरह पुलिस की कानून व्यवस्था कटघरे में खड़ी नजर आती है। पुलिस के भरोसे भी पूरी तरह स्वयं को सुरक्षित मानना भी नासमझी है। हर जगह पुलिस की मौजूदगी संभव नही है। ऐसे में हो रहे अपराधों को लेकर आमजन में जागरूकता की बेहद कमी है। इस तरह की घटनाएं पहली बार नहीं हुई कुछ सालों में कम ज्यादा होती आ रही हैं। दरवाजा खोलते समय सावधानी बरतना, किसी अनजानी आवाज पर भरोसा नहीं करना, कोरियर, मैकेनिक या किसी भी सामान की डिलीवरी के बहाने आने वालों की नीयत को भांपना जैसी सोच से घर में हर किसी को प्रशिक्षित होना बेहद जरूरी है। साथ ही सभी के मोबाइल में आस पास पड़ोसी के साथ साथ संबंधित पुलिस चौकी एवं थाना के इमरजेंसी नंबर भी जरूर होने चाहिए। सीसीटीवी कैमरे का लगाना भी जरूरी होना चाहिए। घटना के समय ऐसी बहुत सी वजह होती है जिससे सबक लेकर भविष्य में होने वाली घटनाओं से बचा जा सकता है। हर घटना के लिए पुलिस को बार बार जिम्मेदार मानकर चिल्लाने की मानसिकता से बेहतर खुद की सुरक्षा के लिए अलर्ट एवं सजग होने का समय आ चुका है। जिस तरह शरीर का स्वास्थ्य बिगड़ने पर तुरंत इलाज कराते हैं। इसी तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पूरी तरह जागरूक होना बेहद जरूरी है। 

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