Bengal Result 2026: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार बनाने जा रही है। दोपहर एक बजे तक के आंकड़े के अनुसार, राज्य में पार्टी प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ रही है। 190 से अधिक सीटों पर भाजपा आगे चल रही, जबकि डेढ़ दशक से राज करने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की बड़ी हार हो रही है। पार्टी का आंकड़ा 100 से भी नीचे चला गया है। हालांकि, आधिकारिक आंकड़े के लिए सोमवार शाम या रात तक का इंतजार करना पड़ सकता है। लेकिन रुझानों से साफ है कि बंगाल में भाजपा ने वह कमाल कर दिखाया है, जिसकी एक दशक पहले तक तो कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। पिछले 2021 विधानसभा चुनाव में भी भाजपा मजबूती से लड़ी, लेकिन 77 सीटें ही हासिल कर सकी, लेकिन इस बार वह ममता के गढ़ में सेंध लगाने में कामयाब रही। इस बार चुनावों में भाजपा की बड़ी जीत के पीछे 5 प्रमुख वजहें हैं।
हिंदुओं को एकजुट कर ले गई भाजपा
बंगाल में 27-32 फीसदी लगभग मुस्लिमों की आबादी है, जिसकी वजह से हर बार भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली पार्टियों को फायदा होता था। टीएमसी को मुसलमानों के वोटों का ज्यादातर हिस्सा पिछले डेढ़ दशक में मिलता रहा, जिससे वह हमेशा बढ़त पर रही। उसे मुस्लिमों के साथ-साथ महिलाओं और युवाओं का भी वोट मिलता रहा और कुछ जातियां भी टीएमसी के सपोर्ट में रहीं, लेकिन इस बार भाजपा ने हिंदुओं को एकजुट कर दिया। घुसपैठिए, बांग्लादेशी मुस्लिमों, एसआईआर जैसे तमाम मुद्दों के जरिए भाजपा ने हिंदुओं का वोट हासिल कर लिया।
एंटी इंकम्बेंसी रही बड़ी वजह
ममता बनर्जी की पार्टी को 2011 में जीत मिली थी, जिसके बाद वह 2016, 2021 में भी लगातार जीतीं। डेढ़ दशक तक सत्ता में रहने की वजह से इस बार ममता एंटी इंकम्बेंसी का भी सामना कर रही थीं। स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार, कट मनी और प्रशासनिक पक्षपात जैसे मुद्दे रैलियों में लगातार उठते रहे, जिससे ममता घिरती हुई दिखाई दीं। कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। डेढ़ दशक तक सत्ता चलाने के बाद माना जाता है कि कई स्तर पर सरकार के खिलाफ नाराजगी हो जाती है। यही वजह रही कि एंटी इंकम्बेंसी ने ममता की हार और भाजपा की जीत में बड़ा रोल निभाया।
पीएम मोदी और अमित शाह जैसे बड़े चेहरे
भाजपा की जीत के पीछे सबसे बड़ी वजह खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। उनके नेतृत्व में पिछले 12 सालों में भाजपा को कई राज्यों में जीत मिली है। फिर चाहे वह यूपी में 2017 में लंबे अरसे के बाद सत्ता पानी हो या फिर बिहार में इस बार सबसे ज्यादा सीटें मिलने की बात हो। पार्टी उन्हीं के चेहरे पर ज्यादातर राज्यों और लोकसभा चुनावों में गई, जिसका उसे सीधा फायदा भी हुआ। 12 साल बीत जाने के बाद विपक्ष के पास पीएम मोदी से बड़ा चेहरा नहीं दिखाई देता है। वहीं, बंगाल चुनाव में इस बार अमित शाह ने भी कड़ी मेहनत की। वह लगभग 15 दिनों तक बंगाल में ही रहे और जमीनी रणनीति तैयार की, जिसने आखिरकार राज्य में पहली बार भाजपा की सत्ता लाने में अहम भूमिका निभाई।
अलग-अलग लड़ा विपक्ष
राज्य में विपक्ष के अलग-अलग लड़ने का भी फायदा भाजपा को मिला। कांग्रेस ने मालदा, मुर्शीदाबाद समेत कई मुस्लिमबहुल इलाकों में बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक वोट हासिल किए हैं। मुस्लिमों में टीएमसी सरकार के प्रति काफी नाराजगी देखी गई। टीएमसी कैंडिडेट को वोट देने के बजाए कांग्रेस को वोट दिया। वोटो का बंटवारा होने की वजह से कई सीटों पर सीधा फायदा भाजपा उठा ले गई। माना जा रहा है कि कांग्रेस और टीएमसी के साथ गठबंधन न होना भी ममता को नुकसान कर गया। चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने रैली में ममता बनर्जी पर जमकर निशाना साधा और उनकी सरकार के कामकाज करने के तरीके पर सवाल उठाए। यहां तक कि उनके भाषण को भाजपा ने भी सोशल मीडिया पर शेयर किया और उसका सपोर्ट करते हुए ममता पर हमला बोला।
भाजपा को नई उम्मीद के तौर पर जनता ने देखा
पिछले 70 सालों से अधिक समय से बंगाल में जनता ने या तो कांग्रेस का शासन देखा या फिर लेफ्ट और ममता बनर्जी का। भाजपा को कभी मौका नहीं मिला, जिसकी वजह से इस बार जनता ने उन्हें मौका दिया। लोगों को भाजपा से काफी उम्मीदें भी हैं, क्योंकि पार्टी ने महिलाओं, युवाओं समेत तमाम वर्गों के लिए कई बड़े वादे किए। हर महीने महिलाओं को तीन हजार रुपये देने का वादा किया गया, जबकि युवाओं को भी आर्थिक लाभ देने की बात कही गई। वहीं, किसानों के लिए पीएम मोदी ने खुद पीएम किसान योजना में मिलने वाली राशि को बढ़ाकर प्रति वर्ष नौ हजार रुपये करने की घोषणा की। हर वर्ग के लिए पार्टी ने कोई न कोई वादा किया है। इन सबका भी वोटर्स पर काफी असर देखने को मिला, जिसकी वजह से बंगाल में भाजपा की जीत का रास्ता तय हुआ।