ईरान और अमेरिका के बीच 40 दिनों तक चले तनाव के बाद घोषित हुए अस्थायी युद्धविराम ने केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी हलचल मचा दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने डेडलाइन खत्म होने से कुछ घंटे पहले ही अपना रुख बदलते हुए दो सप्ताह के सीजफायर का ऐलान कर दिया।
लेकिन इस युद्धविराम के साथ ही एक नई “क्रेडिट की जंग” शुरू हो गई है, जिसमें Pakistan और China दोनों ही अपनी भूमिका का दावा कर रहे हैं।
चीन और पाकिस्तान क्यों ले रहे हैं क्रेडिट?
जहां पाकिस्तान पहले ही इस सीजफायर में मध्यस्थता का दावा कर चुका है, वहीं अब चीन ने भी सामने आकर कहा है कि उसने मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए सक्रिय प्रयास किए।
चीन के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह अब Afghanistan और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव को खत्म कराने के लिए पहल करेगा।
अफगानिस्तान में चीन की दिलचस्पी क्यों?
विशेषज्ञों के अनुसार अफगानिस्तान एक ऐसा रणनीतिक क्षेत्र है, जहां हर बड़ी शक्ति अपनी पकड़ बनाना चाहती है।
चीन के लिए यह कई वजहों से महत्वपूर्ण है—
- यह क्षेत्र मिडिल ईस्ट का प्रवेश द्वार माना जाता है
- यहां प्रभाव बढ़ाकर चीन दक्षिण एशिया में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है
- पाकिस्तान के साथ उसके रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं
चीन की यह रणनीति सीधे तौर पर भारत को घेरने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है।
भारत के लिए क्यों अहम है अफगानिस्तान?
भारत का Afghanistan के साथ संबंध काफी पुराने और मजबूत रहे हैं।
भारत ने वहां—
- इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण
- विकास परियोजनाएं
- मानवीय सहायता
जैसे कई क्षेत्रों में निवेश किया है।
पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के बीच अफगानिस्तान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार रहा है।
चीन की रणनीति: भारत को घेरने की तैयारी?
चीन लंबे समय से दक्षिण एशिया के देशों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
SAARC देशों में भारत का प्रभाव पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में चीन—
- श्रीलंका
- मालदीव
- बांग्लादेश
- नेपाल
जैसे देशों में अपनी मौजूदगी बढ़ा चुका है।
अब अफगानिस्तान उसकी रणनीति का अगला बड़ा केंद्र बनता नजर आ रहा है।
होर्मुज और वैश्विक व्यापार का समीकरण
इस पूरे घटनाक्रम में Strait of Hormuz की भूमिका भी बेहद अहम है।
अगर यह मार्ग पूरी तरह खुलता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है, लेकिन इसमें किसी भी तरह की बाधा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
भारत के लिए आगे की रणनीति क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को—
- अफगानिस्तान के साथ अपने संबंध और मजबूत करने होंगे
- क्षेत्रीय कूटनीति को सक्रिय रखना होगा
- चीन की बढ़ती मौजूदगी पर नजर रखनी होगी
ताकि दक्षिण एशिया में संतुलन बनाए रखा जा सके।