UN चीफ एंतोनियो गुतारेस ने भारत को बताया ‘बड़ी शक्ति’, कहा – वैश्विक एजेंडे में भारत का योगदान बेहद जरूरी

संयुक्त राष्ट्र (UN) महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भारत को एक “बड़ी और अहम वैश्विक शक्ति” बताते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में भारत का स्थायी और सक्रिय योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं अब निर्णायक भूमिका निभा रही हैं और यह एक सकारात्मक “मेगा ट्रेंड” के रूप में उभर रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ में भाग लेने के लिए रवाना होने से पहले दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में गुतारेस ने भारत की आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक भूमिका की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर विकसित देशों के समूह G7 की आर्थिक हिस्सेदारी लगातार घट रही है, जबकि भारत सहित उभरती अर्थव्यवस्थाएं विश्व अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं।

भारत बना वैश्विक एजेंडे का अहम स्तंभ

गुतारेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियों के सभी प्रमुख क्षेत्रों—चाहे वह शांति और सुरक्षा का मुद्दा हो, सतत विकास हो या मानवाधिकार—भारत की भूमिका बेहद अहम हो चुकी है। उन्होंने भारत की G20 अध्यक्षता को याद करते हुए कहा कि उस दौरान कई महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले लिए गए, जिनका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकासशील देशों पर सकारात्मक रूप से पड़ा।

उन्होंने यह भी कहा कि एक लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत की स्थिति खास है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में लोकतंत्र चुनौतियों का सामना कर रहा है।

शांति स्थापना में भारत का योगदान उल्लेखनीय

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा अभियानों में भारत की भूमिका के लिए विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 5000 भारतीय महिला और पुरुष विश्व के विभिन्न हिस्सों में शांति स्थापना अभियानों में तैनात हैं।

उन्होंने भारत द्वारा भेजे गए पहले पूर्ण महिला पुलिस दल को “उल्लेखनीय” करार दिया और कहा कि इसने वैश्विक स्तर पर महिला सशक्तिकरण और शांति स्थापना के क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है।

बढ़ते संकटों के बीच सकारात्मक मेगा ट्रेंड

गुतारेस ने स्वीकार किया कि दुनिया इस समय कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर संघर्ष बढ़ रहे हैं, असमानताएं गहराती जा रही हैं और गरीबी तथा भूख की समस्या अब भी बनी हुई है। कई क्षेत्रों में आतंकवाद भी एक गंभीर खतरे के रूप में उभर रहा है।

हालांकि, इन चुनौतियों के बीच उन्होंने कुछ सकारात्मक रुझानों की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण मेगा ट्रेंड यह है कि भारत जैसे देश वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में लगातार मजबूत हो रहे हैं।

G7 की घटती हिस्सेदारी, उभरती अर्थव्यवस्थाओं का उदय

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि विकसित देशों का समूह G7 और इसी तरह के अन्य देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी प्रतिदिन घट रही है। इसके विपरीत भारत सहित उभरती अर्थव्यवस्थाएं विश्व अर्थव्यवस्था में अपनी भागीदारी लगातार बढ़ा रही हैं।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की विश्व व्यवस्था को भी आकार देगा। यह प्रक्रिया समय के साथ एक ऐसी वैश्विक संरचना को जन्म दे सकती है जहां न्याय, समानता और शांति के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध होंगी।

AI शिखर सम्मेलन में भारत की मेजबानी

कृत्रिम मेधा (AI) पर ‘ग्लोबल साउथ’ में आयोजित होने वाला पहला शिखर सम्मेलन भारत में हो रहा है। गुतारेस ने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि भारत तकनीकी नवाचार और डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल ढांचा और तकनीकी नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, और भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों की भूमिका बढ़ रही है, और भारत को इन उभरती ताकतों का प्रमुख स्तंभ माना जा रहा है।

गुतारेस ने कहा कि यह बदलाव केवल वर्तमान का संकेत नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में विश्व व्यवस्था के स्वरूप को तय करेगा। भारत की बढ़ती भागीदारी से एक अधिक संतुलित और समावेशी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की संभावना मजबूत होती है।


यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी प्रभावशाली भूमिका की पुष्टि करता है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख की यह टिप्पणी स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाले समय में भारत विश्व राजनीति, अर्थव्यवस्था और शांति स्थापना के क्षेत्रों में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।