पढ़ाई के तनाव में खुद को मार रहे बच्चों की इस चित्कार को आत्मसात किजिए
घर वालों की उम्मीदें, बाहर वालों के ताने, हॉस्टल्स की दादागिरी, शहर में लूट
रणघोष खास. देशभर से
देशभर के सबसे टॉप क्लास स्टूडेंट, जिनका सपना डॉक्टर और इंजीनियर बनना है, वो सुसाइड क्यों करते हैं? । पिछले सोमवार कोटा में महज 12 घंटे में हुई सुसाइड की तीन घटनाओं पर दैनिक भास्कर की टीम ने जो रिपोर्ट तैयार की है उसे प्रत्येक नागरिक को आत्मसात करना चाहिए। पढ़िए रिपोर्ट के कुछ अंश…
घर वालों की उम्मीदें और बाहर वालों के ताने
· रिश्तेदार जब भी मिलते हैं, यही सवाल करते हैं कि अब तक सिलेक्शन नहीं हुआ? बार-बार यही सुनना डिप्रेस करता है। गांव वाले ताने मारते हैं।
· कोचिंग की फीस बहुत ज्यादा हैं, ये डर रहता है कि अगर सिलेक्शन नहीं हुआ तो घर वाले सोचेंगे उससे ज्यादा तो पड़ोसी क्या बोलेंगे? अगर नंबर कम आते हैं तो उससे डिप्रेशन अपने आप होगा।
· घर की पारिवारिक कलह, घर वालों का प्यार से बात नहीं करना और पढाई का पूरा दबाव देना सबसे ज्यादा तनाव देता है। घरवालों को समझाने के बावजूद भी ये कंटिन्यू है। इससे मैं पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पाता।
· मैं बिहार से कोटा आया हूं। मेरा ये थर्ड ड्रॉप है। घर वालों का पूरा सपोर्ट है, लेकिन उम्मीदें बहुत हैं। क्योंकि मेरे बहुत से दोस्त और फैमिली मेंबर्स मेडिकल कॉलेज में हैं। मेरे पास भी मेडिकल कॉलेज के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है। मेहनत तो पूरी करता हूं, क्लास में भी परफॉर्मेंस अच्छी (लगभग) रहती है। मगर खुद पर कभी-कभी शक होता है…ख्याल आता है अगर इस बार सिलेक्शन नहीं हुआ तो क्या करेगा?
· ये सब बातें मैं घर में नहीं बता सकता, बहुत संघर्ष के बाद पिता जी ने कोटा भेजा है। मैं अपने दोस्तों से भी बात नहीं करता। ये बताते हुए शर्म आती है कि तीन साल से ड्रॉपर हूं….सुसाइड तो नहीं करूंगा लेकिन फ्रस्टेशन खत्म नहीं हो पाती…..
‘गलती कर दी ये सब्जेक्ट लेकर’
· मैंने घरवालों के दबाव में मेरा फेवरेट सब्जेक्ट नहीं ले पाया, जिसके कारण अब पढ़ाई में मन नहीं लग रहा।
· मुझे हाईस्कूल में आर्ट्स लेना था और UPSC की तैयारी करनी थी। लेकिन मेरा फैमिली बैकग्राउंड मेडिकल है, जिससे मुझे NEET की तैयारी करने के लिए फोर्स किया गया। घर वालों ने एक भी नहीं सुनी क्योंकि मेरे घरवाले कोचिंग के एड देखते और दूसरों के बच्चे से कंपेयर करते थे, जिससे मुझे अभी नीट की तैयारी करनी पड़ रही है। कोचिंग में तो पूरा प्रेशर रहता है। इंसान नहीं मशीन की तरह ट्रीट करते हैं।
· 2 साल से NEET की तैयारी कर रहा हूं…मैंने अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती की साइंस सब्जेक्ट चुनकर। ये विषय मुझे कभी समझ में नहीं आया। लेकिन 10th के बाद तब ये बाते समझ नहीं आती थी कि भविष्य पर क्या असर पड़ेगा। अब कुछ नहीं हो सकता। अब मेरी हालत ऐसी है कि मेरा करियर बर्बाद हो चुका है। अब जीवन में कुछ अच्छा नहीं लगता। पूरी तरह से हार चुका हूं।
कोचिंग इंस्टिट्यूट का फोकस केवल टॉपर्स पर
कोटा के जितने भी कोचिंग इंस्टिट्यूट हैं, वहां 200 स्टूडेंट्स का बैच रहता है। जिससे सभी बच्चों का टीचर्स से इंटरेक्शन बिल्कुल नहीं हो पाता। स्टूडेंट इतने लोगों में डाउट पूछने में घबराते हैं। बड़ी-बड़ी क्लासेज होने से टीचर्स आखिरी कोने में बैठे स्टूडेंट्स तक नहीं पहुंच पाते। अगर यही बैच 30 से 40 स्टूडेंट का हो तो ज्यादा बेहतर होगा। हर महीने में टीचर्स और पेरेंट की मीटिंग होनी चाहिए, ताकि मेरे जैसे स्टूडेंट्स की एकेडमिक परफॉर्मेंस का पर्सनली एनालिसिस भी सके। 200 बच्चों के एक क्लासरूम में टीचर्स को सभी को समझना चाहिए। केवल टॉपर्स पर ध्यान देते हैं।
हॉस्टल्स की दादागिरी, शहर में लूट
· हॉस्टल में जितने पैसे देते हैं। उसके अनुकूल खाना भी नहीं मिलता है। हर समय खाने को लेकर हॉस्टल वाले डरा धमका कर रखते हैं।
· पैसे कमाने के चक्कर में मैंने ऑनलाइन गेम में पैसे लगाने शुरू कर दिए। जीतने के चक्कर में लॉस होता चला गया। मैंने एक दिन में 5000 रुपए का लॉस कर दिया। पापा पैसे देते थे फीस के लिए और मैं गेम में डाल देता था। पापा को भी नहीं बताया है। अब मैंने पूरी तरह से गेम छोड़ दिया है पर लॉस हुए पैसे वापस कैसे लाऊं समझ नहीं आ रहा। मैं बहुत परेशान हूं क्या करूं।
· बिहार से कोटा में स्टडी करने वाली एक 17 साल की स्टूडेंट ने लिखा है कि शहर में कोचिंग, हॉस्टल और दुकानदार लूट मचा कर रखी है। इस शहर में हर चीज में व्यवसाय है। सबसे ज्यादा हॉस्टल वाले शोषण करते हैं। कोचिंग वाले टेस्ट पर टेस्ट लेते हैं जो तनाव का मुख्य कारण है। पढ़ाई के बारे में सही से गाइड नहीं करते।
· कोटा में किसी भी चीज का रेट फिक्स नहीं है। स्टूडेंट्स से मुंह मांगी कीमत वसूली जाती है। बाहर से आने वाले स्टूडेंट्स को लूटा जाता है।