करूर भगदड़ पीड़ितों को सरकारी नौकरी देने का फैसला हाई कोर्ट ने रद्द किया

मुख्यमंत्री विजय के आदेश पर लगी रोक


विपक्ष ने भी नियुक्तियों पर उठाए थे सवाल


रणघोष न्यूज़। चेन्नई
मद्रास हाई कोर्ट ने सोमवार को मुख्यमंत्री जोसेफ विजय सरकार के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसके तहत करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी दी गई थी। अदालत के आदेश के बाद इन नियुक्तियों पर कानूनी रोक लग गई है।
करूर में 27 सितंबर 2025 को टीवीके प्रमुख विजय की रैली के दौरान हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। घटना के बाद भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
मुख्यमंत्री बनने के बाद 10 जुलाई को विजय ने 31 पीड़ित परिवारों के सदस्यों को जूनियर असिस्टेंट, कार्यालय सहायक और चौकीदार सहित विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्ति पत्र सौंपे थे। इसके अलावा एक पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई थी। ये नियुक्तियां स्कूल शिक्षा, राजस्व, ग्रामीण विकास, शहरी मामलों, पुलिस, पंजीकरण, नगर पंचायत विभागों तथा करूर कलेक्टर कार्यालय में की गई थीं।
इस मामले में विपक्षी दल एआईएडीएमके ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए थे। पार्टी के वरिष्ठ नेता आर.बी. उदयकुमार ने कहा था कि सरकारी नौकरियां निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के तहत ही दी जानी चाहिए और नियमों से हटकर की गई नियुक्तियां युवाओं के साथ अन्याय हैं।
मद्रास हाई कोर्ट के ताजा फैसले को इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय माना जा रहा है। अदालत के आदेश के बाद राज्य सरकार की ओर से दी गई नियुक्तियों की वैधता पर फिलहाल रोक लग गई है।

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