रणघोष खास. सुभाष चौधरी
अहीरवाल के प्रथम विधायक राव अभय सिंह की 100 वीं जंयती पर शुक्रवार को उनकी पारिवारिक- सामाजिक- राजनीतिक यात्रा को सांझा किया गया। साथ ही उनके जीवन पर आधारित राव अभय सिंह गरीबों के हमदर्द पुस्तक का विमोचन भी हुआ। वह सबकुछ करने का प्रयास किया गया जो राजनीतिक परिवारों की परंपरा में आता है। पूरी जिम्मेदारी स्व. राव अभय सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे रेवाड़ी विधानसभा से लगातार छह बार विधायक, कांग्रेस की भजनलाल- भूपेंद्र सिंह हुउडा की सरकार में मंत्री रहे पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव एवं उनके बेटे वर्तमान विधायक चिरंजीव राव ने संभाल रखी थी।
केएलपी कॉलेज के सभागार में इस अवसर पर शानदार आयोजन हुआ जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडडा, प्रदेश अध्यक्ष उदयभान समेत अनेक पार्टी के नेताओं ने शिरकत की। कप्तान अजय सिंह ने बताया कि कैसे उनके पिता ने राजनीति में सादगी, ईमानदारी एवं मूल्यों को कमजोर नहीं होने दिया। जब वे विधायक बने तो वेतन के नाम पर एक रुपया लेते थे। जब तक राजनीति व सामाजिक जीवन में रहे साधारण परिवेश में जीवन व्यतीत किया। कप्तान अजय सिंह हर साल पिता की पुण्य एवं जंयती पर आयोजित कार्यक्रमों में हमेशा उनके एक रुपए वेतन लेने का जिक्र करना नहीं भूलते। अब यहां अकारण ही सवाल उठता है कि जब उनके पिता ने राजनीति में एक रुपया वेतन लेने की एक आदर्श और प्रेरणादायक परंपरा को शुरू किया तो उसे कप्तान अजय सिंह एवं उनके बेटे चिरंजीव राव ने विधायक बनने के बाद इस परंपरा को क्यों नहीं अपनाया। कप्तान लगातार छह बार विधायक होने के साथ साथ दो सरकारों में कैबिनेट मंत्री तक रह चुके हैं। जब पिता की इस अनूठी मिशाल को बार बार याद कर गर्व की अनुभूति होती है तो उसे खुद पर अमल करने में कप्तान को कहां दिक्कत आ रही है। उन्होंने विधायक व मंत्री रहते हुए अपना वेतन एक रुपया क्यों नहीं लिया। राव अभय सिंह के समय की राजनीति में तो नेताओं को आर्थिक संघर्ष घेरे रहता था। उस समय के नेताओं को वेतन व भत्ता भी सामान्य मिलता था। मौजूदा राजनीति ने तो सबकुछ बदलकर रख दिया है। मैदान में अधिकांश ही वहीं नजर आते हैं जो पूरी तरह मनी एंड मसल पॉवर से लैस हो। वर्तमान में कप्तान परिवार विशेष तौर से 10 साल की भूपेंद्र हुडडा सरकार में सत्ता में रहते हुए कम से कम आर्थिक सूखाग्रस्त की चपेट से बाहर आकर शिक्षा व अन्य व्यवसायिक क्षेत्रों में अपने बिजनेस को मजबूत आधार व दिशा दे चुका है। यह परिवार उन राजनीतिक परिवारों की सूची में आ चुका है जिसके लिए राजनीति में आर्थिक चुनौतियां कोई मायने नहीं रखती। इसलिए कप्तान विपक्ष में रहते हुए मौजूदा सरकारों एवं अपने विरोधियों पर सीधा हमला करने में पीछे नहीं रहते। कुल मिलाकर अगर कप्तान अपने पिता की 100 वीं जंयती पर उनके बनाए रास्ते पर चलकर भविष्य में अपनी व अपने बेटे विधायक चिरंजीव राव मिलने वाली पेंशन व वेतन एक रुपए लेने का एलान कर देते तो यह राव अभय सिंह की आदर्श राजनीति में मूल्यों को बनाए रखने की सच्ची श्रद्धाजंलि होती।