रणघोष में सबसे बड़ा सवाल

क्या इस बार कामयाब हो पायेगा प्लास्टिक बैन ?


रणघोष खास. प्रेरणा भारद्वाज 

केंद्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड ने 1 जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पर सख्ती से प्रतिबन्ध लगा दिया है. बैन हुई वस्तुओं में  प्लास्टिक के इअर-बड्स, झंडे, आइस-क्रीम स्टिक, डेकोरेटिव थर्मोकोल, 100 माइक्रोन से कम के पी वी सी बैनर्स, प्लास्टिक के गिफ्ट-रैपिंग पेपर्स, प्लास्टिक के कप्स, ग्लासेज इत्यादि हैं.

क्या है सिंगल-यूज प्लास्टिक?

यह वो प्लास्टिक हैं जिनका एक बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है. इन्हें सिंगल-यूज प्लास्टिक बोलते हैं क्यूंकि ये रिसायकल नहीं किये जा सकते. इन्हें जलाया भी नहीं जा सकता क्योंकि इससे हानिकारक गैसें निकलती हैं. ये प्लास्टिक डीकम्पोज होने में 500 साल का वक़्त लेते हैं. और इसीलिए पर्यावरण के लिए काफी खतरनाक होते हैं.

किस स्तर तक जा चुका है प्लास्टिक वेस्ट का ख़तरा

यूनाइटेड नेशंस एन्वायरन्मेंट प्रोग्राम्स के मुताबिक़ दुनियाभर में आधे से अधिक प्लास्टिक को सिर्फ एक बार यूज करने के लिए बनाया जाता है. यही वजह है कि दुनिया में हर साल लगभग 30 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है. दुनिया में हर मिनट 20 लाख सिंगल यूज वाले प्लास्टिक बैग चलन में आते हैं. हर मिनट 10 लाख प्लास्टिक बोतलें खरीदी जाती हैं और इनमें से आधी से कम ही रिसायकल हो पाती हैं.  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक भारत में हर दिन 26,940 टन प्लास्टिक वेस्ट उत्पन्न होता है, जिसमें से लगभग 15000 टन ही रीसायकल हो पाता है, बाकी लगभग 10,500 टन कचरा हमारे आस-पास, गली-मोहल्ले, नदी, तालाब, कूड़े का ढेर बनकर हमारे पर्यावरण में ही बना रहता है. प्लास्टिक अलग-अलग रास्तों से होकर नदी-समुन्द्र में भी पहुँच जाता है और उन्हें प्रदूषित करता है.

क्यों हो रहा है इसका विरोध? 

प्लास्टिक स्ट्रॉ का यूज जूस और लस्सी बनाने वाली कंपनियां ज्यादा करती हैं. ऐसे ड्रिंक्स की क़रीब 60 लाख की हर साल की बिक्री है. अमूल, डाबर और पार्ले-एग्रो जैसी बड़ी कम्पनियां इस प्रतिबन्ध का विरोध कर रही हैं. कारोबारियों की संस्था कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिख कर प्रतिबन्ध लागू होने की तारीख को आगे बढाने की मांग की है. पारले-एग्रो की फ्रूटी, कोका-कोला की माजा, पेप्सी की ट्रॉपिकाना आदि सबसे ज़्यादा बिकने वाले शीतल पेय ग्राहकों को 10-30 रुपये में मिल जाती हैं. गर्मी के मौसम जब इनकी बिक्री ज्यादा होती है, उस समय प्लास्टिक से पेपर स्ट्रॉ की तरफ जाना इन उत्पादनों को कंपनी और कस्टमर्स दोनों के लिए महंगा कर देगा क्योंकि पेपर स्ट्रॉ प्लास्टिक स्ट्रॉ से 5-7 रुपये महँगी होंगी. इनके दाम बढ़ने से कंपनियों को घाटा उठाना पड़ सकता है. उनकी मांग है कि उन्हें प्लास्टिक छोड़कर  पेपर स्ट्रॉ को चलन में लाने के लिए कुछ वक़्त दिया जाये. इसके अलावा सीएआईटी ने इस प्रतिबन्ध की वजह से प्लास्टिक उत्पादन के व्यापार में में लगे लाखों के बेरोजगार हो जाने की आशंका भी जताई है.

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