सिक्किम में हिमस्खलन: पिथौरागढ़ के लांसनायक विकास कुमार शहीद, बेटे के पहले जन्मदिन का सपना अधूरा

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के निवासी 24 वर्षीय लांसनायक विकास कुमार सिक्किम में ड्यूटी के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आकर वीरगति को प्राप्त हो गए। इस दुखद घटना की सूचना भारतीय सेना द्वारा उनके परिजनों को दी गई, जिसके बाद पूरे गांव और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

विकास कुमार का पार्थिव शरीर गुरुवार को जिला मुख्यालय पहुंचने की संभावना है, जहां से सैन्य सम्मान के साथ उन्हें उनके पैतृक गांव ले जाया जाएगा। उनके बलिदान ने पूरे देश को गर्व और शोक से भर दिया है।

सीमा पर गश्त के दौरान हुआ हादसा

पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित गणकोट गांव निवासी विकास कुमार, गणेश राम के पुत्र थे और 19 कुमाऊं रेजीमेंट में लांसनायक के पद पर तैनात थे। उनके चचेरे भाई नीरज कुमार के अनुसार, 29 मार्च को विकास अपने दो साथियों के साथ सिक्किम में सीमा क्षेत्र में गश्त पर निकले थे।

इसी दौरान अचानक आए हिमस्खलन ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वह वीरगति को प्राप्त हो गए। जानकारी के अनुसार, उनका पार्थिव शरीर दो दिनों तक बर्फ में दबा रहा, जिसके बाद सेना ने उसे बाहर निकाला।

बेटे के पहले जन्मदिन का सपना रह गया अधूरा

इस घटना का सबसे भावुक पहलू यह है कि विकास कुमार अपने छोटे बेटे पृथ्विक के पहले जन्मदिन पर घर आने की योजना बना रहे थे। उनका बेटा अभी एक साल का भी नहीं हुआ है और आगामी 4 जून को उसका पहला जन्मदिन है।

घर के आंगन में खेलता मासूम अपने पिता का इंतजार कर रहा था, लेकिन अब वह अपने पिता को तिरंगे में लिपटे हुए ही देख पाएगा। यह दृश्य पूरे परिवार और गांव के लोगों को झकझोर देने वाला है।

2023 में हुई थी शादी, खुशियां मातम में बदलीं

विकास कुमार वर्ष 2017-18 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और वर्ष 2023 में उनका विवाह प्रीति के साथ हुआ था। शादी के बाद परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी।

उन्होंने अपने परिवार को बताया था कि वह अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक घर लौट आएंगे और बेटे का पहला जन्मदिन धूमधाम से मनाएंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

परिवार को देर से मिली शहादत की सूचना

सेना की ओर से विकास कुमार के शहीद होने की सूचना मंगलवार शाम करीब तीन बजे दी गई थी, लेकिन इस दुखद खबर को उनके माता-पिता और पत्नी से कुछ समय तक छिपाकर रखा गया। बुधवार को जब उन्हें यह जानकारी दी गई, तो परिवार में कोहराम मच गया।

विकास की मां मंजू देवी स्थानीय स्कूल में भोजन माता के रूप में कार्यरत हैं। उनके बड़े भाई नीरज, जो दिल्ली में होटल सेक्टर में कार्यरत हैं, सूचना मिलते ही तुरंत घर लौट आए।

पूरे क्षेत्र में शोक, पूर्व सैनिकों ने जताया सम्मान

विकास कुमार की शहादत की खबर मिलते ही गणकोट गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में गहरा शोक छा गया। हर कोई इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि दे रहा है।

पूर्व सैनिक संगठन ने भी उनके सर्वोच्च बलिदान पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि विकास ने देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है और पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

लांसनायक विकास कुमार की शहादत एक ऐसी कहानी है, जो देशभक्ति, कर्तव्य और बलिदान का सबसे बड़ा उदाहरण है। एक पिता, एक बेटे और एक पति के रूप में उनके अधूरे सपने भले ही रह गए हों, लेकिन उनका बलिदान हमेशा देशवासियों के दिलों में जिंदा रहेगा।