लद्दाख में बड़ा हादसा! सेना का चीता हेलीकॉप्टर क्रैश, सवार थे मेजर जनरल समेत 3 अधिकारी

लद्दाख के तांगत्से (लेह के दक्षिण-पूर्व) के पास भारतीय सेना का एक ‘चीता’ हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। इस बड़े हादसे में 3 डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) मेजर जनरल समेत तीन अधिकारी बाल-बाल बच गए। इस डिवीजन को त्रिशूल डिवीजन के नाम से भी जाना जाता है। यह हादसा बुधवार को हुआ था, लेकिन इसकी जानकारी शनिवार को सामने आई है। राहत की बात यह है कि हेलीकॉप्टर में सवार तीनों अधिकारियों को मामूली चोटें ही आई हैं।

हादसे की जांच के लिए ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ के आदेश

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना के एक अधिकारी ने बताया कि इस सिंगल-इंजन वाले चीता हेलीकॉप्टर को एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर रैंक के अधिकारी उड़ा रहे थे। जबकि थर्ड इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग, मेजर जनरल सचिन मेहता उसमें बतौर यात्री पर सवार थे। हादसे के असल कारणों का पता लगाने के लिए सेना द्वारा ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ (CoI) के आदेश दे दिए गए हैं।

हादसे के बाद मेजर जनरल मेहता की अन्य दो अधिकारियों के साथ ली गई एक सेल्फी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। इस तस्वीर में वे बुरी तरह क्षतिग्रस्त चॉपर के पास चट्टानों पर बैठे नज़र आ रहे हैं।

पुरानी हो चुकी है चीता और चेतक हेलीकॉप्टर्स की फ्लीट

यह दुर्घटना भारतीय सेना के पुराने हो चुके चीता और चेतक हेलीकॉप्टर बेड़े से जुड़े जोखिमों को एक बार फिर से उजागर करती है। सेना जल्द ही इन्हें अपने बेड़े से चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना बना रही है। अगले एक दशक में, सेना की एविएशन कोर के आधुनिकीकरण अभियान के तहत इनकी जगह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के आधुनिक ‘लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर’ (LUH) लेंगे।

1971 से हिमालय में सेना की रीढ़ बना हुआ है ‘चीता’

हाई-ऑल्टिट्यूड (अधिक ऊंचाई) के रिकॉर्ड बनाने के बाद साल 1971 में चीता हेलीकॉप्टर को सेना में शामिल किया गया था। तब से यह हिमालयी क्षेत्रों में सैन्य ऑपरेशंस की रीढ़ रहा है। यह हेलीकॉप्टर फ्लाइंग जीप, पोस्टल वैन, आर्टिलरी स्पॉटर, टोही मिशन और ऊंचे हिमालयी इलाकों में एयर एंबुलेंस के रूप में बेहद अहम भूमिका निभाता आ रहा है।

सियाचिन ग्लेशियर जैसी 18,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर उड़ान भरना चीता हेलीकॉप्टर की डिजाइन लिमिट से बाहर है। इतनी ऊंचाई पर हवा का दबाव कम होने से रोटर की लिफ्ट और इंजन की पावर घट जाती है। इसके बावजूद बाना टॉप, अशोक और सोनम जैसी 19,600 से 21,000 फीट की ऊंचाई वाली रिमोट चौकियों के लिए यह हेलीकॉप्टर आज भी एक लाइफलाइन है।

चीता की जगह लेगा HAL का ताकतवर LUH

अत्यधिक ऊंचाई और कठिन परिस्थितियों से निपटने के लिए एचएएल (HAL) के एलयूएच (LUH) प्रोग्राम को साल 2009 में मंजूरी दी गई थी। यह शक्ति-1यू (Shakti-1U) टर्बोशाफ्ट इंजन से लैस है। यह 21,300 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है और साल्टोरो रिज पर दुनिया के सबसे ऊंचे हेलीपैड पर लैंड करने में सक्षम है।

रफ्तार और क्षमता

इसकी अधिकतम गति 235 किमी/घंटा है। 3-टन क्लास का यह हेलीकॉप्टर 2 क्रू मेंबर के साथ 6 सैनिकों को ले जा सकता है। इसमें डिजिटल ग्लास कॉकपिट दिया गया है जो नाइट-विजन डिवाइस के अनुकूल है। यह मेडिकल इवैक्यूएशन, सैनिकों के ट्रांसपोर्टेशन से लेकर टोही मिशन और वीआईपी मूवमेंट जैसे सभी रोल्स में काम करने के लिए तैयार किया गया है।