महिला से छेड़छाड़ से शुरू हुआ मामला 50 लाख से होता हुआ वापस महिला पर जा टिका
रणघोष खास. रेवाड़ी
शहर में रविवार को एक महिला के साथ छेड़छाड़ से जुड़े मामले ने जांच से पहले ही सही और गलत की अलग अलग कहानी पेश कर दी है। इस शिकायत में पूर्व जिला प्रमुख सतीश यादव, जिला बार एसोसिएशन रेवाड़ी के प्रधान शमशेर यादव एवं एडवोकेट बीके खोला का नाम आने से मसला ओर गंभीर हो गया है। शिकायतकर्ता भी भाजपा कर्मचारी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक विद्यानंद लांबा के बेटे शमशेर सिंह लांबा ने दर्ज कराई है। इस पूरे मामले की गौर करने लायक बात यह है कि जिस महिला ने विद्यानंद लांबा पर छेड़छाड़ करने का आरोप लगाते हुए महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई थी उसने बाद में यह शिकायत वापस ले ली थी। यह महिला बाबूलाल खोला के घर पर काम करने के लिए आती थी। इस पूरे मामले में छेड़छाड़ का मामला खत्म हो गया लेकिन इसकी जगह 50 लाख रुपए ब्लैकमेलिंग के नाम पर वसूलने का लग गया। रविवार दोपहर दोनों पक्षों ने अपने बयान दर्ज कराए। सतीश यादव ने कहा कि वे कानून में भरोसा करते हैं। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वे राजनीतिक छवि रखते हैं इसलिए उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास करने की साजिश से इंकार नहीं किया जा सकता। विद्यानंद लांबा ने जो कहा कि सतीश से उनके पारिवारिक संबंध रहे हैं। उनके बेटे के साथ जो किया वह असहनीय है। हम शत प्रतिशत सही है। उनका बेटा शमशेर सिंह लांबा बिजली का ठेकेदार है। उसका आरोप है कि वे महिला से छेड़छाड़ के मामले में वे उनसे अपने प्लाटिंग के काम में बिजली का फ्री में काम कराना चाहते थे। लांबा का दावा है कि उसके पास पर्याप्त सबूत है जो यह साबित करते हैं कि उसे परेशान किया जा रहा था। उन्हें पुलिस जांच पर पूरा भरोसा है। प्रधान शमशेर यादव एवं बीके खोला ने कहा कि साजिश के तहत उनकी छवि को खराब करने की साजिश है। खोला ने कहा कि आरोप लगाने वाली महिला ने अपनी पीड़ा हमें बताई थी हमने उसकी मदद की। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर महिला के खिलाफ वास्तव में गलत हुआ था तो उसने शिकायत वापस क्यों ले ली। क्या उस पर दबाव बनाया गया। यहां अब इस केस में महिला की भूमिका ना होते हुए भी महत्वपूर्ण हो गई हैं।
मामला वापस या समझौते में तब्दील हुआ तो भरोसा खत्म
रेवाड़ी शहर के हिसाब से यह मामला बेहद ही हाईप्रोफाइल है। दोनों पक्ष अपनी अपनी हैसियत रखते हैं। मामला आपसी झगड़े या लेन देन का नहीं चरित्र एवं ब्लैकमेलिंग से जुड़ा हुआ है। लिहाजा अगर यह मामला वापस या समझौते में तब्दील होता है तो जिन पर यह आरोप लगे हैं उनकी छवि कैसे बेदाग होगी और उस पर असर पड़ेगा। अगर निष्पक्ष जांच में स्थिति स्पष्ट हो जाती है तो समाज में छवि को लेकर अलग ही मैसेज जाएगा। कुल मिलाकर आने वाले कुछ दिनों में इस मामले पर सभी की नजरें रहेगी।