दिल्ली में किसान जीत गया तो क्या गारंटी है उसे जमीन पर वहीं मिलेगा जो वह चाहता है

रणघोष खास. प्रदीप नारायण बात कर रहे हैं किसान की, कोरोना और उस सोच की जिसे…

गुरु पूर्णिमा पर विशेष : जिसने गुरु नानक को पढ़ लिया वह हिंदू- मुसलमान की बात नहीं करेगा..

गुरु नानक ने सिख धर्म में हिन्दू और इस्लाम दोनों की अच्छाइयों को शामिल किया. हालांकि…

किसानों के मन की बात सुननी ही पड़ेगी नहीं तो सरकार की बात शोर लगेगी

कड़ाके की ठंड में हम अपने घरों में रजाइयों में दुबके हैं और देश के अन्नदाता…

हमें यह नहीं भूलना चाहिए चूल्हे पर राजनीति नहीं रोटियां बनती है..

पेट भूखा हो तो  खेती याद आती है। सत्ता की हवस आते ही वह उसका शिकार…

संवेदना किसान के नाम, आक्रोश गोली चलाने वालों के खिलाफ, धिक्कार उपद्रव मचाने वाली राजनीति पर

रणघोष खास. देशभर से  यदि आप खेतों से सैकड़ों मील दूर हैं और आपका हल आपकी…

गौर करिए जो काम अंग्रेज छोड़ गए थे, वह बिहार नतीजों से पूरा होगा, अब जाति-धर्म की राजनीति से देश चलेगा

फूट डालो राज करो की अंग्रेजों की कूटनीति का जितना भरपूर फायदा हमारे देश की राजनीतिक…

रणघोष खास: शहर के सबसे पुराना सबसे बड़ा राव तुलाराम पार्क की हकीकत सबकुछ बता देगी

एक बार घूमकर आइए सौंदर्यीकरण का असली चेहरा सामने आ जाएगा रणघोष खास > रेवाड़ी शहर…

आखिर हम कब तक भगवान श्री राम को अंधेरे में रखकर दीवाली मनाते रहेंगे..

ऐसे कितने रामभक्त है जो यह दावा कर सकते हैं कि वे अपने घर में माता-पिता…

उनका हर दिन पर्व होता है जिन्हें अपने काम पर गर्व होता है..

 रणघोष खास. प्रदीप नारायण  दीपक की लौ आकार में भले ही छोटी हो, लेकिन उसकी चमक…

ईमानदार बनने की बात हुई थी पर हम भ्रष्टाचार में अव्वल हो गये

देश एवं समाज में रिश्वत देने वालों व्यक्तियों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे व्यक्तियों की…

पर्यावरण बचाने के लिए कानून का डंडा नहीं खुद की चेतना काम करेगी..

यहां स्पष्ट हो जाना चाहिए की किसी व्यवस्था को डंडे के जोर से लागू नहीं किया…

क्या न्याय और अन्याय पर सिर्फ कुछ सेलिब्रिटी संपादकों का हक है?, खुद खींचनी होगी लक्ष्मण रेखा

हम एक ऐसे अनूठे वक्त में रह रहे हैं, जहां तथ्य और कथ्य के बीच के…

आलु खरीदने लायक भी नहीं रहे, कमाल है अब गुस्सा भी नहीं आता

मौजूदा हालात में देखे तो बिहार में लालू एवं सब्जी में आलू इतरा रहे हैं। लंबे…

अगर पत्रकार बुरा है , तो महाराष्ट्र में बदले की कार्रवाई उससे भी खतरनाक यह कैसा लोकतंत्र

कोई अर्नब गोस्वामी की पत्रकारिता से सहमत हो सकता है और नहीं। यह हर किसी का…

पत्रकारों को उन लोगों से खतरा है जो उन्हें शांत करना चाहते हैं..

 दुनिया भर में, पत्रकार अक्सर उन सभी मुद्दों पर रिपोर्ट करने के लिए अत्यधिक व्यक्तिगत जोखिम…

दीवाली को लेकर कोरोना खुश है या हम समझ में नहीं आ रहा..

आम आदमी के सपनों का टूट जाना तो आम बात है लेकिन आम आदमी को सपनों…

डंके की चोट पर-याद रखिए धर्म-जाति का जो युद्ध सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है वह कल सड़कों पर भी होगा..

कौमी एकता और भाईचारे की घिसी पिटी बातों को एक तरफ रखते हैं और आज ये…

कायदे से भ्रष्टाचार को अब मौलिक अधिकार बना देना चाहिए, इस लेख को पढ़िए समझ में आ जाएगा

सर्वाधिक भ्रष्ट देशों में सम्मानजनक स्थान तो हमें प्राचीनकाल से ही मिला हुआ है। भ्रष्टाचार अंग्रेजी…

सोशल डिस्टेंस को मजाक में लेने वाला असली अपराधी, बाजार की भीड़ बन रही कोरोना सेना

शारीरिक दूरी बरतने के प्रति उदासीनता असली अपराधी है। कोलकाता से लेकर बेंगलुरु तक के बाजारों…