प्राइवेट एंबुलेंस एवं प्राइवेट अस्पतालों के लिए प्रीपेड व्यवस्था लागू करने से कोरोना महामारी से पीड़ित मरीजों की लूट होने से बचाया जा सकता है। यह कहना है सामाजिक कार्यकर्ता कामरेड राजेंद्र सिंह एडवोकेट का। कामरेड राजेंद्र सिंह ने कहा की प्रशासन ने प्राइवेट एंबुलेंस के रेट एवं प्राइवेट अस्पतालों के इलाज के रेट तो निर्धारित कर दिए परंतु इसके बावजूद भी मरीजों के साथ बे इंसाफी की जा रही है। उनसे मनमर्जी के रुपए ऐठे जा रहे हैं। सरेआम लूट मच रही है। एक मरीज को बचाने के लिए मुंह मांगे पैसे देने के लिए विवश होना पड़ रहा है। अगर पैसे नहीं दिए जाएंगे तो इलाज नहीं होगा। सामने खड़ी मौत लूटने के लिए एक इंसान को मजबूर करती है। क्या रेट निर्धारित करने मात्र से प्रशासन का दायित्व पूरा हो जाता है? यह मामला भी सामने आया है के इलाज के लिए शिकायत करने की हिम्मत नहीं हो पाती। इसलिए प्रशासन से मांग है कि प्रीपेड सिस्टम को लागू किया जाए। मान लो जिस किसी कोविड मरीज को एंबुलेंस की जरूरत है , वह व्यक्ति प्रशासन के पास जाए और एंबुलेंस के लिए पैसा जमा कराएं। इसके बाद प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि उस मरीज को एंबुलेंस उपलब्ध कराएं और एंबुलेंस चालक को प्रीपेड किराया का भुगतान प्रशासन अपने हाथों से करें। इसी तरह की व्यवस्था प्राइवेट अस्पतालों मैं भी लागू की जाए। जिला प्रशासन तमाम प्राइवेट एंबुलेंस एवं प्राइवेट अस्पतालों को सूचीबद्ध करके इस प्रीपेड व्यवस्था को लागू किया जाए तो बेवजह लूट के रास्ते बंद हो जाएंगे और बहुत मरीजों की जान बचने की संभावना भी बन जाएगी। अगर प्रशासन इस व्यवस्था को लागू करने में पहल कदमी दिखाता है तो सामाजिक संस्थाएं, सामाजिक कार्यकर्ता सहयोग करने के लिए भी तैयार हैं।