दक्षिण हरियाणा की राजनीति को समझने के लिए इस लेख को जरूर पढ़े

 दुष्यंत इसी तरह रेवाड़ी आते रहे तो भाजपा- कांग्रेस को अपना चैकअप कराना पड़ेगा


रणघोष खास. सुभाष चौधरी

हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला पिछले कुछ दिनों से दक्षिण हरियाणा में जेजेपी की जड़ों को मजबूत करने के लिए सीधे लोगों से रूबरू हो रहे हैं। दुष्यंत के मिलने का अंदाज अपने पड़़दादा चौधरी देवीलाल, दादा ओमप्रकाश चौटाला एवं पिता डॉ. अजय चौटाला की तरह है। बड़े बुजुर्गों को देखकर अपनी गाड़ी रोक लेना, चरण स्पर्श करना और प्यार दुलार से मिलना चुंबक की तरह असर करता है। दो दिन पहले रेवाड़ी में जितनी भी जनसभाएं हुईं दुष्यंत बेहद खुश नजर आए।  यहां जेजेपी के पास खोने को कुछ नहीं है लेकिन हासिल करने की अपार संभावनाए चारों तरफ बिखरी हुई है। वजह यहां भाजपा एक चेहरा होते हुए भी अंदर खाने अलग अलग टुकड़ों में बिखरी हुई है। कई मसलों पर तो विपक्ष की शक्ल में भाजपाई ही नजर आते हैं। कांग्रेस की हालत भाजपा से ज्यादा बुरी है।

सरकार की लीडरशिप में दुष्यंत सबसे ज्यादा असरदार

कहने को भाजपा जेजेपी के सहयोग से सरकार चला रही है। सरकार में उसकी अपनी फौज है लेकिन जमीन पर डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की लीडरशिप ज्यादा असर डाल रही है। दो दिन पहले रेवाड़ी में आए दुष्यंत के तीन कार्यक्रमों में नजर आई भीड़ ने जेजेपी में नई जान डाल दी है। इसका असर कब तक बना रहेगा यह जेजेपी की प्रबंधन नीति पर तय करता है। जिला मुख्यालय पर अभी तक पार्टी का अपना कार्यालय नहीं होना अभी तक जेजेपी के पीछे रहने के असल वजूद का अहसास कराता रहा है। 12 अक्टूबर को रेवाड़ी के  गांव सहारनवास में पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव के भतीजे एवं जेजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष अभिमन्यु राव पहली बार पार्टी के प्लेटफार्म पर अपनी दमदार पोजीशन में नजर आए। मौके पर दुष्यंत को पहनाई 108 मीटर लंबी पगड़ी पर यादव सभा, सोनी समाज,पंजाबी समाज, बार एसोसिएशन रेवाड़ी,बावल, बावरिया समाज, नम्बरदार एसोसिएशन, ठठेरा, गुर्जर, ब्राह्माण, जाट समाज समेत लगभग  सभी बिरादरियों के मौजिज लोगों की मोहर लगना यह बताता है कि दुष्यंत का अब अगला लक्ष्य यह इलाका है जहां से चंडीगढ़ में सरकार बनने या गिरने का गणित तैयार होता है। सत्ता में बने रहने से जाट बाहुल्य गांवों का दुष्यंत के प्रति बढ़ता झुकाव भी जेजेपी को नई ऊर्जा दे रहा है।  इससे 18 सालों से सत्ता से दूर इनेलो को नुकसान जरूर हो रहा है। हालांकि यह सबकुछ जेजेपी के सत्त में बने रहने, दुष्यंत के दौरे व जिले में काम करने वाली टीम की वर्कस्टाइल से तय होता है। तीन विधानसभा में भाजपा- कांग्रेस की मौजूदा हालात में जेजेपी के पास सत्ता में रहते हुए स्थापित  होने का यह बेहतर अवसर है।

 रेवाड़ी सीट पर कप्तान ही कांग्रेस, भाजपा का कोई हिसाब नहीं

रेवाड़ी विधानसभा सीट पर पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव खुद में ही कांग्रेस होने की आधारशिला को मजबूत कर चुके हैं जिस पर विधायक बनकर चिंरजीव राव अपनी राजनीति इमारत खड़ी कर रहे हैं। भाजपा की इस सीट पर क्या हालत है यह 2019 के विधानसभा चुनाव में सभी देख चुके हैं। पार्टी में टिकट के दावेदारों में आधे से ज्यादा का अपना कोई वजूद नहीं है। वे दिल्ली से चलने वाली लहर में अपनी नैया पार करने के जुगाड़ में रहते हैं। यहां केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह को ही उनके समर्थक पार्टी मानते हैं। भाजपा में राव को संभालने  वाले कम और निपटा देने वालों की संख्या में जबरदस्त इजाफा होता जा रहा है जिसका नजारा 2024 के चुनाव में साफतौर से नजर आएगा। इतना बड़ा संगठन, केंद्र व राज्य में सरकार होने के बावजूद जिले में भाजपा के भीतर ही कई भाजपा बन चुकी है जो सीधे तौर पर विरोधियों को मजबूत करने का काम करेगी।

कोसली में कांग्रेस दीपेंद्र के भरोसे, भाजपा में एक से बढ़कर एक दावेदार

कोसली में कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुडडा के बिना कोई ऐसा नेता नहीं है जो अपने दम पर सीट निकालने का दम रखता हो। केंद्र व राज्य में सरकार नहीं होने के बावजूद वर्तमान में दीपेंद्र इस इलाके में सबसे ज्यादा असरदार नेता के तौर पर अपनी हैसियत बनाए हुए हैं। राव यादुवेंद्र सिंह अपनी ईमानदार छवि से वजूद को बनाए हुए हैं लेकिन बिना दीपेंद्र नैया पार नहीं है। यहां से भाजपा विधायक लक्ष्मण यादव ने अपनी कार्यप्रणाली से 2019 में मिली जीत को कमजोर नहीं होने दिया है लेकिन पार्टी के भीतर ही उनकी टेस्टिंग जारी है। जिसमें कई बार उनका राजनीति बीपी शूगर कम ज्यादा होता रहा है। यहां से पूर्व मंत्री जगदीश यादव, पूर्व मंत्री विक्रम यादव समेत पार्टी के कुछ छिपे रूस्तम किसी सूरत में नहीं चाहेंगे कि लक्ष्मण यादव  दुबारा वापसी करें। इसलिए उनका अलग से रिपोर्ट कार्ड तैयार करने में जुट गए हैं।

बावल में कांग्रेस के पास अवसरवादी चेहरे, राव के बिना भाजपा की राह आसान नहीं

आरक्षित सीट बावल में कांग्रेस के पास चेहरे चुनाव के समय टिकट मिलने या नहीं मिलने की सूरत में बदलते रहते हैं। इस सीट पर कप्तान अपना दखल रखने का पुरजोर प्रयास करते हैं वजह वे गुरुग्राम संसदीय सीट से पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ने का अनुभव ले चुके हैं। रेवाड़ी से सटे बावल की विशेष भूमिका रहती है। मौजूदा हालात में हरियाणा में कांग्रेस का चेहरा हुडडा परिवार है जिसमें विशेष तौर से सांसद दीपेंद्र हुडडा का अपना प्रभाव है। बावल में कांग्रेस के पास जो टीम नजर आ रही है उसकी कमान दीपेंद्र के पास ज्यादा है। यहां कांग्रेस को बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है। वजह यहां पिछले आठ सालों से डॉ. बनवारीलाल राज्य में कैबिनेट मंत्री के तौर पर केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिहं एवं भाजपा संगठन की कार्यशैली के बीच संतुलन बनाने में सफल रहे हैं। इस सीट पर राव इंद्रजीत सिंह का इतना जबरदस्त प्रभाव है कि हाईकमान किसी सूरत में राव के बिना किसी उम्मीदवार पर अपनी मर्जी से मोहर नहीं लगाती। 2024 में क्या होगा यह कहना मुश्किल है इतना जरूर है कि डॉ. बनवारीलाल हैट्रिक बनाने की स्थिति में तभी आ सकते है जब यहां से भाजपा में अदंरखाने सबकुछ ठीक चलता रहेगा नहीं तो दो नावों की सवारी के चक्कर में डूब भी सकते हैं।