घर में छुपा छुपा कर पैसे रखने वाली महिलाओं को नहीं है बीमा में रुचि  अभी भी हैं पुरुषों पर निर्भर

भारतीय महिलाओं में इंश्योरेंस से जुड़ी जानकारी और जागरूकता की कमी है जिसके कारण लगभग 85 % भारतीय परिवारों में पुरुष ही निर्णय लेते हैं कि परिवार के लिए कब और किस प्रकार का इंश्योरेंस लेना है.


रणघोष खास. अलमिना खातुन दि प्रिंट से


“इंश्योरेंस के ये टर्म, कंडीशंस, इंट्रेस्ट रेट मुझे तो समझ नहीं आते है. मुझे मेरे पापा ने कहा ये वाला इंश्योरेंस ले लो और साल में एक बार 17000 रुपये भरना है. मैंने उनके कहने पर ही एक इंश्योरेंस लिया है और बस साल में एक बार इसके पैसे भर देती हूं.”दिल्ली के एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रही 24 वर्षीय सुमन कहती हैं कि इंश्योरेंस से जुड़ी चीज़ों के बारे में मुझे ज्यादा पता नहीं है, मेरा इंटरेस्ट भी नहीं है. मुझे तो बैंक में ही पैसे रखना सही लगता है.महिलाएं पैसे घर में छुपा छुपा कर रखने के लिए जानी जाती हैं. कभी किचन के डिब्बों में तो कभी अलमारी में कपड़ों के नीचे. पैसे जमा करने की इन तरकीबों से आगे निकल चुकीं भारतीय महिलाओं के बीच अब जीवन बीमा और हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने की दिलचस्पी भी बढ़ रही है. लेकिन महिलाओं द्वारा इंश्योरेंस खरीदने के इस आकड़े को बढ़ाने के लिए अभी भी महिलाओं के बीच इंश्योरेंस को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.“भारतीय महिलाओं के बीच इंश्योरेंस से जुड़ी जानकारी और जागरूकता न होने के कारण अभी भी लगभग 85 प्रतिशत भारतीय परिवारों में पुरुष ही निर्णय लेते हैं कि परिवार के लिए कब और किस प्रकार का बीमा लेना है.”लेकिन अब बीमा की बात हो या फिर बचत की महिलाएं आगे बढ़ कर बचत करने लगी हैं. हालांकि महिलाओं को और जागरूक किए जाने की जरूरत है. महिलाओं के द्वारा किए जा रहे बीमा के बारे में पॉलिसीबाजार के बिजनेस हेल्थ इंश्योरेंस हेड सिद्धार्थ सिंघल कहते हैं, “डेटा के अनुसार लगभग 15 प्रतिशत भारतीय महिलाएं अपने या अपने परिवार के लिए इंश्योरेंस खुद खरीदती हैं. वहीं लगभग 52 प्रतिशत महिलाएं खुद के लिए इंश्योरेंस खरीदती हैं और 48 प्रतिशत महिलाएं अपने परिवार के लिए या फिर फैमिली पैक वाले हेल्थ इंश्योरेंस खरीदती हैं.”किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी, मृत्यु और विकलांगता के खिलाफ सुरक्षा के लिए इंश्योरेंस को एक सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है. लेकिन भारत जैसे देश में इंश्योरेंस की पहुंच अभी भी बहुत कम है. हालांकि कोरोना महामारी के बाद से लोगों के बीच इंश्योरेंस के प्रति जागरूकता काफी बढ़ी है. लेकिन ये कहा जा सकता है कि भारत अभी भी इंश्योरेंस अपनाने की प्रारंभिक अवस्था में ही है. वहीं अगर महिलाओं के बीच इंश्योरेंस अपनाने की बात करें तो और भी निराशाजनक तस्वीर सामने आती है.यही नहीं अगर कामकाजी महिलाओं की बात करें तो विश्व बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं ने साल 2021 में भारत में सीधे तौर पर 23 फीसदी से कम महिलाओं ने इसका प्रतिनिधित्व किया है, यह आंकड़ा साल 2005 में लगभग 27 फीसदी था. वहीं इसकी तुलना में पड़ोसी देशों बांग्लादेश में 32 फीसदी और श्रीलंका में 34.5 फीसदी है.वहीं महिला श्रम की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. भारत सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो महिला श्रम बल की भागीदारी 2020-21 में बढ़कर 25.1 फीसदी हो गई जो कि साल 2018-19 में 18.6 फीसदी था।
जागरूकता और विश्वास की कमी


महिलाओं के बीच इंश्योरेंस की पहुंच कम होने के पीछे कई कारण हैं, जिसमें इंश्योरेंस के लाभों के बारे में सीमित जागरूकता, और वित्तीय सेवाओं में विश्वास की कमी शामिल भी है. इसके अलावा, भारत में महिलाएं अक्सर अपने परिवारों की वित्तीय जरूरतों को अपने ऊपर प्राथमिकता देती हैं, जिससे वह अपने लंबे समय के लिए अपनी फाइनेन्शियल प्लानिंग पर ध्यान नहीं दे पाती हैं.टर्म इंश्योरेंस हेड ऋषभ गर्ग कहते हैं भारतीय महिलाओं को बीमा के महत्व को वित्तीय स्वतंत्रता, परिवार की सुरक्षा और भविष्य के लाभ के रूप में देखना चाहिए.वह आगे कहते है, “महिलाओं को पैसे को नकदी के रूप में घर में रखने के बजाय पैसे बचाने और जमा रखने के पॉलिसी जैसे उपायों के बारे में अधिक जानने की जरुरत है.”महिलाओं द्वारा इंश्योरेंस कम खरीदने का प्रमुख कारण उन प्रोडक्ट्स की कमी है जो उनकी विशेष आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डिजाइन किए गए हैं. हालांकि इंश्योरेंस इंडस्ट्री अपने सभी ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए नए नए उत्पादों के साथ आ रही है.पॉलिसी बाजार के हेल्थ इंश्योरेंस हेड सिद्धार्थ सिंघल कहते है, “भारत में बड़े शहरों की महिलाएं ज्यादातर पॉलिसी खरीदती हैं, खासकर मेट्रोपोलिटन शहर की महिलाएं.”
मैटरनिटी प्लान


भारतीय महिलाओं को इंश्योरेंस खरीदने के लिए आकर्षित करने के लिए विभिन्न बीमा कंपनियों द्वारा कई तरह के पॉलिसी निकाली गई हैं. इनमें से एक मैटरनिटी प्लान हैं जो आजकल महिलाओं को हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने के लिए आकर्षित कर रहा है.इन दिनों ज्यादातर बीमाकर्ताओं के पास मैटरनिटी बेनिफिट सहित महिलाओं की खास जरूरतों को पूरा करने के लिए स्पेशल प्लान्स हैं. हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां डिलीवरी के पहले और डिलीवरी के बाद की देखभाल, डिलीवरी और अस्पताल में भर्ती सहित मैटरनिटी पीरियड के दौरान होने वाले सभी खर्चों के लिए व्यापक कवरेज प्रदान करती हैं.दिप्रिंट से बात-चीत में सिद्धार्थ ने बताया, “महिलाओं को हेल्थ इंश्योरेंस के लिए आकर्षित करने के लिये मैटरनिटी प्लान एक नया स्कीम बना है. अब लगभग सभी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां मैटरनिटी प्लान ऑफर करती है. मैटरनिटी पीरियड में होने वाले सभी प्रकार के खर्चों को इसमें शामिल किया जाता है जो इसका सबसे बड़ा फायदा है.”नए जमाने के मैटरनिटी प्लान इन दिनों कम से कम नौ महीने की वेटिंग पीरियड जैसी आकर्षक सुविधाएं प्रदान करते हैं. कई योजनाएं नवजात शिशु से संबंधित 90 दिनों तक के मेडिकल खर्च को भी कवर करती हैं.

2 thoughts on “घर में छुपा छुपा कर पैसे रखने वाली महिलाओं को नहीं है बीमा में रुचि  अभी भी हैं पुरुषों पर निर्भर

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