हमें माफ करना किरण यह समाज तुम्हारे लायक नहीं था, रेवाड़ी मैली हो गईं..
– इस मृतका का कसूर सिर्फ इतना था कि उसकी 2 साल की मासूम बेटी को उसके नि:संतान जेठ ने जबरस्ती अपने पास रखा हुआ था। मां को बेटी से नहीं मिलने दिया जा रहा था। जब भी वह इसके लिए चिल्लाती, उसका पति उसे जानवरों की तरह मारना शुरू कर देता। उसकी बड़ी बहन हर रोज उसे भयंकर मार से खत्म होते देख रही थी।
रणघोष खास. रेवाड़ी
कहने को रेवाड़ी के घरों में सफाई करने वाली किरण की हत्या पुलिस के लिए एक एफआईआर है। मीडिया के लिए खबर और राजनीति करने वालों के लिए मुद्दा। हम आपको जो बताने जा रहे हैं वह घटना का हिस्सा तो है लेकिन इंसानी जमात के लिए डूब मरने वाली शर्मसार- कलंकित एवं रेवाड़ी की जमीन को मैला करने वाली वह वारदात है जिसने सरेआम मानवता- इंसानियत को जिंदा जला दिया। इस घटना के पीछे छिपा सच आसानी से सामने नहीं आएगा वजह किरण की हत्या में गरीबी- बेबसी का आलम है जो मौजूदा सिस्टम की खुराक को पूरा नहीं कर सकता। इसलिए 16 अप्रैल की घटना पर पुलिस ने 21 अप्रैल को मामला दर्ज किया। मृतका के परिजन पुलिस थाना के सामने फुटपाथ पर सोकर न्याय के लिए संघर्ष करते रहे। घटना का पता चलते ही मध्यप्रदेश के दमोह जिला से परिवार के 10 सदस्य अपने छोटे बच्चों के साथ अगले दिन रेवाड़ी पहुंच गए थे। पेट भरने व रहने के लिए उनके पास जमा छोटी सी राशि खत्म हो चुकी थी। लिहाजा महिलाएं पुलिस थाना के सामने बैठी रहती और पुरुष सुबह मजदूरी पर निकल शाम को थाना पहुंच जाते। घटना को 9 दिन बीत चुके हैं पुलिस अभी तक एफआईआर दर्ज करने के अलावा कुछ नहीं कर पाई है और ना ही उससे उम्मीद की जा रही है कि इस घटना में पीड़ितों को न्याय दिला पाएगी।
आइए इस घटनाक्रम को उनके परिजनों के हवाले से समझे
मध्य प्रदेश के जिला दमोह की रहने वाली 23 साल की किरण के बड़े भाई टीकाराम के अनुसार चार साल पहले उसकी शादी जीतू उर्फ जितेंद्र दमोह जिला के रहने वाले के साथ हुई थी। जीतू का परिवार कई सालों से रेवाड़ी में पीवरा की ढाणी में रह रहा था। एक भाई पांच बहनों में सबसे छोटी किरण जब 10 साल की थी उसकी मां सुहागरानी चल बसी थी। उसकी बड़ी बहन की शादी भी उसके पति के बड़े भाई के साथ हुई थी। दोनों साथ साथ रहती थी। किरण को जब दूसरी संतान बेटी के रूप में हुई तो एमपी में रहने वाले उसके जेठ ने उसकी पहली बेटी अमृता को उससे जबरदस्ती छिन कर अपने पास रख लिया।उसके कोई संतान नहीं थी। किरण अपने कलेजे के टुकड़े को अलग होने की पीड़ा को बर्दास्त नहीं कर पा रही थी। वह सभी के आगे हाथ जोड़कर उसे वापस करने की गुहार लगाती रही लेकिन किसी ने नहीं सुनी। उधर उसका पति जीतू काम करने की बजाय किरण को ही घरों में सफाई करने के लिए भेज देता था। किरण की बड़ी बहन राधिका ने बताया कि वह उसके सामने वाले कमरे में रहती थी। वह छोटी छोटी बातों पर उसे बेरहमी से पीटता था जब वह उसे बचाने के लिए आती तो उसे भी परिवार के लोग पीटने लग जाते थे। एक जानवर से भी बदतर व्यवहार उसके साथ हो रहा था। परिवारवालों को पता चला तो वे अपनी बहन को वापस ले आए लेकिन बाद में गलती मानकर ऐसा नहीं करने का भरोसा देकर उसका पति किरण को वापस ले आया। 15 अप्रैल की रात को उसका पति किरण को रातभर पीटता रहा। सुबह उसने दम तोड़ दिया। राधिका ने बताया कि उसने पूरा मामला मोबाइल से अपने भाई को बता दिया बाद से उसे भी पीटा गया। बिना पोस्टमार्टम किए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। सबसे ज्यादा सदमा उस समय लगा जब पुलिस में शिकायत दर्ज करने के बाद भी उन पर समझौता करने का दबाव बनाया गया। एक ठेकेदार ओर एक वकील ने हत्यारों को बचाने के लिए साम दंड भेद से अपना पूरा खेल खेला लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी। कुछ लोगों ने हमारी मदद की ओर एसपी तक शिकायत पहुंचाईं तो किसी तरह मामला दर्ज हुआ। इन पीड़ित परिजनों का कहना है कि जब तक उनकी बहन के हत्यारों को जेल के पीछे नहीं भेजेंगे वे मरते दम तक संघर्ष करते रहेंगे। अब स्थिति यह है कि इन परिवारों में पुरुष पेट भरने के लिए मजदूरी पर निकलते हैं और महिलाएं पुलिस कार्रवाई के लिए थानों के चक्कर लगा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मृतका किरण की बड़ी बहन राधिका के सामने उसकी बहन को सरेआम मार दिया गया वह प्रत्यक्ष प्रमाण है। पुलिस क्या सोचकर गिरफ्तारी नहीं कर रही है और किसका इंतजार कर रही है जबकि मामला दर्ज होने के बाद आरोपी अपने घरों में आराम कर रहे हैं।