गणतंत्र दिवस पर दिल्ली के लाल किले पर हुई घटना की निंदा करते हुए पूर्व मंत्री कैप्टेन अजय सिंह यादव ने कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नही है। लाल किले पर जो हुआ वो सब पुलिस और भाजपा ने करवाया है। लाल किले की घटना को अंजाम देने वाला दीप सिंधु भाजपा का कार्यकर्ता है। उसकी फोटो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ सोशल मिडिया पर वायरल हो रही है। लाल किले को तो भाजपा ने पहले ही नीजि लोगों के हाथ में दे दिया है। तब उनको ये ध्यान नही रहा कि लाल किला देश की धरोहर है। उद्दोगपति लाल किले पर आम जनता से पैसा वसूल रहे हैं, यह सब भाजपा की देन है। इसके अलावा बीएसएनएल, एलआईसी, रेल इत्यादि को बेकने में लगे हुए हैं, धीरे–धीरे कर देश को बेकने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगे हुए हैं। पूर्व मंत्री कैप्टेन अजय सिंह यादव अपने निवास स्थान मॉडल टाउन में ग्रामीणों के साथ प्रेसवार्ता कर रहे थे। कैप्टेन अजय सिंह ने कहा कि इन सभी बातों के जिम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं। सबसे पहला सवाल तो यह है कि ये लोग लाल किले पर पंहूचे कैसे ? पुलिस ने भाजपा कहने पर जानभूझ कर पन्नु गुट को इस रूट पर आने दिया, जबकि इस रूट की किसानों को ईजाजत ही नही थी तो फिर किसानों को यहां पर आने ही क्यों दिया। कैप्टेन अजय सिंह ने कहा कि किसानों के साथ अब जो भी हो रहा है वो सब भाजपा का षड़यंत्र है। भारतीय जनता पार्टी के नेता देश की जनता को बरगलाने में लगे हैं। ऐसा ही रेवाडी के मसानी और गंगायचा टोल पर हुआ है। यहां पर भी भाजपा नेताओं ने लोगों को गुमराह किया। जिसके चलते प्रशासन और भाजपा नेताओं की मिलीभगत से यहां धरना दे रहे किसानों को डरा धमका कर भगा दिया। जबकि इससे पहले हमारे स्थानीय ग्रामीणों ने पिछले 40 दिनों से किसानों को कुछ नही कहा था। किसान अपना धरना दे रहे थे और स्थानीय लोगों ने भी किसानों का भरपूर साथ दिया था। लेकिन लाल किले पर हुई वारदात के बाद भाजपा के नेताओं खासकर राव इंद्रजीत सिंह ने हमारे किसानों को बरगलाना शुरू कर दिया है कि इन्होंने निशान सहाब का झंडा फिरा दिया। कल राव इंद्रजीत के समर्थकों सुमन सरपंच रसगण, सज्जन डुंगरवास, लाला राम सरपंच डुगंरवास, मा. सुंद्रर सिंह रसगण इत्यादि भाजपा के लोगों ने जाकर ग्रामिणों को गुमराह कर दिया। कैप्टेन अजय सिंह यादव के निवास स्थान पर मसानी, रसगण, जोनावास, बालियर खुर्द, निखरी, हांसका, पचगईं, ढाकिया, खरकडा, माजरा श्योराज सहित लगभग एक दर्जन से अधिक गांव के लोग पंहूचे, जिन्होंने बताया कि यहां से किसानों को भगाना सब कुछ भाजपा की सोची समझी चाल थी। हमारी संस्कृति ऐसी नही है कि हमारी शरण में आए हुए आंदोलनकारियों को भगाएं। हमारी संस्कृति है कि हम आए हुए लोगों को मान–सम्मान दें।