जनता के वोटों से बने पार्षदों की हैसियत तय कर रहे असरदार नेता

रणघोष खास. सुभाष चौधरी

रेवाड़ी में जिला प्रमुख बनाने को लेकर पार्षद अलग अलग खेमों में बंट गए हैं। सभी का अपना गणित है। कोई दूसरों के खर्चें पर देश भ्रमण पर है तो कोई इधर उधर नहीं जाकर अपने अलग जुगाड़ में लगा हुआ है। सभी का कॉमन एजेंडा है अलग अलग रास्तों से हैसियत बनी रहे। जिन मतदाताओं ने अपने वोटों से उन्हें पार्षद बनाया उनकी अब कोई जरूरत नहीं है। जिला प्रमुख के दावेदार उन नेताओं के दरबार में पहुंच गए हैं जहां उनके आशीर्वाद से मनोकामना पूरी हो सकती है। यहां समझ में यह नहीं आता कि जो पार्षद जिला प्रमुख  बनाने के लिए टूर पैकेज पर बुक हो गए हैं वे अपनी सोच और ईमानदारी से कैसे अपनी जिम्मेदारी को निभा पाएंगे। जिन पर लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं उसकी वसूली किस रास्ते से पूरी होगी। 22 दिसंबर को उपायुक्त ने जिला प्रमुख बनाने के लिए पार्षदों की पहली मीटिंग बुलाई है। ऐसे में पार्षदों की मौजूदगी से यह साफ हो जाएगा कि पकड़म पकड़ी के इस खेल में कौन जीत रहा है और कौन बाहर हो चुका है। हर बड़ा नेता अपने अधीन सत्ता के वर्चस्व बनाए रखने में सभी तरह के दांव  को आजमाता है। यही असल राजनीति का चेहरा होता है। हाथों में पॉवर रहेगी तो प्रभाव अपना काम करेगा। प्रभाव रहेगा तो सिस्टम अपने हिसाब से चलेगा। कुल मिलाकर जिले में पार्षद जिला प्रमुख बनाने को लेकर अपने छिपे हुए एजेंडों को लेकर बिखरे हुए नजर आ रहे हैं। ऐसा कोई मजबूत दावेदार नहीं है जो अपने दम पर या कॉमन एजेंडे से बहुमत जुटा ले। यहां असरदार नेता के फार्मूले पर ही जिला प्रमुख बनना तय है। वर्तमान में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह सबसे आगे चल रहे हैं उसके बाद कौन है का कॉलम खाली नजर आ रहा है।