नप में भवनों को सील कर खोलने का चल रहा खेल, पूरी दाल ही काली

-हरियाणा पालिका अधिनियम 1973 के नियम 208ए बना अधिकारियों के लिए एटीएम


रणघोष खास. सुभाष चौधरी

हरियाणा की नगर निकायों में बड़ी चालाकी से अवैध रूप से बनाए भवनों को सील कर उसे चोरी छिपे खोलने का खेल चल रहा है। रेवाड़ी शहर में विशेषतौर से अस्पतालों की बाढ़ आई हुई है। हर दो तीन माह में एक भवन बनकर तैयार हो जाता है। गौर करने लायक बात यह है कि शहर में जितने भी अस्पताल चारों तरफ से खुले हुए हैं उसमें अधिकांश को पहले इस नियम के तहत नोटिस दिया जाता हैं। सेंटिंग हो गई तो सील नहीं होंगे। नहीं तो टीम मौके पर जाकर सील करने की कार्रवाई करने की कार्रवाई को मीडिया में अच्छा खासा कवरेज कराएगी। गौर करिए अधिकारी सील करने की सूचना मीडिया को सबसे पहले देते हैं। सील कब हटा दी इसकी भनक तक नही होने देते। कायदे से दोनों ही सूचनाएं जारी होनी चाहिए।  शहर में गंदे नाले पर बनी सड़क के चारों तरफ बने भवन व अस्पतालों के निर्माण में सील को लेकर अधिकारियों एवं भवन मालिकों के बीच बंद कर उसे खोलने की डील होती रही है। हरियाणा पालिका अधिनियम 1973 के नियम 208ए को अधिकारी अपनी मर्जी से इस्तेमाल करते हैं। मर्जी किया तो इस नियम के तहत भवन निर्माण को अवैध बताकर सील कर देते हैं। लेन देने की सेंटिंग होते ही इन्हीं नियमों में छूट का प्रावधान करते हुए सील को हटा देते हैं। सबकुछ सार्वजनिक तौर पर होता है मजाल अधिकारी पर जूं रेंग जाए। गढ़ी बोलनी रोड स्थित गंदे नाले पर बने एक बड़े अस्पताल को नप ने सील कर दिया था। उस पर काफी हल्ला भी मचा था।  कहने को यह भवन बाहर से बंद था लेकिन अंदर से काम चलता रहा। भवन पूरी तरह से बनकर तैयार हो गया तो उसकी बिना शोर मचाए चुपचाप सील हटा दी। इतना ही नहीं अधिकारियों के बदलते ही सील कार्रवाई करने की फाइलें इधर उधर दौड़ने लगती हैं। कुछ दिन पहले शहर में  ध्वस्त की गईं  46 दुकानों की कहानीं भी यही थी। जिस कार्यकारी अधिकारी केके यादव के नेतृत्व में दुकानों को ढहाया गया वहीं कुछ दिन बाद विजिलेंस टीम के हाथों चढ़ गया। शहर के सरकुलर रोड, गंदे नालों पर बनी सड़कों के दोनों तरफ बन रहे भवनों के निर्माण यह साबित हो रहा है कि नगर परिषद में दाल ही पूरी तरह से काली हो चुकी है।

नारनौल में भी जमकर चल रहा सील बंद या खोलने का खेल   

नारनौल नगर परिषद ने 25 नवंबर को शहर की अंदरूनी हिस्सों में बनाए जा रहे 5 भवनों के निर्माण को अवैध बताकर पहले उन पर सीलिंग किए जाने का नोटिस जारी किया। नारनौल भास्कर की खबर के अनुसार  हरियाणा पालिका अधिनियम 1973 के नियम 208ए को नोटिस देने के बाद भी ढाई महीने तक वहां कोई सीलिंग कार्रवाई नहीं की गई।जब वहां बहुमंजिला भवनों का निर्माण कार्य लगभग समाप्ति की ओर था तो 3 मार्च को अचानक उन पर सीलिंग कार्रवाई कर दी। यहां तो सब ठीक रहा। अब इन्हीं में से 4 भवनों को दोबारा से डी-सील किया गया। दिलचस्प तथ्य है कि जिन 4 बिल्डिंगों के मालिकों को नगर परिषद अधिकारियों ने यह छूट प्रदान की है, उनमें से एक पर तो खुद परिषद के अधिकारी नगर परिषद की सरकारी जमीन में से 180 स्कवायर फिट भूमि का इस निर्माण के दौरान अतिक्रमण किए जाने का आरोप लगा चुके हैं।नियमों को अपने अनुसार ढालकर किसी को भी लाभ पहुंचा देने में माहिर नगर परिषद के अधिकारी इसी नियम की आड़ में करीब दो साल पहले शहर में निजामपुर रोड पर एक रिसोर्ट तथा महेंद्रगढ़ रोड पर निर्माणाधीन एक मॉल को डी-सील करते हुए उन्हें नक्शा अनुसार निर्माण करने तथा नियमों के मुताबिक ही काम करने की हिदायत देते हुए छूट प्रदान कर चुके हैं, जिस समय उनकी सील हटाई गई थी, तब से लेकर अब तक उनके विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि वहां निर्माण कार्य भी चल रहा है, तथा जो आपत्तियां लगाई गई थी, वे भी बरकरार है।

ये है सील करने, खोलने के नियम

जानकारी के अनुसार नगर निगम शहर में नियम विरूद्ध हो रहे निर्माण को रोकने के लिए संबंधित भवन को सील कर देता है। इसमें सील खोलने का नियम ये है कि भवन निर्माणकर्ता को एफिडेविट देना होता है, जिसमें वो 90 दिन में अवैध निर्माण हटाने की जिम्मेदारी लेता है। यदि निर्माणकर्ता 90 दिन में निर्माण नहीं हटाता है, तो फिर निगम उसे हटा देता है।