बेहतर इंसान की छवि ने नवल किशोर गुप्ता को जीत का सम्मान दिया
– इस शख्स को समाज एक बड़े तबके ने बेहतर इंसान होने का सम्मान दिया तो दूसरी तरफ अपने निजी एजेंडे को पूरा करने व रिश्तेदारी का हवाला देकर समाज की प्राथमिकता को दरकिनार कर भीतरघात से कमजोर करने वालों का चेहरा भी सामने आया। देखा जाए तो ऐसा तबका किसी भी समाज की उन्नति व बेहतरी के लिए सबसे घातक है।
रणघोष खास. रेवाड़ी
वैश्य समाज के महत्वपूर्ण घटक महावर सभा के इतिहास में पहली बार हुए चुनाव में 72 साल के नवल किशोर गुप्ता अनाज मंडी वाले की जीत ने समाज की असली तस्वीर सामने ला दी। इस चुनाव की खास बात यह रही कि समाज की डाटा बिरादरी ने अलग मकसद- विजन से अपनी एकजुटता को कायम रखा लेकिन वे नवल किशोर गुप्ता की जीत को नहीं रोक पाए। इसी वजह से चुनाव में भीतरघात भी हुआ जिसके कारण अलग अलग पदों पर खड़े उम्मीदवारों की जीत का अंतर काफी कम ज्यादा रहा। नवल किशोर गुप्ता ग्रुप से उपप्रधान पद से खड़े विनोद डाटा को दोनों तरफ से वोट मिले ओर वे सबसे ज्यादा मतों से विजयी हुए।
यह चुनाव कई मायनों में खास रहा। पहला नवल किशोर गुप्ता की छवि का असर इतना जबरदस्त असर रहा की जिसकी बदौलत उनका पूरा ग्रुप भी जीत में तैर गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि समाज के लगभग शत प्रतिशत लोग नवल किशोर को सबसे बेहतर छवि, उदार व्यवहार एवं मधुर स्वभाव वाला उम्मीदवार मानकर जमकर तारीफ कर रहे थे। यहां तक की उनके विरोधी भी उनका बेहद सम्मान करने में पीछे नहीं थे। यही वजह थी कि शुरूआत से ही नवल किशोर गुप्ता की जीत को लेकर किसी को कोई संशय नहीं था। उनके खिलाफ युवा चेहरा बनकर मैदान में उतरे नरेंद्र गुप्ता की टीम ने काफी मेहनत की। इस चुनाव में एक ऐसा तबका भी सक्रिय रहा जिसने अपने निजी एजेंडे को पूरा करने व रिश्तेदारी का हवाला देकर समाज की प्राथमिकता को दरकिनार कर भीतरघात कर समाज के विजन को कमजोर करने का काम किया। देखा जाए तो ऐसा तबका किसी भी समाज की उन्नति व बेहतरी के लिए सबसे घातक है। चुनाव में एक दूसरे के खिलाफ खड़े होकर वोट मांगना लोकतंत्र का उत्सव होता है। ऐसे में हार- जीत के बाद भी प्रत्याशी एक दूसरे का सम्मान इसलिए करते हैं कि वे एक विजन के साथ स्पष्ट तौर से एक दूसरे के सामने होते हैं। सबसे घातक वे थे जिनका सामाजिक तौर पर कोई एजेंडा ही नहीं था।
सेक्टर चार- भवन को मिलेगा अब अपना असली चेहरा
सेक्टर चार स्थित भवन के बंद पड़े निर्माण कार्य के अब जल्द ही शुरू होने की उम्मीद बन गई है। पिछले छह सालों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष तौर पर प्रधान रहे घनश्याम डाटा के कमजोर नेतृत्व की वजह से तीन सालों से अधिक समय से भवन का निर्माण कार्य बंद पड़ा हुआ था।
करोड़ों का हो चुका समाज का नुकसान
बिना किसी वजह से भवन के कार्य को तीन साल से अधिक समय तक बंद रखा गया। फर्म एंड सोसायटी के रिकार्ड को पूरी तरह से दुरुस्त नहीं किया गया। भवन निर्माण को लेकर चंदे के तौर पर जमा हुई राशि का कोई ब्यौरा सामाजिक तौर पर भाईचारा बिरादरी के सामने भी नहीं रखा गया। नतीजा समाज के दानवीरों का भी मोहभंग होता चला गया। सबसे बड़ी बात इन सालों में तेजी से बढ़ती महंगाई के चलते निर्माण सामग्री के मूल्यों में जबरदस्त उछाल आने से लागत तीन- चार सालों में डबल के आस पास पहुंच गईं। कायदे से इस भवन को तीन साल पहले ही बन जाना चाहिए था। ऐसा नहीं होने पर इस भवन से होने वाली कई लाखों रुपए की आय भी खत्म हो गईं। कुल मिलाकर महज अनुभवहीनता, कमजोर नेतृत्व एवं आपसी गुटबाजी के चलते करोड़ों रुपए का नुकसान समाज को उटाना पड़ा।
नई टीम को चार्ज मिलने पर सामने आएगा असल सच
फर्म एंड सोसायटी विभाग द्वारा यह चुनाव कराया गया था। लिहाजा अब नियमानुसार विभाग की तरफ से नई टीम को चार्ज दिलाया जाएगा। पूरी तरह से चार्ज मिलने के बाद ही सच सामने आएगा कि किस कारणों से निर्माण कार्य बंद रहा और निर्माण कार्यो में कितनी पारदर्शिता एवं ईमानदारी बरती गईं।
