ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर टोल प्लान: क्या महंगा होगा तेल और टूटेंगे अंतरराष्ट्रीय नियम?

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव के बाद पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते के लिए सीजफायर लागू हुआ है, लेकिन इसके साथ ही एक नया वैश्विक आर्थिक संकट खड़ा होता दिख रहा है। ईरान अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल टैक्स लगाने की योजना बना रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल बाजार दोनों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। अब तक इस मार्ग से जहाजों का आवागमन पूरी तरह मुफ्त था, लेकिन ईरान के नए प्रस्ताव के बाद यह स्थिति बदल सकती है।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल उत्पाद निर्यातकों के संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी ने कहा है कि ईरान हर उस जहाज से टोल वसूलना चाहता है, जो इस मार्ग से गुजरता है। योजना के तहत शिपिंग कंपनियों से प्रति बैरल तेल पर एक डॉलर शुल्क लेने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही हर जहाज की जांच भी की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सीजफायर के दौरान हथियारों की तस्करी न हो।

ईरान का यह कदम उसकी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून पर कन्वेंशन (UNCLOS), जो 1994 में लागू हुआ था, के अनुसार किसी भी देश को अपने क्षेत्रीय समुद्र से गुजरने वाले जहाजों पर केवल गुजरने के आधार पर टैक्स लगाने की अनुमति नहीं है।

कन्वेंशन के आर्टिकल 17 के तहत जहाजों को “इनोसेंट पैसेज” का अधिकार दिया गया है, जिसका मतलब है कि वे बिना किसी बाधा के गुजर सकते हैं, जब तक कि वे तटीय देश की सुरक्षा के लिए खतरा न हों। वहीं आर्टिकल 26 स्पष्ट करता है कि केवल विशेष सेवाओं के बदले ही शुल्क लिया जा सकता है, न कि सामान्य आवागमन पर।

इसलिए यदि ईरान इस टोल योजना को लागू करता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन होगा और इससे वैश्विक स्तर पर विवाद बढ़ सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर अतिरिक्त लागत बढ़ती है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। इसका असर भारत जैसे देशों पर भी होगा, जो अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।

इसके अलावा, पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित 10-सूत्रीय योजना में भी होर्मुज स्ट्रेट एक अहम बिंदु के रूप में शामिल था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस योजना में ईरान और ओमान को इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि इस पर सभी पक्षों में पूर्ण सहमति नहीं बन पाई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना लागू होती है, तो यह न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों को चुनौती देगी, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है।

ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका, संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शक्तियां इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती हैं और क्या ईरान वास्तव में इस टोल नीति को लागू करता है या नहीं।