2019 का नासमझ सुनील मुसेपुर साढ़े तीन साल में राजनीति का खिलाड़ी बन चुका है
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में रेवाड़ी विधानसभा सीट पर भाजपा की टिकट लाकर अनेक दिग्गज नेताओं की राजनीति बिगाड़ने वाले सुनील मुसेपुर महज मामूली अंतरों से मिली हार से अभी तक बहुत कुछ सबक ले चुके हैं। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी चिरंजीव राव 43817 वोट लेकर 27.82 प्रतिशत के साथ 1317 वोटों से विजयी हुए थे। मुसेपुर को 42533 वोट के साथ 26.99 प्रतिशत मतदाताओं का साथ मिला था। चुनाव में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह एवं उनकी बेटी आरती राव ने मुसेपुर के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। टिकट दिलाने की वजह से भाजपा का एक बहुत बड़ा धड़ा उनके खिलाफ खड़ा हो चुका था। इस परिणाम में हार की वजह का जब मंथन हुआ तो मुसेपुर को हराने वालों में राव खेमें के करीबियों का ज्यादा हाथ रहा जो निजी तौर पर मुसेपुर की टिकट दिए जाने पर खुश नहीं थे। विरोधी तो खुलेआम मैदान में नजर आ रहे थे। जाहिर उनसे मुकाबला करने में ज्यादा दिक्कत नहीं थी। राव एवं आरती राव भी मान चुके हैँ कि रेवाड़ी सीट भीतरघात की वजह से गई हैं। यहां चिरंजीव राव किस्मत के धनी निकले। अब 2023 चल रहा है। भाजपा के एक धड़े एवं विरोधी दलों के दावेदारों का मानना है कि सुनील मुसेपुर की राजनीति 2019 में पानी के बबुले की तरह उठी और हार के साथ ही खत्म हो चुकी है। ऐसा नहीं है। पिछले साढ़े तीन सालों में मुसेपुर ने खुद को काफी हद तक बदल लिया है। जिस मुसेपुर का 2019 के चुनाव में दूर तक टिकट की दावेदारी में जिक्र तक नहीं था। रेवाड़ी उससे पूरी तरह से परिचित नहीं था। भाजपा का वे कभी चेहरा नहीं रहे। वह बिना शोर मचाए ऐन वक्त पर टिकट लाकर पूरा गणित बिगाड़ सकता है वह मुसेपुर मिली हार के बाद चुप कैसे बैठ सकता है। इसलिए उसका कहना है कि रेवाड़ी सीट पर पहला हक उनकी बहन आरती राव का है। अगर वह सीट छोड़ती है तो वे सबसे बड़े मजबूत दावेदार है। वे हारे नहीं थे उन्हें तो अपनों ने साजिश के तहत हरवाया था। यह बात हाईकमान भी समझ चुका है। इसलिए वे पूरी तैयारी के साथ इस सीट पर अपना दावा कायम किए हुए हैं। सुनील की बातों से साफ झलकता है कि उसे राजनीति में अनाड़ी समझने वाले संभल जाए। वे पिछले साढ़े तीन सालों में राजनीति का गणित पूरी तरह से समझ चुके हैं। समय आने पर उन लोगों का भी पर्दाफाश किया जाएगा जो अपना समझकर घात लगाए बैठे थे। मुसेपुर के पास राजनीति की वह सबसे बड़ी खुराक भी मौजूद है जिसे चुनाव में सबसे जरूरी समझा जाता है। कुल मिलाकर सुनील 2024 के चुनाव में खुलकर उतरने की पूरी तैयारी में जुट चुके हैं।