युवा किसान दिवस के मौके पर कितलाना टोल पर किसान धरने के समर्थन में फिर पहुंचे सांसद दीपेंद्र हुड्डा
खड़ी फसल को नष्ट न करें किसान, सरकार किसानों के दर्द को समझे
रणघोष अपडेट. चरखी दादरी
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर कृषि कानूनों के विरोध में कितलाना टोल प्लाज़ा पर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने पर आज फिर पहुंचे युवा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि सरकार ने किसानों को दबाने और बांटने के बहुत से षड्यंत्र रचे लेकिन किसान 3 महीने से 230 किसानों की शहादत के बावजूद शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन जारी रखें हैं। इससे सरकार की नैतिक हार हो चुकी है और किसानों की जीत तय है। उन्होंने कहा कि बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने संसद में किसानों की शहादत पर मौन तक रखना मुनासिब नहीं समझा। उन्होंने कहा कि पिछले चुनाव में भाजपा ने किसानों की आमदनी दोगुनी करने का वायदा करके वोट बटोरा था, सत्ता में आते ही खर्चा दोगुना कर दिया और आमदनी आधी कर दी। सरकार ने खाद के कट्टे का वेट घटा दिया, रेट बढ़ा दिया। खाद का जो कट्टा 800 रुपये का था वो बढ़कर 1400 का हो गया और वजन भी 5 किलो कम कर दिया गया है। इसी तरह डीजल-पेट्रोल के दाम रोज़ तेज़ी से बढ़ रहे हैं। 70 साल में डीजल-पेट्रोल सबसे ज्यादा महंगा भाजपा राज में बिक रहा है। पेट्रोल-ड़ीजल पर इतना ज्यादा टैक्स कभी नहीं लिया गया जितना ये सरकार वसूल रही है। कांग्रेस सरकार के दौरान खाद, बीज और ट्रैक्टर आदि कृषि उपकरणों पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगता था। लेकिन, आज हर चीज पर टैक्स पर टैक्स वसूला जा रहा है। इसके विपरीत किसान का जो धान कांग्रेस राज में 5000 प्रति क्विंटल की भाव से बिकता था वो आज 2500 से भी कम यानी आधी कीमत में भी नहीं बिक रहा। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि आज युवा किसान दिवस मनाया जा रहा है और किसान आन्दोलन में युवा अन्नदाता की भागीदारी अहम है। तीन महीने से भी ज्यादा समय से शांतिपूर्ण ढंग से आन्दोलनरत किसानों के हौसले को सलाम करते हुए कहा कि आज़ादी के बाद देश में इतना बड़ा आंदोलन नहीं हुआ। वो किसान के युवा बेटे और एक युवा सांसद होने के नाते भी इस लड़ाई को सड़क से संसद तक पूरी ताकत से लड़ते रहेंगे। उन्होंने देश भर के युवाओं का आवाहन किया कि किसान के हक की इस लड़ाई में कंधे से कन्धा मिलाकर मजबूती से साथ दें। प्रदेश के साथ ही देश में बढ़ती बेरोज़गारी और मंदी पर सांसद दीपेन्द्र ने कहा कि अर्थव्यवस्था में लगातार मंदी के चलते 2013 के मुकाबले आज देश की बेरोजगारी दर दोगुने स्तर पर पहुंच चुकी है। हरियाणा में तो देश की सबसे ज्यादा बेरोज़गारी दर छाई है। अर्थव्यवस्था पटरी लाने से ही निजी क्षेत्र में रोज़गार की आशा जगेगी। सरकारी क्षेत्र में लम्बित भर्तियों के लिये सरकार नौकरी का इम्तिहान ले,युवाओं के सब्र का नहीं। उन्होंने आगे कहा कि आज मंडियों में किसान की उपज को न्यूनतम भाव तक नहीं मिल रहा है और सरकार के असंवेदनशील रवैये के कारण किसान अपने खेत में फसल नष्ट करने जैसा कदम उठाने को मजबूर हैं। सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने सभी किसानों से अपील करी कि वे खड़ी फसल को नष्ट न करें और सरकार को चेताया कि किसानों के दर्द को समझे, अगर अन्नदाता ने फसल उगाना बंद कर दिया तो लोग खाने के लिये दाने-दाने को मोहताज हो जायेंगे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के किसानों को याद है कि हुड्डा सरकार के समय धान का रेट एमएसपी के पार 5000 रुपये तक मिलता था। पोपुलर भी 1250 रुपये के रेट पर ख़रीदा जाता था और पोपुलर के पत्ते तक का बढ़िया भाव मिलता था। कपास और गन्ने का रेट देश में सबसे ज़्यादा था। लेकिन बीजेपी सरकार आने के बाद साढ़े 6 साल में गन्ने के रेट में बमुश्किल 40 रुपये ही इज़ाफ़ा हुआ है। जबकि, कांग्रेस सरकार ने गन्ने के रेट में रिकॉर्डतोड़ 193 रुपये की बढ़ोत्तरी करते हुए उसे 117 से बढ़ाकर 310 रुपये तक पहुंचाया था। साथ ही समय से भुगतान भी सुनिश्चित कराया, सरकार छोड़ते समय 2014 में गन्ना मिलों पर किसानों का एक पैसा बकाया नहीं था। सांसद दीपेंद्र ने किसानों को यह भी बताया कि पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार ने हरियाणा में कर्ज न चुका पाने वाले किसान की गिरफ्तारी और जमीन की नीलामी वाले काले कानूनों को समाप्त किया।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि आजादी के बाद के इतिहास में किसान का ऐसा उत्पीड़न कभी नहीं हुआ, जितना भाजपा सरकार में हो रहा है। तीन महीने से किसान यातनाएं सह रहे हैं। बिजली, पानी, शौचालय की व्यवस्था बंद कर दी गयी। तमाम यातनाएं सहने, दुष्प्रचार झेलने और जान की कुर्बानी देने के बावजूद देश के किसान विचलित नहीं हुए। करीब 230 किसानों ने अपनी जान कुर्बान कर दी है लेकिन इस बेरहम सरकार का दिल नहीं पिघला। अहंकार में डूबे सत्ता पक्ष ने किसानों की कुर्बानी की खिल्ली उड़ायी, जो समय आने पर भाजपा को बहुत भारी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में दी गई जान की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जायेगी, आने वाली पीढ़ियां इसे याद रखेंगी और गर्व करेंगी। उन्होंने कहा कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने किसानों के आंसू पोंछने का काम किया है। उन्होंने आंदोलन में शहादत देने वाले सभी किसानों के परिवार को स्वयं दो दो लाख रुपए देने के साथ सरकार आने पर सभी पीड़ित परिवारों में से एक को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। कितलाना टोल पर धरने केवल 64वें दिन युवा किसान दिवस के मौके पर राजू मान, संदीप शर्मा, हितेश ताखर, अनिल शेषमा, मुकेश पहाड़ी, मास्टर ताराचंद, नीटू गौरीपुर, देशमुख दादरवाल, दलबीर फतेहगढ़, जगदीश हुई, दुष्यंत कलकल, रोहताश चौहान ने संयुक्त रूप से अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि युवाओं ने मोर्चा संभाल लिया है और तीन कानून रद्द करवाने के लिए हर संघर्ष करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी बढ़ती जा रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार झूठे आंकड़े पेश कर रहे हैं। लेकिन अब युवा उनके बहकावे में आने वाले नहीं हैं। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश, रणबीर सिंह महेंद्रा, सोमबीर सिंह, ठाकुर लाल सिंह, राजू मान, सुरेंद्र मेहड़ा, धर्मेन्द्र छपार, कमल प्रधान, रवि आजाद, अनिल धनखड़, अमन डालावास, धीरज सिंह, प्रदीप गुलिया, सुमित, बलजीत फोगाट, बलवंत प्रधान, बिजेंद्र बेरला, नरसिंह सांगवान, जोरावर सिंह, कालू फौगाट, कृष्णा सांगवान, बीरमति डोहकी, विनोद गिल, क्रांति, सत्यवान बलियाली, अधिवक्ता बिजेंद्र पंघाल, गिरेन्द्र फौगाट, अजय छिकारा समेत अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।