US संकेत: भारत को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की मिल सकती है अनुमति, रूसी तेल आयात में कटौती के बीच बड़ा बदलाव
अमेरिका ने भारत को वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात की अनुमति देने के संकेत दिए हैं। रूसी तेल आयात में भारी कटौती के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव।
अमेरिका का संकेत: भारत को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की मिल सकती है हरी झंडी
भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह भारत को जल्द ही वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात करने की अनुमति दे सकता है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत ने रूस से कच्चे तेल के आयात में तेज कटौती करने का निर्णय लिया है और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की तलाश में है।
यह संभावित मंजूरी भारत को उस स्थिति में राहत दे सकती है, जब अमेरिकी प्रतिबंधों और भारी टैरिफ के चलते रूसी तेल अब पहले जितना सस्ता नहीं रह गया है।
रूस से दूरी, नए विकल्पों की तलाश
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़े टैरिफ लगाए हैं, जिनका सीधा असर भारत पर भी पड़ा है।
भारत पर रूसी तेल आयात को लेकर टैरिफ 50% तक पहुंच गया है, जिससे रूसी क्रूड की लागत काफी बढ़ गई है।
इसी कारण भारत अब आने वाले महीनों में रूसी तेल आयात को लाखों बैरल प्रतिदिन कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट में बड़ा दावा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत को यह संकेत दिया है कि वह जल्द ही वेनेजुएला से तेल आयात शुरू कर सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को रूसी तेल का एक मजबूत विकल्प उपलब्ध कराना है, ताकि रूस की तेल से होने वाली कमाई को सीमित किया जा सके।
मार्च 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल पर 25% टैरिफ लगाया था। हालांकि, 3 जनवरी को अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़े जाने के बाद वाशिंगटन की नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका अब चाहता है कि रूस की तेल आय से यूक्रेन युद्ध को मिलने वाली फंडिंग पर रोक लगे।
रूसी तेल आयात में कितनी हो रही है कटौती
रिपोर्ट के अनुसार भारत के रूसी कच्चे तेल आयात में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
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जनवरी: 12 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd)
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फरवरी (अनुमानित): 10 लाख bpd
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मार्च (अनुमानित): 8 लाख bpd
सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में यह आयात 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक सिमट सकता है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम होगा।
तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी का बयान
भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि भारत अपने कच्चे तेल के स्रोतों में तेजी से विविधता ला रहा है।
उन्होंने कहा था कि जैसे-जैसे रूस से आयात घट रहा है, भारत OPEC देशों, मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से तेल खरीद बढ़ा रहा है।
दिसंबर के आंकड़ों के अनुसार, रूस से तेल आयात दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जबकि अन्य क्षेत्रों से खरीदारी में स्पष्ट बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
क्या भारत वेनेजुएला का तेल प्रोसेस कर सकता है
हालांकि, भारतीय रिफाइनरों का कहना है कि वेनेजुएला के तेल की उपलब्धता सीमित है और इसका बड़ा हिस्सा अभी अमेरिका को जा रहा है।
इसके बावजूद भारत की कुछ प्रमुख रिफाइनरियां, खासकर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, वेनेजुएला के भारी और उच्च सल्फर वाले क्रूड को प्रोसेस करने में सक्षम हैं।
इससे भारत को तकनीकी रूप से वेनेजुएला के तेल को अपनाने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी।
क्या भारत-अमेरिका ट्रेड डील की ओर बढ़ रहे हैं
अमेरिका की योजना 30 से 50 मिलियन बैरल वेनेजुएला के स्टोरेज तेल को बेचने की है। यदि भारत रूसी तेल पर निर्भरता कम कर वेनेजुएला, अमेरिका या मध्य पूर्व जैसे विकल्पों की ओर शिफ्ट करता है, तो अमेरिका भारत को टैरिफ में राहत दे सकता है।
यही वजह है कि इस कदम को भारत-अमेरिका ट्रेड डील की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, रूसी आयात में कटौती से यह ट्रेड डील अंतिम चरण के करीब पहुंच सकती है, हालांकि टैरिफ और अन्य मुद्दों पर बातचीत अभी जारी है।
निष्कर्ष
भारत द्वारा रूसी तेल आयात में कटौती और वेनेजुएला जैसे नए स्रोतों की ओर रुख करना न केवल ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम है, बल्कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में भी नया अध्याय जोड़ सकता है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि क्या भारत वास्तव में वेनेजुएला से तेल आयात शुरू करता है और क्या इसके बदले अमेरिका टैरिफ में राहत देता है।