महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा और संवेदनशील फैसला सामने आया है, जहां कांग्रेस ने बारामती विधानसभा उपचुनाव से खुद को अलग कर लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र प्रभारी Ramesh Chennithala ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि पार्टी इस उपचुनाव में हिस्सा नहीं लेगी और अपने उम्मीदवार को नामांकन वापस लेने का निर्देश दे दिया गया है।
बारामती सीट पर उपचुनाव महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar के निधन के कारण हो रहा है। उनके निधन के बाद उनकी पत्नी और वर्तमान उपमुख्यमंत्री Sunetra Pawar मैदान में हैं। कांग्रेस ने इस निर्णय को दिवंगत नेता के प्रति सम्मान से जोड़ते हुए चुनाव से दूरी बनाने का फैसला लिया है।
कांग्रेस की ओर से अधिवक्ता आकाश मोरे ने 23 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था, लेकिन अब पार्टी ने उन्हें नाम वापस लेने के निर्देश दिए हैं। नामांकन वापसी की अंतिम तिथि नौ अप्रैल निर्धारित की गई थी।
इस पूरे घटनाक्रम में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेताओं की भूमिका भी अहम रही। पार्टी प्रमुख Sharad Pawar ने पहले ही कांग्रेस से अपील की थी कि इस उपचुनाव को निर्विरोध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा था कि यह चुनाव एक दुखद विमान दुर्घटना की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जिसमें राज्य ने एक अनुभवी नेता को खो दिया है, ऐसे में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर निर्णय लेना चाहिए।
इसी तरह राकांपा (शप) की कार्यकारी अध्यक्ष Supriya Sule ने भी कांग्रेस से अपील करते हुए कहा था कि बारामती में निर्विरोध चुनाव ही Ajit Pawar के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने कांग्रेस से विनम्र अनुरोध किया था कि वह अपनी उम्मीदवारी वापस ले।
राकांपा (शप) विधायक Rohit Pawar ने भी कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात कर इसी मांग को दोहराया था। उन्होंने विश्वास जताया था कि कांग्रेस इस पर सकारात्मक निर्णय लेगी। सूत्रों के अनुसार, खुद Sunetra Pawar ने भी कांग्रेस नेताओं से संपर्क कर यह आग्रह किया था।
हालांकि इस पूरे मामले में शुरुआत में कुछ विवाद भी देखने को मिला। सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार ने कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारने पर नाराजगी जताई थी, लेकिन बाद में Rohit Pawar ने इस पर खेद प्रकट करते हुए स्थिति को शांत करने की कोशिश की।
राजनीतिक दबाव के बीच भाजपा की ओर से भी बयान सामने आया। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कांग्रेस को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि पार्टी सुनेत्रा पवार को निर्विरोध नहीं जीतने देती है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे।
बारामती उपचुनाव के लिए कुल 53 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था, लेकिन कांग्रेस के हटने के बाद अब सुनेत्रा पवार के निर्विरोध चुने जाने की संभावना काफी मजबूत हो गई है।
यह घटनाक्रम न केवल महाराष्ट्र की राजनीति में एक भावनात्मक मोड़ लेकर आया है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कुछ मौकों पर राजनीतिक दल संवेदनशील परिस्थितियों में प्रतिस्पर्धा से पीछे हटकर सम्मान और सहमति का रास्ता अपनाते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह उपचुनाव पूरी तरह निर्विरोध होता है और इसका प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।