बजरंग पूनिया लौटा रहे पद्मश्री पुरस्कार, पीएम आवास के बाहर फुटपाथ पर रखा

रणघोष अपडेट.देशभर से 

बजरंग पूनिया ने अब धमाका किया है। उन्होंने पीएम मोदी को पद्मश्री पुरस्कार लौटाने का फ़ैसला किया। पीएम के आवास पर जाने नहीं दिया गया तो उन्होंने वह पुरस्कार सड़क किनारे रख दिया। इससे पहले बजरंग पूनिया ने इसको लेकर प्रधानमंत्री मोदी को ख़त लिखा है। बृजभूषण शरण सिंह के वफादार के चुनाव जीतने के बाद साक्षी मलिक के बाद यह दूसरा धमाका है। साक्षी ने भारतीय कुश्ती महासंघ के चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह के क़रीबी संजय सिंह के जीतने से दुखी होकर कुश्ती छोड़ने की घोषणा कर दी है। बजरंग पूनिया ने ट्विटर पर पीएम मोदी के नाम लिखे ख़त को जारी किया है और कहा है कि यही मेरा बयान है। इसमें उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के लगे आरोपों से लेकर महिला पहलवानों के प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस द्वारा उनको खदेड़े जाने जैसे मामलों का ज़िक्र किया है। पीएम मोदी को संबोधित ख़त में बजरंग पूनिया ने लिखा है, ‘…जब किसी कार्यक्रम में जाते थे और मंच संचालक हमें पद्मश्री, खेलरत्न और अर्जुन अवार्डी पहलवान बताकर हमारा परिचय करवाता था तो लोग बड़े चाव से तालियाँ पीटते थे। अब कोई ऐसे बुलाएगा तो मुझे घिन्न आएगी, क्योंकि इतने सम्मान होने के बावजूद एक सम्मानित जीवन जो हर महिला पहलवान जीना चाहती है, उससे उन्हें वंचित कर दिया गया।’बजरंग पूनिया ने पीएम मोदी को महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के मामले को याद दिलाते हुए कहा है, ‘आपको पता होगा कि इसी साल जनवरी महीने में देश की महिला पहलवानों ने कुश्ती संघ पर काबिज बृजभूषण सिंह पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। जब उन महिला पहलवानों ने अपना आंदोलन शुरू किया तो मैं भी उसमें शामिल हो गया था। आंदोलित पहलवान जनवरी में अपने घर लौट गए, जब उन्हें सरकार ने ठोस कार्रवाई की बात कही। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी जब बृजभूषण पर एफ़आईआर तक नहीं की तब हम पहलवानों ने अप्रैल महीने में दोबारा सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया ताकि दिल्ली पुलिस कम से कम बृजभूषण सिंह पर एफ़आईआर दर्ज करे, लेकिन फिर बात नहीं बनी तो हमें कोर्ट में जाकर एफ़आईआर दर्ज करवानी पड़ी।’  बजरंग पूनिया ने कहा है, ‘जनवरी में शिकायतकर्ता महिला पहलवानों की गिनती 19 थी जो अप्रैल तक आते-आते 7 रह गई थी। यानी इन तीन महीनों में अपनी ताक़त के दम पर बृजभूषण सिंह ने 12 महिला पहलवानों को अपने न्याय की लड़ाई में पीछे हटा दिया।’ उन्होंने आगे कहा है कि आंदोलन 40 दिन चला और इतने दिनों में एक और महिला पहलवान पीछे हट गई।’ उन्होंने कहा,हमसब पर बहुत दबाव आ रहा था, हमारे प्रदर्शन स्थल को तहस नहस कर दिया गया, हमें दिल्ली से बाहर खदेड़ दिया गया और हमारे प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी गई। उन्होंने कहा कि हमें जब कुछ नहीं समझ आ रहा था तो हमने अपने मेडल गंगा में बहाने की सोची। उन्होंने कहा कि हमारे कोच और किसानों ने हमें ऐसा नहीं करने के लिए मना लिया। पूनिया ने ख़त में लिखा है, ‘उसी समय आपके एक ज़िम्मेदार मंत्री का फोन आया और हमें कहा गया कि हम वापस आ जाएँ, हमारे साथ न्याय होगा। इसी बीच हमारे गृहमंत्री जी से भी हमारी मुलाक़ात हुई। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे महिला पहलवानों के लिए न्याय में उनका साथ देंगे और कुश्ती फेडरेशन से बृजभूषण, उसके परिवार और उसके गुर्गों को बाहर करेंगे। हमने उनकी बात मानकर सड़कों से अपना आंदोलन ख़त्म कर दिया। कुश्ती संघ का हल सरकार कर देगी और न्याय की लड़ाई न्यायालन में लड़ी जाएगी, ये दो बातें हमें तर्कसंगत लगीं।’  उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन 21 दिसंबर को हुए कुश्ती संघ के चुनाव में बृजभूषण एक बार दोबारा काबिज हो गया है। इसने बयान दिया कि ‘दबदबा है और दबदबा रहेगा’। उन्होंने कहा कि महिला पहलवानों के यौन शोषण का आरोपी सरेआम दोबारा कुश्ती का प्रबंधन करने वाली इकाई पर अपना दबदबा होने का दावा कर रहा था। बजरंग ने कहा कि इसी मानसिक दबाव में आकर ओलंपिक पदक विजेता एकमात्र महिला पहलवान साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास ले लिया।