हरियाणा की गुरुग्राम सीट पर रणघोष की सीधी सपाट बात

भाजपा की आसान जीत पर झपटा मारने लगा राज बब्बर का पंजा


Pardeep ji logoरणघोष खास. प्रदीप हरीश नारायण

गुरुग्राम संसदीय सीट पर चार जून को भाजपा राव इंद्रजीत सिंह के नाम पर जीत की हैट्रिक लगाएगी या हारकर दक्षिण हरियाणा की राजनीति में वही लौट जाएगी जहा से उसने 2014 में वापसी की थी। यह लिखना इसलिए जरूरी हो गया की जिस सीट को भाजपा हाईकमान एकतरफा मानकर अपनी ऊर्जा को कही ओर बहा रहा था। उसे दबे पाव वापस वही लौटना पड़ रहा है। कांग्रेस से आए राज बब्बर ने अपने अंदाज व शब्दों की शैली से यह जता दिया की बेशक वे देरी से मैदान में उतरे हैं लेकिन उनकी तरकश से निकल रहे तीर सही निशाना साध रहे हैं। यहा गौर करने वाली बात यह रहेगी की राव इंद्रजीत की जीत का अंतर पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा रहा तो वे चार महीने बाद होने जा रहे  हरियाणा विधानसभा चुनाव में गुरुग्राम से नांगल चौधरी तक की जमीन को नाप डालेंगे। अगर यह अंतर बहुत कम में सिमट गया तो उनकी जीत का स्वाद हार जैसा रहेगा। उन पर भाजपा के भीतर और बाहर विरोधियों का हमला तेज होगा। वजह राव इस चुनाव में भाजपा  प्रत्याशी होते हुए भी मोदी के नाम पर अकेले ही  अपने समर्थकों की फौज के साथ अपनी जीत को सुनिश्चित करने में लगे हुए है। जिस राज बब्बर को मनोरंजन करने वाला कलाकार मानकर हलके में लिया जा रहा था। दरअसल वह असल में अभिनेता से राजनेता ज्यादा असरदार नजर आ रहा है।

योगेंद्र यादव के आने से कांग्रेस को सही दिशा मिल गईं

इसमें कोई दो राय नही भारत जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक योगेंद्र यादव राजनीति के मैदान में धुरंधर खिलाड़ी नही है लेकिन उनके मनो मस्तिक से निकलने वाली सोच राजनीति की दिशा और दशा बदलने की पूरी ताकत रखती है। अगर योगेंद्र यादव ने आगामी सात दिनों में राज बब्बर को पूरी तरह संभाल लिया ओर कांग्रेस के बिखरे संगठन को पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव के साथ मिलकर खासकर रेवाड़ी, पटौदी, गुरुग्राम, बादशाहपुर, बावल को सुनियोजित तरीके से कवर कर लिया तो राव के लिए यह जीत पिछले दो चुनावों के मुकाबले बेहद कठिन हो जाएगी। इंद्रजीत सिंह को इसका आभास भी हो चुका है। वे समझ चुके हैं की जाति और धर्म पर लड़ा जा रहा यह चुनाव दिन प्रतिदिन चुनौती बनता जा रहा है। उन्हें वोट हिंदू मुस्लिम के नाम पर मुकाबले के वोट  स्वत: मिल जाएंगे लेकिन  अलग अलग जातियों में बंटे हिंदू भी इस बार अलग अलग वजहों से पूरी तरह से भाजपा के साथ नजर नही आ रहे हैं। जाट और एससीएसटी को संभालना अब भाजपा के लिए आसान नही है। इसी तरह पंजाबी बिरादरी भी राज बब्बर को पूरी तरह निराश नही करेगी। अन्य जातियां भी भाजपा को लेकर एकजुट नही है। इतना ही नही राव खुद ही अपनी पार्टी में चारों तरफ अलग थलग नजर आ रहे हैं। जिसको लेकर वे अपना गुस्सा भी जाहिर कर चुके हैं।  ले देकर उनके पास नरेंद्र मोदी का ब्रह्मास्त्र है जो अंतिम समय तक उनकी जीत को पार  लगा सकता है। इसके अलावा राव के पास अपना तजुर्बा और समर्थक है जिसका वे लगातार इस्तेमाल कर अभी तक मजबूती बनाए हुए हैं। इसलिए यह कहना की यह सीट आसानी से भाजपा को मिलती नजर आ रही है। ऐसी सोच ओर दावा करने वाले राव के लिए सबसे बड़े घातक साबित हो सकते हैं। चुनाव मैदान में ना कोई कमजोर होता है और नही ताकतवर। किसका कब किस समय किस पर दांव चल जाए। कुछ नही कहा जा सकता।