विधानसभा चुनाव के बाद क्या मध्य प्रदेश के बुरे दिन आने वाले हैं?

रणघोष खास. संजीव श्रीवास्तव 

 विधानसभा चुनाव के बाद मध्य प्रदेश के क्या बुरे दिन आने वाले हैं? यह सवाल राजकीय खज़ाने के खस्ता हालातों के चलते खड़ा हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त की रेवड़ियां बांटे जाने को लेकर मध्य प्रदेश और राजस्थान की सरकारों के साथ ही केन्द्र सरकार, चुनाव आयोग और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को नोटिस दिए हैं। चार सप्ताह में इन सभी से जवाब मांगा है।मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। चुनावों की तारीखों की घोषणा एक-दो दिनों में हो जाने की संभावनाएं हैं।सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़ ने एक जनहित याचिका पर नोटिस दिए हैं।बता दें, मध्य प्रदेश फ्रीबीज में पीछे नहीं है। अपनी कुल आय और हैसियत को दरकिनार रखकर सूबे की सरकार मुक्त हाथों से चुनावी रेवड़ियां बांट रही है।राज्य की कुल आय में 28.8 फीसदी हिस्सा रेवड़ियों के रूप में बांट दिए जाने का आरोप मध्य प्रदेश पर है। इसे लेकर ही नोटिस दिया गया है।

बजट से ज्यादा कर्ज है मध्य प्रदेश पर

मध्य प्रदेश राज्य गले-गले तक कर्ज में डूबा हुआ है। मौजूदा वित्तीय वर्ष का उसका बजट 2.95 लाख करोड़ रुपयों का है। जबकि राज्य पर कर्ज 3.37 लाख करोड़ रुपयों का है।

राज्य पर बजट साइज से 42 हजार करोड़ रुपयों का ज्यादा कर्ज हो चुका है। कर्ज की यह स्थिति 30 सितंबर 2023 की है। वित्तीय वर्ष समाप्ति में अभी छह महीनों का समय शेष है। प्रदेश की सरकार को लोक-लुभावनी मुफ्त योजनाओं को पूरा करने के लिए हर महीने हजारों करोड़ रुपयों का कर्ज लेना पड़ रहा है।कर्ज लेने की गति का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है, सरकारी आंकड़ों के अनुसार छह महीने पहले तक सूबे के प्रति व्यक्ति पर जहां 25 हजार का कर्ज था, 30 सितंबर को प्रति व्यक्ति कर्ज का आंकड़ा बढ़कर 50 हजार हो चुका है।शिवराज सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में 36 हजार करोड़ रुपयों से ज्यादा की नई मुफ्त वाली योजनाएं लांच की हैं। चुनावों के मद्देनज़र लांच की गई योजनाओं में 1.31 करोड़ बहनों को हर महीने निश्चित राशि सीधे बैंक खातों में पहुंचाने और सस्ता सिलेंडर (रुपये 450 में सिलेंडर) देने वाली योजनाएं प्रमुख हैं।

24 हजार करोड़ रुपये साल ब्याज पर

कर्ज पर ब्याज का बोझ सतत बढ़ रहा है। फिलहाल सरकार 24 हजार करोड़ रुपये साल का ब्याज प्रदेश की सरकार चुका रही है। आने वाले महीनों में ब्याज का बोझ और भी बढ़ना तय है। दरअसल, अभी वित्तीय वर्ष समाप्त होने में 6 महीने का समय शेष है। फाइनेशियल ईयर समाप्त होने तक कर्ज का आंकड़ा 3.85 करोड़ के करीब पहुंचने की संभावनाएं हैं। दिसंबर में नई सरकार आयेगी। तय माना जा रहा है, सरकार जिस भी दल की बने, उसे अभूतपूर्व वित्तीय संकट का सामना करना पड़ेगा।

चुनावी लालीपॉप, चुनावों तक लोगों तक पहुंचती रहे, इसके लिए शिवराज सिंह सरकार को विकास एवं बजट में सुनिश्चित अनेक कार्यों को रोकना पड़ा है।खबरों के अनुसार राज्य के 41 महकमों में 137 योजनाओं को वित्त विभाग ने न केवल रोक दिया है, बल्कि फरमान जारी कर दिया गया है कि संबंधित विभाग वेतन-भत्तों और स्थापना से जुड़े आवश्यक खर्चों से इतर वित्त विभाग की पूर्व स्वीकृति के बिना अन्य कोई भी खर्च नहीं करें। 

बजट में हेरफेर के आरोप हैं

चुनावी घोषणाओं को पूरा करने के लिए विभागीय बजट में हेराफेरी के आरोप भी राज्य की सरकार और नौकरशाही पर लग रहे हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा के सदस्य दिग्विजय सिंह ने तो इस बारे में बयान जारी करते अफसरों को चेताया है, ‘कांग्रेस की सरकार बनने पर बजट में हेराफेरी की जांच कराई जायेगी। बजट में हेरफेर के आरोपी पाये जाने वाले अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।’पूर्व सीएम और पीसीसी चीफ कमल नाथ भी बार-बार दोहरा रहे हैं, ‘आज के बाद कल (इशारा कांग्रेस की सरकार आने की ओर) आयेगा। कल आयेगा तब पूरा हिसाब-किताब किया जायेगा।

बेतहाशा कर्ज के बावजूद नहीं थम रहा है घोषणाओं का दौर

बेतहाशा कर्ज के बावजूद राज्य में घोषणाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अक्टूबर माह की 1 से 7 तारीख के बीच मध्य प्रदेश की सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपयों से ज्यादा के कामों की आधारशिलाएं रखी हैं। भूमिपूजन किए हैं।मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने शुक्रवार 6 अक्टूबर को भोपाल में बैठकर सूबे की 13 हजार से ज्यादा योजनाओं वाले पत्थरों से परदे हटाए हैं। उन्होंने एक स्ट्रोक में 53 हजार करोड़ रुपयों की नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया है।

प्रधानमंत्री मोदी बीते 6 महीनों में 9 बार परोक्ष रूप से मध्य प्रदेश आये हैं। अक्टूबर माह में दो दौरे उन्होंने राज्य के किए हैं। वे 2 अक्टूबर को ग्वालियर में 19 हजार करोड़ से ज्यादा और फिर 5 अक्टूबर को जबलपुर में 12 हजार 500 करोड़ के कार्यों का ‘शुभारंभ’ करके गए हैं। आदिवासी वोट बैंक को रिझाने के लिए रानी दुर्गावती के 100 करोड़ से ज्यादा की लागत वाले भव्य स्मारक की आधारशिला भी प्रधानमंत्री मोदी ने जबलपुर में रखी है।

कर्ज चुकाने की हैसियत है तभी तो कर्ज मिल रहा है

बेतहाशा कर्ज लेने को लेकर सरकार से सवाल होते रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का कहना रहा है, ‘कर्ज मिलने की स्थिति है, कर्ज लेने की हैसियत है – तभी तो नया कर्ज मिल रहा है।उधर अर्थशास्त्र के जानकारों का कहना है, ‘बजट से ज्यादा कर्ज होना खराब स्थिति नहीं होती है, लेकिन यह निर्भर करता है कि कर्ज से मिली राशि का उपयोग किन मदों में करना है? यदि डवलपमेंट, इन्फ्रास्ट्रक्चर या फिर पब्लिक से जुड़ी योजनाओं के लिए बजट से ज्यादा कर्ज लिया जाता है तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन राशि फ्रीबीज पर उड़ाई जा रही है तो आने वाले दिनों में खजाने का ध्वस्त होना तय मानिए।जानकार सवाल उठाते हुए कह रहे हैं, ‘निरंतर कर्ज लेने की वजह से राज्य की आय की बड़ी राशि यदि केवल ब्याज के तौर पर जायेगी तो सूबा कैसे आगे बढ़ पायेगा? कैसे और कब तक हर माह की एक तारीख को सतत वेतन बंट पायेगा?’

नई सरकार के सामने दो ही विकल्प बचेंगे

अर्थ के जानकार, संभावना व्यक्त करते हुए बता रहे हैं, ‘वर्ष 2024-25 के बजट में मध्य प्रदेश की जनता पर नये करों के जरिये ही आने वाली सरकार खजाने की हालत को सुधार पायेगी। कोई अन्य विकल्प दिखता नहीं है। राज्य के पास ऐसे संसाधन नहीं हैं, जिनके माध्यम से वह अपनी आय बढ़ा पाये।जानकारों के अंदेशे के बाद साफ है, ‘नई सरकार बनने के बाद अगले बजट में सूबे की जनता को नये करों के लिए तैयार रहना होगा।’

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