पश्चिम बंगाल में भाजपा की हार ने किसानों की ताकत का अहसास करा दिया

संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चे के मत्त्वपूर्ण घटक भारतीय किसान यूनियन (चढूनी)जिला रेवाड़ी के जिला प्रधान समय सिंह ने केन्द्र की निरंकुश आत्मबोधि हठधर्मी सरकार को चेताते हुए कहा है कि किसानों के ऊपर जबरन थोपे गए तीनो काले कृषि कानूनो को तुरंत प्रभाव से निरस्त करते हुए एम एस पी का कानून बनाकर ,देश के अन्नदाताओं की मांगों को समय रहते पूरा कर दे। अन्यथा की स्थिति में जिस तरह से पश्चिमि बंगाल में चारोखाने मुंह की खानी पड़ी है उसी तरह से देश का किसान,मजदूर,कर्मचारी और आम जनता इस सरकार को हर मोर्चे पर धूल चटाने को कमर कस चुकी है। पश्चिम बंगाल में साम,दाम,दंड,भेद से अपनी सारी ताकत झोंकने के बाद भी 2019 की अपनी बढ़त को नही बचा पाई। ये परिणाम बताते है कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश मे लोकतांत्रिक तरीके से ही देश की जनता पर राज किया जा सकता है,तानाशाही तरीके से भारत के लोकतंत्र को मुठ्ठी में बंद करने के कुत्सित प्रयासों से कमजोर नही किया जा सकता ।

जिला उप प्रधान कुलदीप सिंह भुड़पुर ने कहा कि कुछ चहेतों कॉरपोरेट घरानों की पैरवी करने वाली पूंजीवादी विचारधारा वाली केंद्र सरकार को भारत की 130 करोड़ की जनसंख्या के लोगो के विचारों ,विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के जन मानस को ध्यान में रखकर ही नीतियों का निर्माण और निर्धारण कर लोकहित में काम करना चाहिए। वरना ना केवल पश्चिमी बंगाल,केरल,तमिलनाडु, अपितु उपचुनाव राज्यों कर्नाटक,राजस्थान,मध्यप्रदेश आदि राज्यों में जो परिणाम आये है वो केंद्र की निरंकुश होती सरकार की पोल खोल रहे हैं।भारतीय किसान यूनियन चढूनी के जिला युवा प्रधान कमल यादव पालहवास ने कहा कि आज तीनो काले कृषि कानूनो के विरुद्ध चलाये जा रहे किसान आंदोलन में देश के अन्नदाताओं की युवा पीढ़ी भी अपना सर्वस्व लगाकर अपना युवा योगदान करते हुए तानाशाही केंद्र सरकार से इन तीनो काले कृषि कानूनो को निरस्त करने की मांग कर रही है।

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