किसान आंदोलनः बैकडोर से बातचीत जारी, कृषि मंत्री ने कहा- दिसंबर तक निकल जाएगा रास्ता

सरकार को नए साल से पहले तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समाधान होने की उम्मीद है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा संकट को दूर करने के लिए विरोध करने वाले संगठनों से औपचारिक बातचीत चल रही है। साल खत्म होने से पहले नतीजा निकलने की उम्मीद है। हालांकि, संगठन कह रहे हैं कि उन्हें कानूनों को वापस लेने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर किसान अपनी आपत्तियों के बारे में हमें समझा पाए तो कानूनों में बदलाव पर विचार करेंगे। कृषि मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार किसानों की सभी वाजिब चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार इसके लिए औपचारिक बातचीत फिर शुरू करने को भी तैयार है, लेकिन इस बात पर जोर दिया गया है कि उन लोगों के किसी भी मुद्दे पर बात नहीं होगी जो किसानों के कंधों पर बंदूक रखकर चला रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर मुद्दे का राजनीतिकरण करने और किसानों को गुमराह करने का का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय मंत्री सोम प्रकाश करीब 40 किसान संगठनों से बात कर रहे हैं। क्या सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित की जाने वाली समिति बातचीत करेगी और समाधान निकालेगी या फिर सरकार अपनी कोशिशें जारी रखेगी के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार ने किसान नेताओं से बातचीत के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं और आगे के कदम के लिए हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करेंगे। तोमर ने कहा कि सरकार कानून में बदलाव पर विचार कर सकती है अगर वे एक-एक क्लॉज पर किसान नेता अपनी आपत्तियों को समझाने में कामयाब रहें। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याएं हल करने के लिए तैयार है, लेकिन समस्या क्या है, यही नहीं बताया जाए तो सरकार हल कैसे निकालेगी। एमएसपी पर उन्होंने कहा कि हम लिखित में गारंटी देने को तैयार हैं। यह प्रशासनिक फैसला है। हर चीज के लिए कानून नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा कृषि कानून किसानों के फायदे के लिए हैं। अकाली दल के भाजपा को असली टुकड़े-टुकड़े गैंग बताने के आरोप पर तोमर ने कहा कि राजनीतिक दलों को किसानों के नाम पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। ये वही पार्टियां हैं, जो चुनाव के समय इस बदलाव का समर्थन कर रही थीं। 2019 के आम चुनाव और पंजाब के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हो, अकाली दल हो या आम आदमी पार्टी, सभी इन बदलावों का समर्थन कर रही थीं। अब सबने अपना रुख बदल लिया है। बता दें कि गुरुवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को किसानों के नाम एक खुला पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने किसानों की चिंताएं दूर करने के साथ ही विपक्ष का मोहरा न बनने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने 1962 के युद्ध में देश की विचारधारा का विरोध किया था, वही लोग किसानों को पर्दे के पीछे से गुमराह कर रहे हैं और  आज वे फिर से 1962 की भाषा बोल रहे हैं।

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