रणघोष अपडेट. सिरसा से नवीन अरोड़ा की रिपोर्ट
हरियाणा की सिरसा लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी डॉ. अशोक तंवर लगातार मजबूती से उन तमाम चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जो उनके विरोधी एक साजिश के तहत पेश कर रहे हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में जहां बिना तथ्य और सच को समझे बिना कुछ भी दुष्प्रचारित करना आसान है। वही अशोक तंवर का व्यक्तित्व और उसकी जुबान से निकल रहे एक एक शब्द यह साबित करते जा रहे हैं उसका राजनीतिक जीवन पूरी तरह से संघर्ष में नहाता रहा है। वह समाज के उस अंतिम व्यक्ति की लड़ाई लड़ रहा है जिसे अभी तक राजनीति में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसलिए तंवर को राजनीति यात्रा में जहां भी बेहतर व्यवस्था की आवाज सुनाई दी वे उसी तरफ चल दिए। कमाल देखिए उनके विरोधियों से इसे पार्टी बदलना कहकर अशोक तंवर की छवि पर हमला करना शुरू कर दिया जो इस चुनाव में अभी तक जारी है। जबकि सच्चाई यह है की अशोक तंवर जिस देश की सबसे उच्चस्तर की शिक्षण संस्थान जेएनयू से पीएचडी करने के बाद राजनीति में आए तो वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना चुके थे। जब 2009 में उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर सिरसा से पहली बार चुनाव जीता तो आज तक अपनी इस कर्मभूमि का कर्ज उतारने के लिए राजनीति के धुरंधरों से चंडीगढ़ से लेकर दिल्ली में लड़ते नजर आए। उनके विरोधी उसे अपना दरबारी बनाना चाहते थे। इसलिए अशोक तंवर को समय समय पर उन राजनीतिक दलों से जुड़ाव बनाना पड़ा जो आत्मभाव से व्ववस्था परिवर्तन का दावा कर रहे थे। तंवर चाहते तो अपने राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए मिल रहे राज्यसभा सदस्य निमंत्रण से लेकर अनेक तरह की अन्य सुविधाओं का भरपूर फायदा ले सकते थे लेकिन उन्होंने हमेशा अपने साथियों के साथ संघर्ष का रास्ता चुना। इसलिए बार बार यह कहना की अशोक तंवर बार बाद राजनीतिक दल बदलते रहते हैं इससे उनकी गरिमा कमजोर हुई है। यह उनके विरोधियों के लिए मुद्दा हो सकता है लेकिन संपूर्ण समाज के लिए वे आज भी एक आवाज में हर समय नजर आने वाले वे जमीनी नेता है जिसकी जवानी सड़कों पर आमजन की आवाज को मजबूती देने के लिए तपती और निखरती रही है। अगर हमारा यह दावा गलत है तो बताइए सबसे मजबूत और बेहद साधारण परिवार से संबंध रखने वाला यह नेता जिसकी राजनीतिक यात्रा के सामने किसी की हिम्मत नही की वह इस तरह का जज्बा और अपना सबकुछ कुर्बान करने के लिए हमेशा तत्पर नजर आए। तंवर के पास आज भी ना कोई बैंक बैलेंस है और ना ही मनी एंड मसल पॉवर की राजनीति। उसके बाद केवल पीड़ित शोषित समाज का मिल रहा वह बेशुमार प्यार है जिसने आज भी इस नेता की संघर्ष क्षमता को कमजोर नही होने दिया। उसका शरीर उस खेत की तरह है जिसकी माटी झुलसाने वाली गर्मी को देखकर खिलखिलाती है। अशोक तंवर के शब्दों में उस साधारण परिवार का दर्द चिल्लाता रहता है जिसे मौजूदा सिस्टम ने किसी ना किसी तरीके से कुचल रखा है। इसलिए अशोक तंवर सिरसा की सीट पर सांसद बनने नही बेहतर बदलाव की आवाज बनने के लिए अपने परिवार में आया है जिसका आशीर्वाद मिलने के बाद इस युवा नेता की गूंज दिल्ली में सुनाई देगी तो हरियाणा में असर डालती नजर आएगी।