रणघोष खास. सुभाष चौधरी
सोमवार को नगर परिषद में ईओ मनोज यादव पर हुए जान लेवा हमले ने एक साथ कई राज खोल दिए हैं। इसमें कोई शक नहीं नप में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की गंगा बहती है। एक माह पहले आए मनोज यादव ने एक ठेकेदार की पेमंट इसलिए रोक दी थी कि उसका कार्य किसी सूरत में संतोष जनक नहीं था। कायदे से ठेकेदार अगर सही होता तो वह अपने बिलों को लेकर उच्च अधिकारियों से मिलता। उसके पास कई रास्ते थे लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। सोमवार को कुछ महिलाओं एवं लोगों को लेकर नप पहुंच गया और ईओ की गाड़ी का घेराव कर हमला करने का प्रयास किया। समय रहते बचाव हो गया नहीं तो कुछ भी हो सकता था। इस घटना से यह सवाल उठता है कि एक माह पहले ज्वाइन करने वाले मनोज यादव पर हमला क्यों किया गया जबकि काम तो उनके आने से पहले हुआ है। इसका मतलब नप में इससे पहले विकास के नाम पर कमीशनबाजी, लूट खसोट एवं गोलमाल का खेल होता रहा है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष जांच होने पर दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। हालांकि जांच के नाम पर कुछ नहीं होता है। नप में जितने ठेकेदार है। शायद ही कोई होगा जिसने यहां खुलेआम भ्रष्टाचार की बहती इस गंगा में डुबकी नहीं मारी हो। लिहाजा अगर जांच हुई तो इसमें कुछ पुराने अधिकारी, कर्मचारी एवं पार्षद चपेट में आ सकते हैं। अगर पार्षद सत्ता के साथ या प्रभावशाली हुआ तो उसका कुछ नहीं होगा। अधिकारी भी ले देकर मामले को दबाने में जुट जाएंगे। कुछ दिन मीडिया में सुर्खियां बनी रहेगी उसके बाद सबकुछ भूला दिया जाएगा। यह अभी तक का नप का इतिहास रहा है जिसमें सैकड़ों घोटाले साबित हो गए मजाल किसी अधिकारी या कर्मचारी का बाल बांका हुआ हो। इसलिए यह कहना कि ईओ मनोज यादव पर हुए हमले से नप में छिपा हुआ सच सामने आ जाएगा। बहुत मुश्किल है। मनोज यादव खुद कह चुके हैं कि वे हार्ट के मरीज है। उनके साथ कुछ भी हो सकता है। बेशक मनोज यादव कुर्सी की मर्यादा से पूरी तरह से बंधे हैं लेकिन नप में विकास के नाम पर क्या क्या खेल होता है। इससे नगर पार्षद, कर्मचारी, अधिकारी से लेकर चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी भी अच्छी तरह से जानता है। ईओ मनोज यादव के साथ हुई इस घटना के बाद उनके पक्ष में सफाई कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। डीसी ने भी इस पर संज्ञान ले लिया है। नप चेयरपर्सन पूनम यादव पहले ही नप में चल रहे कामकाज को जांचने लिए एक कमेटी बना चुकी है। जिसकी अनुंशसा पर ही ठेकेदार की पेमेंट होगी। सबकुछ ईमानदारी से होगा इस पर कहना जल्दबाजी होगी। वजह नप में काम करने वाले ठेकेदारों एवं दलालों के पास सभी कर्मचारी- अधिकारियों की कुंडली है जिसमें साफ लिखा है कि किसने नप में सुबह शाम बहने वाली भ्रष्टाचार की गंगा की में हाथ धोए हैं।