एनसीईआरटी : इतिहासकार चिंतित, किताबों से हटाए गए हिस्से केरल पढ़ाएगा

रणघोष अपडेट. देशभर से
देश के जाने-माने इतिहासकारों ने सीबीएसई के छात्रों के लिए इतिहास की किताबों से कुछ विषयों को हटाने पर एनसीईआरटी के कदम पर चिंता जताई है। उन्होंने एक बयान में कहा कि विशेष रूप से कक्षा 12 की किताबों से विषयों को हटाने के एनसीईआरटी के फैसले पर “हैरान” हैं। बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में रोमिला थापर, जयति घोष, मृदुला मुखर्जी, अपूर्वानंद, इरफान हबीब और उपिंदर सिंह शामिल हैं। इनमें से कोई भी नाम परिचय का मोहताज नहीं है। रोमिला थापर और इरफान हबीब की लिखी किताबें कई शिक्षण संस्थाओं में पढ़ाई जाती हैं।इतिहासकारों ने कहा कि महामारी-लॉकडाउन की वजह से जब पाठ्यक्रम के बोझ को हल्का करने की जरूरत थी, एनसीईआरटी ने मुगल अदालतों के इतिहास, गुजरात में 2002 के सांप्रदायिक दंगों जैसे विषयों को हटाने की एक विवादास्पद प्रक्रिया शुरू की। इसी तरह इमरजेंसी का दौर… कक्षा 6 से 12 तक की सामाजिक विज्ञान, इतिहास और राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों से हटा दिया गया।उन्होंने कहा, स्कूल खुल चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद एनसीईआरटी पुस्तकों के नए संस्करणों से हटाए गए चैप्टर वापस नहीं हुए। पहले तो महामारी में पढ़ाई का बोझ घटाने के लिए ऐसा किया गया था।इतिहासकारों ने कहा कि इतिहास के अध्ययन को इस तरह से कम करके, छद्म इतिहास के लिए जमीन तैयार की जा रही है। विशेष रूप से एक सांप्रदायिक और जातिवादी ‘इतिहास’ आज व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया ऐप माध्यमों से व्यापक रूप से प्रसारित किए जाते हैं। इतिहासकारों ने शिक्षा में राजनीति लाने के कथित प्रयासों की ओर इशारा करते हुए कहा। हालांकि एनसीईआरटी ने ऐतिहासिक तथ्यों को दबाने के आरोपों से इनकार किया है। एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा है कि महामारी से प्रभावित छात्रों की मदद करने के लिए ऐसा किया गया। इसका कोई गुप्त राजनीतिक मकसद नहीं है। एनसीईआरटी ने कहा कि जैसा कि हमने पिछले साल भी समझाया था, कोविड महामारी के पढ़ाई का बहुत नुकसान हुआ है। तनावग्रस्त छात्रों की मदद करने के लिए, और समाज और राष्ट्र के प्रति एक जिम्मेदारी के रूप में, यह महसूस किया गया कि पाठ्यपुस्तकों में कंटेंट का भार कम किया जाना चाहिए। सकलानी ने कहा कि विशेषज्ञों ने महसूस किया कि कुछ अध्याय विषयों और कक्षाओं में ओवरलैप हो रहे थे। ऐसे में छात्रों पर बोझ कम करने के लिए कुछ हिस्सों को हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि बच्चों ने एक दर्दनाक महामारी का सामना किया और बहुत तनाव में थे। उन्होंने इन आरोपों का खंडन किया कि परिवर्तन एक विशेष विचारधारा के अनुरूप किए गए थे।
केरल हटाए गए हिस्से को पढ़ाएगा
विपक्ष शासित राज्यों में केरल पहला राज्य है जिसने एनसीआईआरटी की इस हरकत का भारी विरोध किया है। केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने शनिवार को कहा कि एनसीईआरटी को भंग कर दिया जाना चाहिए। इसमें सभी राज्यों के प्रतिनिधियों को शामिल कर एनसीईआरटी का पुनर्गठन किया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि केरल पाठ्यपुस्तकों से कुछ हिस्सों को हटाने के एनसीईआरटी के फैसले से सहमत नहीं है।
केरल के मंत्री ने कहा कि केरल राज्य पाठ्यपुस्तकों से आजादी के बाद की अवधि के इतिहास के कुछ हिस्सों को हटाने से सहमत नहीं हो सकता है। हम ऐसे किसी भी फैसले से सहमत नहीं हो सकते जो छात्रों के शैक्षणिक हित के खिलाफ हो।पिछले साल, जब एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम से विज्ञान और मानविकी से कुछ हिस्सों को हटाया था तो भी केरल ने विरोध किया था। केरल राज्य में पुराने पाठ्यपुस्तक वाले विज्ञान और मानविकी के हटाए गए हिस्सों को बच्चों को पढ़ाया गया। समझा जाता है कि केरल में पुरानी पाठ्य पुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी, जिन्हें मुगल काल और आजादी के बाद का इतिहास शामिल होगा। एनसीईआरटी और एससीईआरटी के साथ एक समझौते के अनुसार हर साल केरल में पाठ्यपुस्तकों को फिर से छापा जाता है। अधिकारियों ने कहा कि इस साल एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों को उन हिस्सों को छोड़कर प्रिंट करेगा जिन्हें वे पहले ही हटा चुके हैं। एक अधिकारी ने कहा, हमें एनसीईआरटी से पाठ्यपुस्तकें (हटाए गए) हिस्सों के बिना मिलेंगी, जिन्हें केरल सरकार स्कूलों में पढ़ाना चाहती है। इसलिए, यदि राज्य यह तय करता है कि वह पाठ्यपुस्तकों से कुछ हिस्सों को बाहर करने की अनुमति नहीं देगा, तो हमें पूरक पाठ्यपुस्तकों को प्रिंट करना होगा। सरकार जल्द ही इस पर फैसला लेगी।

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