पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता हासिल की है। वैश्विक स्तर पर सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक, Strait of Hormuz से भारत के कुल 8 जहाज सुरक्षित रूप से गुजर चुके हैं। यह उपलब्धि न केवल भारत की समुद्री क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि संकट के समय देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने में सक्षम है।
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस संघर्ष के बाद जहां अधिकांश देशों के जहाज इस क्षेत्र से गुजरने से बच रहे हैं, वहीं भारत ने साहसिक और सुनियोजित कदम उठाते हुए अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने में सफलता प्राप्त की है।
किन-किन भारतीय जहाजों ने किया ट्रांजिट
भारत के जिन 8 प्रमुख जहाजों ने इस खतरनाक जलमार्ग को पार किया, उनमें शामिल हैं:
- एलपीजी कैरियर: शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस, जग वसंत
- अन्य जहाज: ग्रीन सान्वी, बीडब्ल्यू टायर, बीडब्ल्यू एल्म
- क्रूड ऑयल टैंकर: जग लाडकी
ये सभी जहाज भारत के प्रमुख बंदरगाहों—मुंद्रा, कांडला, मुंबई और न्यू मंगलौर—की ओर बढ़ रहे थे और इनमें भारी मात्रा में एलपीजी और कच्चा तेल लदा हुआ था।
हजारों टन ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित
इन जहाजों के माध्यम से भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती दी है:
- शिवालिक और नंदा देवी: लगभग 92,000 टन एलपीजी
- जग वसंत और पाइन गैस: करीब 92,600 टन एलपीजी
- बीडब्ल्यू टायर और बीडब्ल्यू एल्म: लगभग 94,000 टन एलपीजी
- जग लाडकी: 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल
यह आपूर्ति भारत की घरेलू जरूरतों, विशेषकर रसोई गैस और ईंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत की दोहरी रणनीति: कूटनीति + नौसेना शक्ति
इस सफलता के पीछे भारत की एक सुनियोजित “ड्यूल स्ट्रेटेजी” रही:
1. ईरान के साथ कूटनीतिक संवाद
भारत ने सीधे Iran से संपर्क स्थापित किया, जिससे कुछ जहाजों को ईरानी तट के पास से सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिली।
2. नौसेना का ऑपरेशन
भारतीय नौसेना ने Operation Urja Suraksha के तहत गल्फ ऑफ ओमान में अपने युद्धपोत तैनात किए। इनका कार्य था:
- रीयल-टाइम मॉनिटरिंग
- सुरक्षित मार्गदर्शन
- जहाजों को एस्कॉर्ट प्रदान करना
हालांकि भारतीय नौसेना ने सीधे होर्मुज स्ट्रेट में प्रवेश नहीं किया, लेकिन बाहर से पूरी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
वैश्विक परिदृश्य: भारत आगे, बाकी देश पीछे
इस संघर्ष के दौरान जहां वैश्विक शिपिंग ट्रैफिक में भारी गिरावट आई है, वहीं भारत ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
अन्य देश जैसे:
- चीन
- ग्रीस
- लाइबेरिया
- बांग्लादेश
- फिलीपींस
- मलेशिया
- पाकिस्तान
- रूस
भी अपने जहाजों को निकालने में लगे हैं, लेकिन संख्या के मामले में भारत कई देशों से आगे निकल चुका है।
अभी भी बनी हुई है चुनौती
हालांकि 8 जहाजों की सफलता एक राहत की खबर है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है:
- कई भारतीय जहाज अभी भी फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं
- समुद्री मार्गों पर खतरा बरकरार है
- वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है
- तेल कीमतों में उछाल की आशंका बनी हुई है
भारत की बढ़ती समुद्री विश्वसनीयता
इस पूरे ऑपरेशन ने एक बात साफ कर दी है—भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने में सक्षम है, बल्कि संकट के समय वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद समुद्री शक्ति के रूप में भी उभर रहा है।
जहां एक ओर युद्ध ने दुनिया की सप्लाई चेन को प्रभावित किया है, वहीं भारत ने संयम, रणनीति और शक्ति का संतुलन बनाकर एक मिसाल पेश की है।