20 दिन में बदल गया गुरुग्राम का मिजाज

 राव की जीत में भाजपा, बब्बर की विजय से बदल जाएगी यहा की राजनीति


रणघोष खास. गुरुग्राम से ग्राउंड रिपोर्ट

पिछले 20 सालों से दक्षिण हरियाणा की राजनीति पर एक छत्र राज करते आ रहे कद्दावर नेता राव इंद्रजीत सिंह गुरुग्राम सीट पर शानदार मुकाबले में आ चुके हैं। 20 दिन पहले कांग्रेस की टिकट पर मैदान में उतरे बॉलीवुड के शानदार अभिनेता राज बब्बर ने इस सीट से एक तरफा जीत का पर्दा उतार दिया है। इसमें कोई दो राय नही की यहा मिलने वाली हार जीत आने वाले दिनों में  दक्षिण हरियाणा की राजनीति को पूरी तरह से बदलकर रख देगी। राव इंद्रजीत सिंह राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी है जिसके हाथों से जीत को छिन पाना आसान नही है। वे समझ चुके हैं की यह सीट पूरी तरह से धर्म और जातीय समीकरण पर राजनीति भविष्य तय करने जा रही है। इसलिए उन्होंने अपनी पूरी ताकत उस वोट बैंक को सुरक्षित लगाने में लगा दी है जो पिछले दो चुनावों में उनकी जीत का मजबूत आधार बनी थी। यहा राव का एक एक दांव उनकी हार जीत  की वजह बनेगा। उनकी जीत से दक्षिण हरियाणा में भाजपा का चेहरा भी पूरी तरह से बदल जाएगा। इसका इशारा राव पहले ही कर चुके हैं। उन्हें पता है की वे भाजपा उम्मीदवार होते हुए भी अकेले मैदान में लड़ रहे हैं। इसलिए वे जीत दर्ज करते ही सबसे पहले अपनी पार्टी के भीतर विरोधियों का हिसाब करने में कोई देरी नही करेंगे। यह भी तय है।  जिस तरीके से जनता का मिजाज बदल रहा है उसे रोक पाना अब किसी भी नेता के लिए आसान नजर नही आ रहा है। राज बब्बर ने सपने में भी नही सोचा था की उनका चुनाव बिना किसी प्रबंधन या तैयारी के स्वत: जातीय व धर्म राजनीति के रास्ते उन्हें मुकाबले में खड़ा कर देगा। राव इंद्रजीत सिंह की जीत अब बचे दो दिन दिनों में मोदी गांरटी से ज्यादा उनके राजनीति अनुभव व रणनीति से तय होगी। अगर वे मौजूदा हालात में समझदारी से अपना दांव खेल गए तो यह उनके राजनीति जीवन का सबसे शानदार टर्निंग प्वाइंट होगा। इसके लिए उन्हें अपने समर्थकों की चाटुकारिता वाली मानसिकता से बचना होगा। वास्तु स्थिति को समझते हुए अपनी उसी रणनीति पर काम करना होगा जिस पर वे ऐन वक्त निजी संबंधों के हवाले से संपर्क साधने के तौर पर  करते रहे हैं।  उधर राज बब्बर के पास राजनीति दबे पांव बिना शोर मचाए मेवात में धर्म व अन्य क्षेत्रों में विशेषतौर से जाट, एससीएसटी एवं पंजाबी समाज के जातीय समीकरण के रास्ते बदलाव की शक्ल में उनके करीब आती जा रही है। इसी वजह से भाजपा के लिए अभी तक सबसे सुरक्षित माने जानी वाली सीट एकाएक कांटे के मुकाबले में आ चुकी है। तीन दिन चुनाव प्रचार में बचे हुए हैं। जाहिर है जिसके पास कुशल प्रबंधन और रणनीति होगी वह जीत के करीब होगा।