टीम इंडिया के लगातार व्यस्त कार्यक्रम पर गावस्कर की चिंता, बोले- इंडिया क्रिकेट टीम ही पूरा भारतीय क्रिकेट नहीं; घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता देना जरूरी
सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट टीम के लगातार व्यस्त कार्यक्रम और खिलाड़ियों के वर्कलोड को लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) और बीसीसीआई को गंभीरता से सोचने की सलाह दी है। पूर्व भारतीय कप्तान का कहना है कि भारतीय क्रिकेटरों को लगातार सीरीज में झोंकते रहना सही नहीं है। उन्होंने बेहद तीखे अंदाज में कहा कि भारतीय खिलाड़ी न तो मशीन हैं और न ही गन्ना, जिसे रस की हर बूंद निकलने तक निचोड़ा जाता रहे।
गावस्कर ने स्पोर्टस्टार के लिए लिखे अपने कॉलम में भारतीय क्रिकेट के मौजूदा कार्यक्रम और खिलाड़ियों के वर्कलोड पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हाल ही में भारतीय क्रिकेट का जायजा लेने के लिए हुई बैठक में इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की गई है। उन्हें उम्मीद है कि जब 2027 से शुरू होने वाले अगले चार साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर पर चर्चा के लिए आईसीसी की बैठक होगी, तब फैसला लेने वाले लोग खिलाड़ियों के व्यस्त कार्यक्रम पर गंभीरता से विचार करेंगे।
गावस्कर के मुताबिक, भारतीय खिलाड़ियों को लगातार क्रिकेट खेलने के लिए मजबूर करने का असर उनके प्रदर्शन और लंबे करियर पर पड़ सकता है। भारतीय टीम पिछले कुछ समय से लगातार अलग-अलग प्रारूपों में सीरीज खेल रही है। एक सीरीज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो चुकी है, जबकि उसके स्थगित नहीं होने की स्थिति में भारतीय टीम अभी बांग्लादेश में सीमित ओवरों की सीरीज खेल रही होती।
‘इंडिया क्रिकेट टीम ही पूरा इंडियन क्रिकेट नहीं’
सुनील गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट की मौजूदा संरचना पर बात करते हुए कहा कि ‘इंडिया क्रिकेट टीम इंडियन क्रिकेट नहीं है।’ उनके मुताबिक, भारतीय टीम पूरे भारतीय क्रिकेट का केवल एक हिस्सा है और टीम इंडिया भारतीय क्रिकेट का बाय-प्रोडक्ट है।
गावस्कर का मानना है कि भारतीय क्रिकेट में अंतरराष्ट्रीय टीम के साथ घरेलू क्रिकेट को भी बराबर प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि भारत एक समय में कई टीमें मैदान पर उतारने की क्षमता रखता है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसा कब तक किया जा सकता है।
उनके अनुसार, मौजूदा समय में क्रिकेट की मात्रा इतनी ज्यादा हो गई है कि खिलाड़ियों पर लगातार दबाव बना हुआ है। अगर इसी तरह क्रिकेट जारी रहा तो भारत के लिए लंबे समय तक लगातार ट्रॉफियां जीतना मुश्किल हो सकता है।
‘बेंच स्ट्रेंथ मजबूत है, लेकिन…’
भारतीय क्रिकेट की मजबूत बेंच स्ट्रेंथ को लेकर अक्सर यह दावा किया जाता है कि भारत एक साथ तीन अंतरराष्ट्रीय टीमें उतार सकता है। गावस्कर ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज नहीं किया, लेकिन उन्होंने इसके व्यावहारिक पक्ष पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि भारत की बेंच स्ट्रेंथ इतनी मजबूत होना निश्चित तौर पर गर्व की बात है कि देश एक साथ कई टीमें उतार सकता है। लेकिन केवल बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपलब्ध होना इस बात की गारंटी नहीं है कि भारत लगातार बड़ी ट्रॉफियां जीतता रहेगा।
गावस्कर ने हाल के नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा समय में एक भारतीय टीम भी लगातार ज्यादा ट्रॉफियां जीतने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हो रही है। ऐसे में केवल बेंच स्ट्रेंथ की संख्या को आधार बनाकर लगातार क्रिकेट खेलते रहना सही रणनीति नहीं हो सकती।
घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता देने की जरूरत
गावस्कर ने भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए घरेलू क्रिकेट को सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया। उनका कहना है कि अगर घरेलू क्रिकेट को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी गई तो भारतीय क्रिकेट की प्रतिभाओं की पाइपलाइन प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि देश के पास प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी नहीं है, लेकिन दुनिया को हराने वाले खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए मजबूत घरेलू ढांचा जरूरी है। घरेलू क्रिकेट ही वह आधार है, जहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार होते हैं और लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट को मजबूती मिलती है।
गावस्कर ने एशियन गेम्स में भारतीय टीम के स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद भी जताई। उन्होंने कहा कि एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतना टीम में नई ऊर्जा भर सकता है और आने वाले मुकाबलों के लिए खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ा सकता है। उन्होंने भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमों को स्वर्ण पदक के लिए शुभकामनाएं दीं।
2027 से शुरू होने वाले कैलेंडर पर नजर
गावस्कर ने खास तौर पर 2027 से शुरू होने वाले अगले चार साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर की योजना को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आईसीसी जब अगले चक्र के कार्यक्रम पर चर्चा करे तो खिलाड़ियों के वर्कलोड को भी ध्यान में रखना चाहिए।
भारतीय क्रिकेट की ताकत उसकी बड़ी प्रतिभा और मजबूत घरेलू ढांचे में है, लेकिन लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम और घरेलू क्रिकेट के लिए समय देना भी जरूरी है। गावस्कर का संदेश साफ है कि टीम इंडिया की सफलता केवल ज्यादा मैच खेलने में नहीं, बल्कि सही तरीके से खिलाड़ियों और क्रिकेट व्यवस्था को संभालने में है।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय क्रिकेट टीम लगातार व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा रही है। ऐसे में गावस्कर ने आईसीसी और बीसीसीआई दोनों के सामने यह सवाल रखा है कि खिलाड़ियों से अधिकतम प्रदर्शन लेने के लिए क्या उन्हें लगातार मैदान पर उतारना जरूरी है या बेहतर योजना के साथ उन्हें आराम और घरेलू क्रिकेट का समय भी दिया जाना चाहिए।