देश में मरीजों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सरकार एक ऐसा नियम लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत अब मरीजों को पूरी दवा की स्ट्रिप खरीदने की मजबूरी नहीं होगी। डॉक्टर के पर्चे में जितनी गोलियां लिखी होंगी, मेडिकल स्टोर को उतनी ही दवा देनी होगी।
इस प्रस्ताव पर Central Drugs Standard Control Organization के तहत काम करने वाले Drugs Controller General of India की बैठक में चर्चा हो चुकी है और इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
मरीजों को मिलेगा सीधा फायदा
अभी अधिकतर दवाएं 10 या 15 गोलियों की स्ट्रिप में आती हैं, जबकि कई बार मरीज को केवल 4-5 गोलियों की ही जरूरत होती है। ऐसे में दुकानदार स्ट्रिप काटकर देने से मना कर देते हैं, जिससे मरीज को पूरा पत्ता खरीदना पड़ता है।
इससे न केवल मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है, बल्कि दवाओं की बर्बादी भी होती है। खासकर महंगी दवाओं में, जहां एक स्ट्रिप की कीमत 300 रुपये या उससे अधिक होती है, यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नया नियम लागू होने पर मरीजों का खर्च कम होगा और दवाओं की बर्बादी पर भी लगाम लगेगी।
50 अरब डॉलर के फार्मा बाजार पर असर
यह प्रस्ताव भारत के विशाल दवा उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश का फार्मास्यूटिकल सेक्टर लगभग 50 अरब डॉलर का है, जबकि 2024 में रिटेल फार्मेसी बाजार 20-27 अरब डॉलर के बीच आंका गया है।
ऐसे में इस नियम का असर न केवल मरीजों पर बल्कि दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोर संचालकों पर भी पड़ेगा।
लागू करने में आ सकती हैं तकनीकी दिक्कतें
हालांकि इस प्रस्ताव को लागू करना आसान नहीं है। दवा की स्ट्रिप पर उसका नाम, बैच नंबर, निर्माण तिथि और समाप्ति तिथि जैसी जरूरी जानकारी दर्ज होती है।
जब स्ट्रिप को काटा जाता है, तो कई बार यह जानकारी अलग हो जाती है, जिससे मरीज को दवा की सही जानकारी नहीं मिल पाती। यह सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार इस नियम के साथ पैकेजिंग, लेबलिंग और ट्रैकिंग से जुड़े नए दिशा-निर्देश भी तैयार कर रही है।
दवा कंपनियों को दिया गया सुझाव
All India Organisation of Chemists and Druggists के प्रमुख राजीव सिंघल ने इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मेडिकल स्टोर संचालकों को भी इससे कुछ समस्याएं हो सकती हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि दवा कंपनियां छोटे पैक में दवाएं बनाएं या बची हुई दवाओं को वापस लेने की व्यवस्था करें। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रिप का आकार अधिकतम 10 गोलियों तक सीमित होना चाहिए, ताकि दवा की बर्बादी कम हो।