राव इंद्रजीत की राजनीति यात्रा को इस लेख से समझिए

 20 साल से एक ही क्लास में राव, साथ पढ़ने वाले अब उनके गुरुजी


 रणघोष खास. सुभाष चौधरी


हरियाणा में सबसे कामयाब और सीनियर नेता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नजर में गुरुग्राम से महेंद्रगढ़ तक के पटटे के सबसे ताकतवर लीडर। इतना सबकुछ मिलने के बाद भी राव इंद्रजीत सिंह केंद्र में उसी पायदान पर है जो उन्हें 2004 में यूपीए की सरकार में मिला था। वे आज तक अलग अलग वजहों से राज्य से कैबिनेट मंत्री तक बनने की हैसियत नही बना पाए हैं।  यानि उनकी स्थिति उस छात्र की तरह है जिसकी क्लास में गुरुजी जमकर तारीफ करते हैं, समारोह में प्रशस्ति पत्र भी मिलता है लेकिन परीक्षा में रजल्ट कुछ ओर आता है। नतीजा यह छात्र लंबे समय तक एक ही क्लास में पढ़ाई कर रहा है। एक समय बाद उसके साथ पढ़ने वाले दोस्त शिक्षक बनकर अब उसे ही पढ़ा रहे हैं।

दरअसल केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की राजनीति यात्रा के बहाने भाजपा और कांग्रेस की समय के साथ बदलती रही राजनीति को आसानी से समझा जा सकता है। कांग्रेस के सार्वजनिक मंच पर गांधी परिवार का कोई सदस्य अपने किसी नेता की तारीफ करता है तो वह आगे चलकर मजबूत भी नजर आता है। यानि जो बोला गया उस पर अमल हुआ। भाजपा में स्थिति एकदम उलट है। यहां नेता को पहले अच्छी तरह से परखा जांचा जाता है। खुफिया तरीके से उसकी वर्किंग स्टाइल पर नजर रखी जाती है। सार्वजनिक तौर पर कांग्रेस स्टाइल में पीठ भी थपथपाई जाती है ताकि संगठन में गुटबाजी का संदेश ना चला जाए। किस नेता को मजबूत करना है किसे किसे इधर उधर करना है इसकी भनक एक कान से दूसरे कान तक को नही होती है। इसलिए गौर करिए मीडिया में भाजपा के बड़े फैसलों को लेकर जो खबरें प्रकाशित और चलाई जाती है। वह उनके अनुमान, दावों के खिलाफ उलट होती है। लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण हरियाणा में एम्स समेत अनेक बड़ी परियोजना के कार्यक्रम में राव इंद्रजीत को अपना दोस्त बताया। इससे पहले भी तमाम बड़े नेता राव की प्रशंसा में गंगा बहाते रहे हैं। 16 जुलाई को महेंद्रगढ़ आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुरुग्राम से लेकर महेंद्रगढ़ का राजनीति पटटे का मालिक राव को बता दिया। इतना सबकुछ होने के बाद भी राव उदास और परेशान है। वे शायद देश के उन चुंनिदा नेताओं में शामिल है जिसके पास राजनीति की नदिया चारों तरफ बह रही है फिर भी प्यासे हैं। इसलिए इस लोकसभा चुनाव में जीतने के बाद जिस तरह उन्होंने महेंद्रगढ़ जिले की तरफ रूख किया है। इसका साफ संदेश है की वे आंतरिक तौर पर राजनीति के सबसे उलझन दौर से गुजर रहे हैं इसलिए अपने पुराने घर की तरफ चल पड़े हैं जिसे उन्होंने 2009 में परिसीमन के चलते छोड़ दिया था। जिस गुरुग्राम सीट से लगातार तीसरी बार विजयी हुए। वहां जनता के बीच आभार जताने की बजाय महेंद्रगढ़ में जाकर जनता का शुक्रिया जताना यह इशारा करता है की राव दो महीने बाद होने जा रहे हरियाणा विधानसभा चुनाव  को लेकर कुछ अलग ही इरादा बना चुके हैं। बेटी आरती राव का अटेली को पहली पंसद बताकर चुनाव लड़ने का एलान यह बताने के लिए काफी है की वे अब भाजपा के तौर तरीकों से नही अपने मिजाज से आगे की राजनीति करेंगे। इसके लिए वे भाजपा से सीधे तौर पर टकराने के लिए भी तैयार है। हरियाणा में मौजूदा माहौल भाजपा के लिए उतना मजबूत नही है की वे राव को एक सिरे से नकार दे लेकिन यह भी तय है  की भाजपा पूरी तरह से उनके मुताबिक हरगिज नही चलेगी। पिछले 10 सालों में भाजपा में राव का विरोधी धड़ा पहले से ज्यादा ताकतवर हो चुका है जो नांगल चौधरी से लेकर बादशाहपुर तक शोर मचाता हुआ नजर आ रहा है। इस स्थिति में अगर भाजपा हाई कमान टिकट को लेकर समय पर ही तस्वीर साफ कर दे तो उसके पास भाजपा को संभालने का अवसर मिल जाएगा जिस तरह लोकसभा चुनाव में हुए भारी भरकम नुकसान को वह चौतरफा डैमेज कंट्रोल करने में लगी हुई नजर आ रही है।