धारूहेड़ा में प्रोपर्टी के नाम पर बड़ा खेल

 तीन दिन में ही तहसीलदार को भ्रष्ट बता दिया, राव समर्थकों ने कहा भाजपा सरकार भ्रष्ट

 

केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की छवि को अपने हिसाब से इस्तेमाल करने में पीछे नहीं हटते कुछ समर्थक

रणघोष अपडेट. धारूहेड़ा

औद्योगिक क्षेत्र धारूहेड़ा की तहसील में कामकाज को लेकर एक नया खुलासा सामने आया है। एक विडियो वायरल हो रही है जिसमें एक व्यक्ति तहसील के बाहर चिल्लाकर नप अधिकारी एवं कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है। यह खुद को केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह का सिपाही बता रहा है। यहां तक आरोप लगा रहा है कि भाजपा सरकार भ्रष्ट है उनके नेता राव इंद्रजीत सिंह ईमानदार है। यह विडियो काफी वायरल हो रही है। रणघोष ने लगाए गए आरोपों की वजह समझी तो हकीकत कुछ ओर ही सामने आ रही थी।

दरअसल तहसील के बाहर आरोप लगाने के बाद तहसील में लिखित में भ्रष्टाचार को ले

कर कोई शिकायत नहीं हुई ओर ना ही विडियो में एक अन्य व्यक्ति ने यह दावा किया कि काम के नाम पर वसूली होती है। जब यह शख्स चिल्लाकर आरोप लगा रहा था उस समय तहसीलदार श्यामसुंदर सीट पर नहीं थे वे मीटिंग में थे। शाम 5 बजे वे कार्यालय आए तो घटनाक्रम का पता चला। दूसरा तहसीलदार को कार्यभार संभाले तीन से चार दिन हुए हैं। उन्होंने आते ही  तहसील में एक नियम उन्होंने जरूर लागू कर दिया कि जिस भी प्लाट की रजिस्ट्री होगी पहले पटवारी मौके पर जाकर उसे देखकर आएगा कि वह नियमित कालोनी में है या अवैध प्लाटिंग के स्थानों पर। दूसरा प्लाट की खरीद फरोख्त का सभी कार्य चैक के माध्यम से होगा। यहां सवाल उठता है कि तहसील के बाहर चिल्लाने वाले शख्स ने सबूतों के साथ लिखित में शिकायत दर्ज क्यों नहीं करवाईं। यहां केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की ईमानदार छवि के नाम को क्यों उछाला गया। क्यों भाजपा सरकार को भ्रष्ट बताया गया। सबसे बड़ी बात जिस तहसीलदार को कार्यभार संभाले तीन दिन ही हुए हैं वह इतनी जल्दी भ्रष्ट भी हो गया। यहां के जानकारों का कहना है कि धारूहेड़ा क्षेत्र के आस पास अवैध प्लाटिंग का खेल बड़े स्तर पर चल रहा है जो बिना तहसील अधिकारी एवं कर्मचारियों की मिली भगत से नहीं हो सकता। इससे पूर्व में कार्यरत तहसीलदार पर भी रजिस्ट्री के नाम पर वसूली करने के गंभीर आरोप लगे थे। लिखित में डीसी तक शिकायतें दर्ज हुई थी। उसके चलते उनका तबादला कर दिया गया। वर्तमान में तहसीलदार श्यामसुंदर पंचकूला से स्थानांतरित होकर आए हैं। विडियो में जो दूसरा शख्स है वह पूर्व सरपंच बताया जा रहा है जो अधिकारियों से लाइजिनिंग का काम करता है। साथ ही प्रोपर्टी डीलर है और आए दिन तहसील में नजर आते हैं।  इसलिए बातचीत में उसने शिकायत करने से मना कर दिया। यहां तक अपने दिए गए बयानों से भी पलट गया। यहां गौर करने लायक बात यह है कि इस तरह के मसले में केंद्रीय मंत्री के नाम का इस्तेमाल क्या सोचकर किया गया जबकि तहसील के कामकाज को लेकर सभी अच्छी तरह से जानते हैं। यहां के कर्मचारियों का कहना है कि मनो वैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए यह सबकुछ किया जाता है। उधर तहसील में भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले इस शख्स का कहना है कि वे जनता की आवाज उठाते हैं। तहसील में दलाल घूमते हैं। वे राव इंद्रजीत सिंह के सिपाही है इसलिए किसी सूरत में भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे। अब सवाल वहीं उठता है कि लिखित में शिकायत दर्ज क्यों नहीं की गईं।