सोचिए डीटीपी ईमानदार होती तो क्या जेसीबी की जरूरत पड़ती.. जिसकी लाठी उसकी भैस
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
नगर योजनाकार यानि डीटीपी जब भी कंट्रोल एरिया में अवैध निर्माण व कब्जे को लेकर एक्शन में आती है। उसकी नीयत और मकसद पर सवाल खड़े हो जाते हैं। यह महकमा भ्रष्टाचार की दलदल में इतना धंस चुका है कि इसकी सही कार्रवाई पर भी शक जन्म ले लेता है। सोचिए अगर डीटीपी विभाग इतना ही ईमानदार होता तो क्या जेसीबी की जरूरत पड़ती। डीटीपी को घर बनने के बाद ही अवैध नजर क्यों आते हैं। कमाल की बात यह है कि डीटीपी कार्यालय जहां खुला हैं उसके चारों तरफ चार किमी के दायरे में ही अवैध निर्माण हो रहा है। वह आंखें मूंदे रहती हैं। उसे 15-20 किमी दूर हो रही अवैध प्लाटिंग नजर आ जाता है। उसकी वजह भी साफ है। चारों तरफ जमीन के सौदागारों की मंडी अलग अलग चेहरों में प्लाटिंग करती हुई नजर आती है। जब भी कोई डीटीपी अधिकारी आता है। उसकी इस मंडी में बोली लगनी शुरू हो जाती है। जो इन्हें खरीदने में कामयाब हो जाता है वह डीटीपी के अधिकारी वह कर्मचारियों को काला चश्मा पहना देता है। उस चश्में में उसे वहीं नजर आता है जो जमीनी माफिया दिखाना चाहते हैं। बावल में नगर परिषद चेयरमैन एडवोकेट बीरेंद्र महलावत की जमीन की चार दीवारी को अवैध बताकर डीटीपी ने जो कार्रवाई की वह समझ में आता है लेकिन जिस इरादे से की उसे समझना बहुत जरूरी है। सोचिए अगर नपा चेयरमैन सत्ता पार्टी से संबंध रखता तो क्या डीटीपी इतनी ईमानदारी दिखाती। शायद मौजूदा हालात में बिल्कुल नहीं। बावल में डीटीपी की इस कार्रवाई में नपा चेयरमैन हर लिहाज से मजबूत थे इसलिए अधिकारी बैकफुट पर आ गए। यही कार्रवाई सामान्य लोगों के खिलाफ होती तो शायद अभी तक डीटीपी की टीम व पुलिस उनके खिलाफ अलग अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज कर इतरा रही होते। जहां तक चेयरमैन का राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. बनवारीलाल पर कार्रवाई कराने का आरोप है उसे बिना सबूत सही मान लेना हरगिज सही नहीं है। ऐसे में चेयरमैन वीरेंद्र महलावत को चाहिए कि वे डॉ. बनवारीलाल पर हमला करने की बजाय बावल में डीटीपी की नाक तले होते आ रहे अवैध निर्माण कार्यों की सूची तैयार कर उसे सार्वजनिक करें ताकि डीटीपी की कथनी- करनी का अंतर भी जमीन पर साफ नजर आए। नहीं तो सभी जानते हैं कि अधिकारी, नेता व तंत्र जब एक मिजाज में बोलने लग जाए तो दाल में भी कालापन अपने आप खत्म हो जाता है नहीं तो पूरी दाल भी काली बता दी जाती है।