होशियार- खबरदार सीएम साहब पधार रहे हैं….

Pardeep ji logoरणघोष खास. प्रदीप नारायण

कौन कहता है राजा महाराजाओं का दौर समाप्त हो चुका है। किसने कहां दरबार नहीं लगते। एक बार  अपने यहां सीएम साहब को बुलाकर तो देखो। दफन हो चुकी सड़कें जिंदा होकर दौड़ती नजर आएगी। अधिकारी- कर्मचारियों के दिलों दिमाग में ईमानदारी का भूत सिर चढ़कर बोलेगा। जो फाइलें अलमारियों में दम तोड़ रही थी वे खुले मंच पर पन्ने पलटती नजर आएगी। जिन बिजली के तारों को कपड़े सुखाने की रस्सी बना दिया था उसमें करंट नंगा होकर बेकाबू हो जाएगा। जिस आमजन का अधिकारी बाबू काम करने के नाम पर चक्कर लगवाते थे वे गेट पर स्वागत करते हुए दिखेंगे । सबसे बड़ी बात सीएम साहब का काफिला जहां से होकर गुजरेगा समझ जाइए वह रास्ता पप्पू से पुरुषोतम हो जाएगा। जिसके कानों में सीएम साहब ने कुछ कह दिया उसका बहरापन, जिसे करीब बुला लिया उसके घुटने ओर आंखों की बीमारी अपने आप भाग जाएगी। अन्याय भागकर छिप जाएगा, न्याय रौब दिखाता कभी मंच पर तो कभी माइक में शेर के अंदाज में दहाड़ता नजर आएगा। महिलाओं की अस्मिता भगवान श्रीकृष्ण के हाथों द्रौपदी की आसमान से लहराते आते आचल की तरह बचती चली जाएगी।  सीएम साहब ने जिससे हाथ मिला लिया उसके सिर के सफेद बाल काले जाएंगे। जिसे गले लगाया समझ जाइए उसकी उम्र वापस जवानी की तरफ चल पड़ी है। जिसके यहां नाश्ता किया उसके मोबाइल नंबर अधिकारियों के मोबाइल में सेव हो जाएंगे। वे पांडे से पांडेय जी बन  जाएंगे।  जिसके यहां भोजन कर लिया समझ जाइए उसके शरीर की सारी बीमारियों का खात्मा हो गया है।जिसके यहां सबसे ज्यादा  समय बिताया यह मानकर चलिए आने वाले समय उसी का होने जा रहा है। बस एक बार किसी तरह सीएम साहब को अपने यहां बुलाकर को देखिए। हवा पानी, रहन सहन, बोलचाल, खान पान, तौर तरीका ना बदल जाए तो कहना.. बस एक बार….

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