बरसात में नहाई पटौदी- जाटौली रैली पर रणघोष की सीधी सपाट बात

भाजपा की नाव को किनारे पर तो पहुंचा दिया, छेदों को नहीं भर पाए राव इंद्रजीत   


रणघोष खास. प्रदीप नारायण

केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के बुलावे पर होने वाले जलसे में भीड़ की मौजूदगी कोई मायने नही रखती। वजह वे आज भी दक्षिण हरियाणा में जमीनी स्तर के सबसे बड़े नेता है। 45 साल से ज्यादा की सफल राजनीति के सूत्रधार रहे हैं। ऐसे में आज भी भीड़ से उनका मूल्याकंन किया जा रहा है तो समझ जाइए मीडिया का एक तबका और राजनीति की समझ रखने वाले एक अजीब सी बीमारी से लड़ रहे हैं। सच तो यह है कि भीड़ की अपनी कोई पहचान नहीं होती है। वह किसी भी तौर तरीकों से इकठठी हो जाती है।

रविवार को हरियाणा के पटौदी विधानसभा क्षेत्र जाटौली में भाजपा मिशन 2024 होमवर्क के तहत  गुरुग्राम लोकसभा को रिचार्ज करने के लिए यह रैली हुई थी। यहां से सांसद होने के नाते कमान केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के हाथों में थी। मंच पर भाजपा प्रदेश के शीर्ष नेता मौजूद रहे ताकि हाई कमान को यह बताया जा सके कि अगले लोकसभा चुनाव में हम यहां से कितने मजबूत ओर कमजोर है। राव अपने चिर परिचित अंदाज में शब्दों का समझदारी से इस्तेमाल कर गए। रेवाड़ी जिले के गांव माजरा में प्रस्तावित एम्स के शिलान्यास को कुछ समय के लिए ओर सरका ले गए ताकि लोस चुनाव में वोटों का सफल ऑप्रेशन किया जा सके। रैली में  पीएम मोदी सरकार के 9 साल के कार्यकाल में उपलब्धियों की जमकर बरसात हुईं। एकाएक समझ में नहीं आया कि पंडाल के बाहर आसमान से हो रही बारिश और मंच पर भाजपा नेताओं की जुबान से बह रही विकास की गंगा में आखिर गीला और पानी पानी किसने किया। राव ने कहा कि केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार ने पिछले 9 सालों में दक्षिण हरियाणा में विकास के नाम पर होते रहे भेदभाव के दाग को धोने का काम किया है। यहां राव अपने विरोधियों को हमला करने का मौका दे गए। वे लगातार चौथी बार यहां से सांसद है। जिसमें 2014 से पहले की दो योजनाओं में वे कांग्रेस की यूपीए सरकार में बतौर केंद्रीय राज्य मंत्री के पद पर रहे। ऐसे में आने वाले दिनों में उन पर जवाबी हमला होना स्वाभाविक है कि जब भेदभाव हो रहा था वे सत्ता में रहकर क्या कर रहे थे।  हालांकि इस हमले का कोई नुकसान राव इंद्रजीत को होने वाला नहीं है। पहले भी विरोधी इसी मसले पर हमला कर थक चुके हैं। राव की राजनीति में एक गजब का तड़का होता है वे माहौल व मौका देखकर सत्ता में रहते हुए भी अपनी ही सरकार पर हमला कर बैठते हैं जिससे उनके राजनीति दुश्मनों की रणनीति धाराशाही हो जाती है। इसलिए आज भी दक्षिण हरियाणा में उनके कद का जमीनी नेता ढंग से खड़ा नहीं हो पाया है। यह बात अलग है कि दिल्ली व चंडीगढ़ से चलने वाली लहर में तैरता हुआ कोई नेता राव को कुछ समय के लिए परेशान करने में कामयाब हो जाए लेकिन उसकी उम्र पानी के बबुले जितनी रही। इस बार राव जरूर भाजपा में अलग अलग कारणों से खुलकर अपने अंदाज में नहीं आ पा रहे हैं। वजह  भी साफ है बेटी आरती राव को तौर तरीको के साथ 2024 में छोटी- बड़ी सरकार के होने वाले चुनाव में स्थापित करने का संघर्ष। चुनाव में एक साल का समय बचा है। भाजपा ने  देश में चारों तरफ अभी से  जीत का जाल बिछाना शुरू कर दिया है। पीएम मोदी लगातार तीसरी बार भी चेहरा होंगे। जाहिर है पार्टी की टिकट से ही राव की हार जीत की राह तय होगी। हरियाणा विधानसभा चुनाव में हालात एकदम अलग है। यहां राव की अनदेखी भाजपा को भारी पड़ सकती है ऐसे में आरती राव को पारिवारवाद के फार्मूले में फंसाना आसान नहीं होगा। पिछले दिनों हुए कर्नाटक चुनाव में भाजपा हाईकमान जीत के लिए जमीनी स्तर के दिग्गज नेताओं के सामने पारिवाद की राजनीति के अपने वसूलों को गिरवी रख चुकी है। बरसात में नहाई जाटौली रैली से राव भाजपा की नाव में बैठकर किनारे पर जरूर पहुंच गए लेकिन इस नाव में उन छेदों को नहीं भर पाए हैं जो पार्टी में  उनके विरोधियों ने मौका लगते ही  जगह जगह कर दिए हैं। कुल मिलाकर यह रैली राव को कुछ समय के लिए संतुष्ट तो कर गईं लेकिन बैचेनी को भी साथ छोड़ गईं जो आने वाले दिनों में जगह जगह टिकट की शक्ल में नजर आएगी।