ईरान के दुर्गम पहाड़ी इलाके में अमेरिकी सेना ने एक ऐसा साहसिक बचाव अभियान अंजाम दिया, जिसे आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे खतरनाक और हाई-टेक ऑपरेशनों में गिना जा रहा है। 5 अप्रैल को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने एक घायल वायुसैनिक को सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया, जिसका लड़ाकू विमान दो दिन पहले मार गिराया गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस मिशन को अमेरिकी इतिहास के सबसे साहसिक खोज और बचाव अभियानों में से एक बताया और इसकी सफलता पर खुशी जताई।
घटना की शुरुआत 3 अप्रैल को हुई, जब ईरान ने अमेरिकी वायुसेना के F-15E Strike Eagle को मार गिराया। इस हमले में पायलट घायल हो गया, लेकिन उसने खुद को बचाने के लिए Zagros Mountains की लगभग 7,000 फुट ऊंची पहाड़ी पर शरण ली। वह एक संकरी दरार में छिपा रहा और करीब 36 घंटे तक वहीं जिंदा रहने की कोशिश करता रहा, जबकि ईरानी सेना, हेलीकॉप्टर और ड्रोन उसकी तलाश में जुटे थे।
इस मिशन की सबसे बड़ी खासियत थी ‘Ghost Murmur’ नाम की गुप्त तकनीक, जिसे Lockheed Martin के स्कंक वर्क्स डिवीजन ने विकसित किया है। यह तकनीक क्वांटम मैग्नेटोमेट्री के जरिए इंसान के दिल की धड़कन से निकलने वाले बेहद सूक्ष्म इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल्स को दूर से पकड़ सकती है।
डायमंड-बेस्ड क्वांटम सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह सिस्टम आसपास के शोर को हटाकर सिर्फ मानव की धड़कन को पहचानता है। एक सूत्र के अनुसार, यह ऐसा है जैसे शोरगुल भरे स्टेडियम में किसी एक व्यक्ति की आवाज को पहचान लेना। इस तकनीक का पहली बार किसी वास्तविक ऑपरेशन में इस्तेमाल किया गया।
हालांकि पायलट के पास ‘कॉम्बैट सर्वाइवर इवेडर लोकेटर’ नाम का ट्रैकिंग डिवाइस भी था, लेकिन उसकी सटीक लोकेशन ‘Ghost Murmur’ की मदद से ही पता चल सकी।
मिशन को सफल बनाने के लिए CIA ने एक रणनीतिक चाल भी चली। उन्होंने ईरानी सेना को गुमराह करने के लिए यह झूठी खबर फैलाई कि दोनों क्रू मेंबर्स मिल चुके हैं और उन्हें बाहर निकाला जा रहा है। इससे ईरान की खोज अभियान की गति धीमी हो गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन में करीब 100 स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स के जवान शामिल थे, जिसमें ‘SEAL Team 6’, डेल्टा फोर्स और आर्मी रेंजर्स जैसे यूनिट्स शामिल थे। रात के अंधेरे में कमांडो हेलीकॉप्टर के जरिए पहाड़ी इलाके में उतरे, जबकि अमेरिकी और इजरायली लड़ाकू विमानों ने हवाई कवर दिया।
कमांडो ने घायल पायलट को सुरक्षित बाहर निकाला और उसे हेलीकॉप्टर से एक गुप्त हवाई पट्टी तक पहुंचाया। योजना के अनुसार, वहां से C-130 विमान के जरिए टीम को कुवैत ले जाया जाना था। लेकिन मिशन के दौरान एक बड़ी बाधा सामने आई, जब विमान के पहिये रेत में फंस गए।
इस अप्रत्याशित समस्या के बाद एक दूसरा विमान बुलाया गया, जिससे कई घंटों की देरी हुई। अंततः रेस्क्यू टीम और पायलट सुरक्षित रूप से ईरान से बाहर निकलने में सफल रहे। फंसे हुए विमानों को बाद में बम से नष्ट कर दिया गया।
मिशन के सफल होते ही व्हाइट हाउस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद Donald Trump ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमने उसे बचा लिया!”
यह ऑपरेशन दिखाता है कि कैसे अत्याधुनिक तकनीक और रणनीतिक योजना के दम पर असंभव दिखने वाले मिशन भी सफल बनाए जा सकते हैं।