-सतीश यादव ने कहा 15 मिनट में मामला दर्ज हो जाएगा निपटा लो, लांबा ने कहा ब्लैकमेलिंग नहीं..
रणघोष खास. सुभाष चौधरी
रेवाड़ी शहर में एक महिला से छेड़छाड़ से जुड़ा मामला 50 लाख की ब्लैकमेलिंग आरोप प्रत्यारोप के रास्ते वायरल हुई ऑडियो में चल रही बातचीत में इस्तेमाल हो रहे शब्दों के पीछे छिपे सच के पास जाकर ठहर गया है। इस ऑडियो में पूर्व जिला प्रमुख सतीश यादव शमशेर सिंह लांबा से बातचीत कर रहे हैं। सतीश का कहना है कि उसके पिता ने एक महिला के साथ छेड़छाड़ की है। उसकी शिकायत उन्होंने रूकवा रखी है। 15 मिनट बाद एससीएसटी व छेड़छाड़ का मामला दर्ज होने जा रहा है। सोसायटी के लोगों में गहरा रोष है। इसे निपटा लो। 8 मिनट की बातचीत में शमशेर लांबा व सतीश यादव के बीच जबरदस्त शब्दों से एक दूसरे पर हमले होते हैं। शब्दों में ज्यादातर ब्लैकमेलिंग का इस्तेमाल किया गया। जिस उम्मीद से सतीश यादव ने लांबा को फोन किया अंत रजल्ट उलटा निकला। बातचीत में लांबा बजाय घबराने के हावी होता नजर आया। आडियो में यह स्पष्ट हो रहा था कि महिला से छेड़छाड़ का मामला एकदम नया नहीं होकर ठहर ठहर कर आगे पीछे हो रहा था। शमशेर लांबा के पिता विद्यानंद लांबा भाजपा कर्मचारी प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक है। बातचीत में लांबा कहीं भी किसी तरह के दबाव में नजर नहीं आया उलटा उसने सतीश यादव, बार एसोसिएशन प्रधान शमशेर सिंह यादव एवं एडवोकेट बाबूलाल लांबा पर ही ताबड़तोड़ हमले जारी रखे। ऑडियो में कहीं भी इस मामले को लेकर लेन देन का साफ इशारा नहीं हुआ लेकिन लांबा के शब्दों से यह जाहिर हो रहा था कि उसे इस मामले में घेरकर कुछ ना कुछ ऐसा करने का प्रयास किया जा रहा है जिसे वह बार बार ब्लैकमेलिंग कहकर चिल्ला रहा था। सतीश यादव बातचीत में बार बार स्पष्ट कर रहे थे कि वे इस तरह के मामलों को आपस में निपटाकर खत्म करने के पक्ष में हैं लेकिन लांबा बाबूलाल खोला एवं शमशेर यादव का नाम आते ही आर पार करने के मूड में नजर आया। ऐसा लग रहा था कि लांबा ने पहले ही तय कर लिया था कि वह बजाय किसी दबाव में आने के सीधा दो दो हाथ करने के लिए तैयार है। इस ऑडियो से इतना जरूर हो गया कि सतीश यादव का लांबा को फोन करना मामले को दुरुस्त करने की बजाय बिखर गया। जिस तेजी ये यह ऑडियो वायरल हो रही है उसका सीधा नुकसान बजाय लांबा को होने के विशेषतौर से सतीश यादव, शमशेर यादव को हो रहा है। वजह लांबा की रेवाड़ी में अपनी कोई सामाजिक और राजनीतिक पहचान नहीं है जबकि सतीश यादव व शमशेर यादव स्थानीय जिम्मेदारियों के चलते हैसियत रखते हैं इसलिए यह मामला साधारण ना होकर हाई प्रोफाइल होने की वजह से चर्चा बटोर रहा है।